“संभवतः तुम लोग अपने इमाम के पीछे पढ़ते हो"? हमने कहा : हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल! आपने फ़रमाया : "ऐसा न करो। हाँ, मगर सूरा फ़ातिहा पढ़ लिया करो; क्योंकि जो उसे नहीं पढ़ता, उसकी नमाज़ ही नहीं होती।”
उबादा बिन सामित (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे फ़ज्र की नमाज़ पढ़ रहे थे। आपने तिलावत की, तो आपको तिलात करने में बोझिलपन का एहसास हुआ। अतः, जब नमाज़ पूरी कर चुके, तो फ़रमाया : “संभवतः तुम लोग अपन…

