افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
Islamic Reads · HadeethEnc

Prophetic Hadeeth Encyclopedia

Search and read verified Prophetic hadeeth translations, explanations, benefits, categories and source attribution. Page 14.

Content source:HadeethEnc.com·Version 1.58.0
2,313hadeeths
Advanced search

Search the Hadeeth Encyclopedia

Smart instant results tolerate minor spelling mistakes, with every filter in one place.

194hadeeths
Clear filters
Categories

सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#10983HadeethEnc[सह़ीह़]

जिस दिन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने में क़दम रखा, तो उसकी हर चीज़ चमक उठी और जिस दिन आपकी मृत्यु हुई, उसकी हर चीज़ पर अंधेरा छा गया।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि जिस दिन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने में क़दम रखा, तो उसकी हर चीज़ चमक उठी और जिस दिन आपकी मृत्यु हुई, उसकी हर चीज़ पर अंधेरा छा गया। जब हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को दफ़न करके हाथ झा…

Read hadeeth
Share
#10986HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरे वारिस न दीनार तक़सीम करेंगे, न दिरहम। जो कुछ मैं अपनी पत्नियों के ख़र्च और अपने लिये काम करने वाले (ख़लीफ़ा आदि ) के ख़र्च के बाद छोड़ूँ, वह सदक़ा है।

Read hadeeth
Share
#10987HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने न दीनार छोड़े, न दिरहम, न बकरी, न ऊँट और न किसी चीज़ की वसीयत की।

आइशा -रज़ियल्लाहु अंहा- का वर्णन है, वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने न दीनार छोड…

Read hadeeth
Share
#10988HadeethEnc[सह़ीह़]

किसी भी नबी को जब उठाया गया, तो उसे जन्नत में उसका ठिकाना दिखा दिया गया और फिर उसे अख़्तियार दिया गया (कि चाहे तो दुनिया में रहे या जन्नत में अपना स्थान ग्रहण कर ले)।" फिर जब आपकी मृत्यु का समय आया, तो आप बेहोश हो गए। उस समय आपका सर मेरी जाँघ पर था। होश आया, तो घर की छत की ओर नज़र उठाई और फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, सबसे ऊँचा मित्र!"

आइशा -रज़ियल्लाहु अंहा- का वर्णन है कि अल्लाह रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब स्वस्थ थे, तो कहा करते थेः "जब किसी नबी को उठाया गया, तो उसे जन्नत में उसका ठिकाना दिखा दिया गया और फिर उसे अख़्तियार दिया गया (कि चाहे तो दुनिया में रहे या जन्नत में अपना स्थान ग्रहण कर ले…

Read hadeeth
Share
#11159HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से पूछा कि मुश्रिकों का अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ कठोरतम व्यवहार क्या था? तो उन्होंने कहाः मैंने देखा कि जिस समय रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ पढ़ रहे थे उस समय उक़बा बिन अबी मुईत अआप के पास आया तथा उसने अपनी चादर आपकी गरदन में डाली और ज़ोर से आपका गला घोंटने लगा।

उरवा बिन ज़ुबैर कहते हैं कि मैंने अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से पूछा कि मुश्रिकों का अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ कठोरतम व्यवहार क्या था? तो उन्होंने कहाः मैंने देखा कि जिस समय रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ पढ़ रहे थे उस समय उक़…

Read hadeeth
Share
#11171HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह, मैं इससे मुहब्बत करता हूँ, तू भी इससे मुहब्बत कर और हर उस व्यक्ति से मुहब्बत कर, जो इससे मुहब्बत करे।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अंहु- कहते हैं कि मैं मदीने के किसी बाज़ार में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ था। आप वापस हुए, तो मैं भी वापस हो गया। आप (फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अंहु का घर पहुँचे और) बोलेः "बच्चा कहाँ है? -आपने यह बात तीन बार कही- हसन बिन अली को ब…

Read hadeeth
Share
#11175HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में से केवेल ख़दीजा पर ग़ैरत आती थी। हालाँकि मेरे विवाह से पहले ही उनका निधन हो चुका था। वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इस में से ख़दीजा की सहेलियों को भेजो।"

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मुझे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में से केवेल ख़दीजा पर ग़ैरत आती थी। हालाँकि मेरे विवाह से पहले ही उनका निधन हो चुका था। वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इस में से ख़…

Read hadeeth
Share
#11178HadeethEnc[सह़ीह़]

"ऐ आइश! यह जिबरील हैं, जो तुम्हें सलाम कहते हैं।" तो मैंने यूँ जवाब दियाः "व अलैहिस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु। आप वह देखते हैं, जो मैं नहीं देखती।"

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि एक दिन नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनसे फरमाया: "ऐ आइश! यह जिबरील हैं, जो तुम्हें सलाम कहते हैं।" तो मैंने यूँ जवाब दियाः "व अलैहिस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु। आप वह देखते हैं, जो मैं नहीं देखती।" उन्होंने यह -देखने की-…

Read hadeeth
Share
#11179HadeethEnc[सह़ीह़]

पुरुषों में से बहुत-से लोग संपूर्ण हुए, लेकिन स्त्रियों में से संपूर्ण केवल फ़िरऔन की पत्नी आसिया और मरयम बिंत इमरान हुईं। हाँ, सारी स्त्रियों में आइशा का वही स्थान है, जो सारे खानों में सरीद का है।

अबू मूसा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "पुरुषों में से बहुत-से लोग संपूर्ण हुए, लेकिन स्त्रियों में से संपूर्ण केवल फ़िरऔन की पत्नी आसिया और मरयम बिंत इमरान हुईं। हाँ, सारी स्त्रियों में आइशा का वही स्थान है, जो सा…

Read hadeeth
Share
#11180HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं निश्चित रूप से जानता हूँ कि कब तुम मुझ से ख़ुश रहती हो और कब मुझ से नाराज़ रहती हो।

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मुझसे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमायाः "मैं निश्चित रूप से जानता हूँ कि कब तुम मुझ से ख़ुश रहती हो और कब मुझ से नाराज़ रहती हो।" मैंने कहाः "आप को इसका ज्ञान कैसाहोता है?" आपने फरमाया: "जब तुम मुझसे ख़ुश होती हो,…

Read hadeeth
Share
#11188HadeethEnc[सह़ीह़]

इबराहीम मेरा बेटा है। उसकी मृत्यु दूध पीने की अवस्था में हुई है। उसे दो दूध पिलाने वाली दाईयां प्राप्त होंगी, जो जन्नत में उसे दूध पिलाने का कार्य संपन्न करेंगी।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अंहु- का वर्णन है, वह कहते हैंः मैंने कोई ऐसा व्यक्ति नहीं देखा, जो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक अपने परिवार पर कृपा करता हो। वह कहते हैंः -आपके पुत्र- इबराहीम मदीने के निकट की एक बस्ती में दूध पी रहे था। आप उन्हें देखने ज…

Read hadeeth
Share

Shopping Basket

Loading...