Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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नमाज़
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो सजदों के बीच में यह दुआ पढ़ते थे : "ऐ अल्लाह! तू मुझे माफ कर दे, मेरे ऊपर रहम कर, मुझे आफियत (स्वास्थ्य इत्यादि) दे तथा मुझे रोज़ी प्रदान कर।
नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब नमाज़ की एकल रकअतों में होते तो उस वक़्त तक खड़े न होते जब तक सीधे बैठ न जाते।
मालिक बिन हुवैरिस लैसी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, उन्होंने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को नमाज…
नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक मास तक रुकू के बाद क़ुनूत (नाज़िला) पढ़ा, (इस में) आप बनू सुलैम के कुछ क़बीलों- पर बद्दुआ करते थे।
आस़िम से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से क़ुनूत के विषय में पूछा, तो उन्होंने कहा किः यह रुकू के पूर्व है, तो मैंने कहा कि अमूक व्यक्ति का कथन है कि आप कहते हैं कि (क़ुनूत) रुकू के पश्चात है, तो उन्हों ने कहाः उसने झूठ कहा, फिर उन्होंने हम से…
नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- क़ुनूत उसी समय पढ़ा करते थे जब आप किसी के लिए दुआ करते या किसी पर बद्दुआ करते।
हे मेरे पिता, आप ने रसूलुल्लाह- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, तथा अबू बकर, उमर, उस्मान एवं यहां कूफा में अली- रज़ियल्लाहु अन्हुम- के पीछे नमाज़ पढ़ी है, क्या वो लोग फज्र में (दुआ -ए-) क़ुनूत पढ़ते थे? उन्होंने उत्तर देते हुए कहा किः यह बिदअत है।
अबू मालिक अशजई साद बिन तारिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं किः मैंने अपने पिता से कहाः हे मेरे पिता, आप ने रसूलुल्लाह- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- तथा अबू बकर, उमर, उस्मान एवं यहां कूफा में अली- रज़ियल्लाहु अन्हुम- के पीछे नमाज़ पढ़ी है, क्या वे लोग फज्र म…
जब तुम में का कोई सज्दा करे तो उस प्रकार से न बैठे जैसे ऊँट बैठता है और धुटने से पुर्व अपने हाथों को रखे।
इब्ने उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अपने हाथों को घुटनों से पहले रखते थे, और फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- भी ऐसा ही करते थे।
इब्ने उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अपने हाथों को घुटनों से पहले रखते थे, और फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैह…
नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बैठते थे तो दुआ किया करते थे, अपने दाहिने हाथ को अपने दाहिने जांघ पर रखा करते थे तथा बाएं हाथ को बाएं जांघ पर रखा करते थे, और तर्जनी (शहादत वाली ) उंगली से इशारा करते रहते थे, तथा अपने उंगूठे को मध्यमा (बीच वाली उंगली) पर रखते थे, और अपने बाएं हाथ का गोला बनाकर उस से घुटने को पकड़ते।
अब्दुल्ला इब्ने ज़ुबौर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है किनबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बैठते थे तो दुआ किया करते थे, अपने दाहिने हाथ को अपने दाहिने जांघ पर रखा करते थे तथा बाएं हाथ को बाएं जांघ पर रखते थे, और तर्जनी (शहादत वाली ) उँगली से इशारा करते रहते थे, तथा अपन…
अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें तशह्हुद सिखाते थे, जिस प्रकार हमें क़ुरआन की सूरा सिखाते थे।
इब्ने अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें तशह्हुद सिखाते थे, जिस प्रकार हमें क़ुरआन की सूरा सिखाते थे। आप कहा करते थेः मुबारक बंदगियां तथा पाक सलातें केवल अल्लाह ही के लिए हैं, ऐ नबी आप पर सलामती और अल्लाह की रहमत…
मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ नमाज़ पढ़ी। आप अपनी दाईं ओर "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बकरकातुह" और बाईं ओर "अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बकरकातुह" कहकर सलाम फेरते थे।
वाइल बिन हुज्र रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-…
ऐ अल्लाह! तू ही शांति वाला है और तेरी ओर से ही शांति है। तू बरकत वाला है ऐ महानता और सम्मान वाले
सौबान रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ समाप्त करते, तो तीन बार अल्लाह से क्षमा माँगते और यह दुआ पढ़ते : "ऐ अल्लाह! तू ही शांति वाला है और तेरी ओर से ही शांति है। तू बरकत वाला है ऐ महानता और सम्मान वाले!" वलीद क…

