افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

12 hadeeths in this category
#2989HadeethEnc[सह़ीह़]

यदि कोई व्यक्ति तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हें झाँके और तुम कंकड़ मारकर उसकी आँख फोड़ दो, तो तुम्हें कोई गुनाह न होगा

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#3002HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दो अथवा तीन अथवा चार अंगुल समान रेशम पहनने की अनुमति दी है

उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने रेशम पहनने से मना किया है, परन्तु इतना-सा। तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें शहादत की और बीच वाली दो अंगुलियाँ उठाकर दिखाईं। तथा मुस्लिम की रिवायत में है…

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#3005HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया

अबू वाक़िद हारिस बिन औफ़ (रज़ियल्लाहु अनहु) सेे रिवायत है कि एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में लोगों के साथ बैठे थे कि इतने में तीन आदमी आए। उनमें से दो लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और एक वापस चला गया। जो दो व्यक्ति अ…

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#3006HadeethEnc[सह़ीह़]

आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया कि कह लिया करोः اللهم فاطِرَ السماوات والأرض عالم الغيبِ والشهادة، ربَّ كُلِّ شَيءٍ ومَلِيكَه، أَشْهد أن لا إله إلا أنت، أعوذ بك من شرِّ نفسي وشرِّ الشيطان وشِرْكِهِ

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अबू बक्र सिद्दीक (रज़ियल्लाहु अनहु) ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे कुछ ऐसे शब्द बताइए, जो मैं सुब्ह- शाम कहा करूँ। आपने फ़रमायाः कह लिया करोः اللهم فاطِرَ السماوات والأرض عالم الغيبِ والشهادة، ربَّ كُلِّ شَيءٍ ومَلِيكَه، أ…

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#3007HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप लगाना चाहता हूँ। दरअसल बात यह है कि जिबरील अलैहिस्सलाम मेरे पास आए और बताया कि सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह फ़रिश्तों के निकट तुम लोगों पर गर्व कर रहा है।

अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु मस्जिद में लोगों की एक सभा के पास आए और पूछा : तुम यहाँ किसलिए बैठे हो? लोगों ने जवाब दिया : हम अल्लाह का ज़िक्र करने के लिए बैठे हैं। मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : क़सम खाकर बताओ कि क्या तुम…

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#3008HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शाम के समय यह दुआ पढ़तेः "أمسينا وأمسى الملك لله، والحمد لله، لا إله إلا الله وحده لا شريك له

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शाम के समय यह दुआ पढ़तेः "أمسينا وأمسى الملك لله، والحمد لله، لا إله إلا الله وحده لا شريك له" (अर्थात्ः हमने शाम की और अल्लाह के आदेश से देश ने शाम की। सारी प्रशंसा अल्लाह की है…

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#3010HadeethEnc[स़ह़ीह़]

इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं…

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#3014HadeethEnc[स़ह़ीह़]

इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे।

मुग़ीरा रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : मैं एक यात्रा में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ था।…

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#3016HadeethEnc[सह़ीह़]

आदमी एक नींद सोएगा और उसके दिल से अमानत उठा ली जाएगी। केवल असका धुंधला- सा निशान रह जाएगा। फिर और एक नींद लेगा, जिसके साथ उसके दिल से अमानत समाप्त कर दी जाएगी। केवल फफोले की तरह उसका निशान बाक़ी रह जाएगा

हुज़ैफ़ा बिन यमान (रज़ियल्लाहु अहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें दो बातें बताई थीं। एक मैंने देख ली है और दूसरी की प्रतीक्षा में हूँ। आपने हमें बताया कि अमानत लोगों के दिलों की जड़ में उतरी। फिर क़ुरआन उतरा और लोगों ने उसे क़ुरआन और सुन्…

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#3021HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई जनाबत (नापाकी) की अवस्था में सो सकता है? आपने फ़रमायाः हाँ, जब तुममें से कोई वज़ू कर ले, तो सो सकता है।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) ने कहाः ऐ अल…

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