افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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जनाज़े

12 hadeeths in this category
#5209HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे एक ऐसी स्त्री की नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ी, जो निफ़ास (वह प्राकृतिक रक्त, जो प्रसव के बाद निकलता है) की अवधि में मर गई थी, तो आप उसके बीच में खड़े हुए।

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#5319HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह केरसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सफ़ेद यमनी कपड़ों में कफ़नाया गया। उनमें न कुर्ता था और न पगड़ी थी।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह केरसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सफ़ेद यमनी कपड़ों में कफ…

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#5379HadeethEnc[स़ह़ीह़]

यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया।

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उस बीमारी के दौरान, जिससे आप ठीक न हो सके, फ़रमाया : "यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया।" वह कह…

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#5396HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसी दन नजाशी की मृत्यु की सूचना दी, जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी। आप लोगों के साथ ईदगाह की ओर निकले, उन्हें सफ़ में खड़ा किया और चार तकबीरें कहीं।

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#5397HadeethEnc[सह़ीह़]

"जो जनाज़े में नमाज़ संपन्न होने तक शामिल रहा, उसके लिए एक क़ीरात नेकी है और जो दफ़नाए जाने तक शरीक रहा, उसके लिए दो क़ीरात नेकी है।" कहा गया कि दो क़ीरात क्या हैं? तो फ़रमायाः "दो बड़े-बड़े पहाड़ो के बराबर।"

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जो जनाज़े में नमाज़ संपन्न होने तक शामिल रहा, उसके लिए एक क़ीरात नेकी है और जो दफ़नाए जाने तक शरीक रहा, उसके लिए दो क़ीरात नेकी है।" कहा गया कि दो क़ीरात क्या हैं? तो फ़रमाय…

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#6612HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- का एक पुत्र बीमार था। अबू तलहा कहीं बाहर गए, तो उसकी मृत्यू हो गई।

अनस -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- का एक पुत्र बीमार था। अबू तलहा कहीं बाहर गए, तो उसकी मृत्यू हो गई। जब वह लौटकर आए, तो कहा : मेरे बेटे का क्या हुआ? बच्चे की माँ उम्मे सुलैम ने कहा : वह पहले से अधिक आराम में है। फिर उन्होंने उनके…

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#8266HadeethEnc[सह़ीह़]

जो अल्लाह से मिलना पसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है और जो अल्लाह से मिलना नापसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “जो अल्लाह से मिलना पसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है और जो अल्लाह से मिलना नापसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।” मैंने कहा : ऐ अल्…

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#8410HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उहद के शहीदों के पास गए और आठ साल पश्चात उनके लिए दुआ की, जैसे जीवित तथा मृत को विदा कर रहे हैं और उनसे विदाई ले रहे हैं

उक़बा बिन आमिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उहद के शहीदों की क़ब्रों के पास गए और आठ साल पश्चात उनके लिए दुआ की, जैसे जीवित तथा मृत को विदा कर रहे हैं, फिर मेंबर पर चढ़े और फ़रमाया: बेशक मैं तुम से पूर्व ही जाने वाला हूँ और तु…

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#8870HadeethEnc[सह़ीह़]

जिस मुस्लिम व्यक्ति के बारे में चार व्यक्तियों ने भलाई की गवाही दी, अल्लाह उसे जन्नत में दाख़िल कर देगा

अबुल असवद कहते हैं कि मैं मदीने आया तो उमर बिन खत्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास बैठा। इसी बीच एक जनाज़ा वहां से गुज़रा तो उस मृतक की प्रशंसा की गई। उमर ने कहा: अनिवार्य हो गई। फिर दूसरा जनाज़ा गुज़रा तो उसकी भी प्रशंसा की गई। उमर ने कहा: वाजिब हो गई। फिर तीसरा जनाज़ा गु…

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#8872HadeethEnc[ह़सन]

अब्दुल्लाह बिन अबू औफ़ा ने अपनी एक बेटी के ज़नाजे पर चार तकबीरें कहीं और चौथी तकबीर के बाद दो तकबीरों के बीच जितनी अवधि होती है, उसके समान खड़े रहे और उसके लिए क्षमा याचना और दुआ करते रहे, फिर फ़रमाया: अल्लाहु के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐसा किया करते थे

अब्दुल्लाह बिन अबू औफ़ा ने अपनी एक बेटी के ज़नाजे पर चार तकबीरें कहीं और चौथी तकबीर के बाद दो तकबीरों के बीच जितनी अवधि होती है, उसके समान खड़े रहे और उसके लिए क्षमा याचना की और दुआ करते रहे, फिर फ़रमाया: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐसा किया करते थे। एक रि…

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