मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को आलती-पालती मार कर बैठे होने की दशा में नमाज़ पढ़ते हुए देखा।
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आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं किः मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को आलती-पालती मार कर बैठे होने की दशा में नमाज़ पढ़ते हुए देखा।
Explanation
अगर नमाज़ी फ़र्ज़ नमाज़ में खड़े होकर नमाज़ पढ़ने की शक्ति न रखता हो, तो पाल्थी मारकर बैठकर नमाज़ पढ़ेगा। ऐसा मुसतहब है। लेकिन इस तरह केवल क़याम के बदले में बैठेगा। रही बात दो सजदों के बीच में तथा दोनों तशह्हुद के बीच में बैठने की, तो पहले तशह्हुद में बाएँ क़दम को बिछाकर और दूसरे तशह्हुद में बाएं पांव को दाईं ओर निकालकर अपने नितंब को धरती पर रखकर बैठेगा।
लेकिन इन तरीक़ों से बैठना केवल मुसतहब एवं उत्तम है। अगर उक्त तरीकों को छोड़ अन्य तरीकों से बैठता है, तो नमाज़ हो जाएगी। क्योंकि असल वांछित वस्तु बैठना है और बैठने के ये तरीक़े अनिवार्यता के दायरे से बाहर की चीज़ें हैं।
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