افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#10968HadeethEnc[सह़ीह़]

एक महिला ,जो बोद्धिक रूप से थोड़ी कमज़ोर थी,ने कहाः हे अल्लाह के रसूल, मुझे आप से कुछ काम है, तो आप ने फरमायाः हे उम्मे फलां (अमूक व्यक्ति की माता) तू बता किस गली में मिलना चाहती है, ताकि मैं तेरी आवश्यकता की पूर्ति कर सकूँ।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि एक महिला -जो बोद्धिक रूप से थोड़ी कमज़ोर थी- ने कहाः हे अल्लाह के रसूल मुझे आप से कुछ काम है, तो आप ने फरमायाः हे उम्मे फलां (अमूक व्यक्ति की माता) तू बता किस गली में मिलना चाहती है, ताकि मैं तेरी आवश्यकता की पूर्ति कर सकूँ। तो आप…

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#10969HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी हज यात्रा एक पुराने ज़ीन तथा मामूली चादर पर (आरंभ) की जिसका मुल्य चार दिरहम के बराबर था या उस से भी कम था, फिर आप ने कहाः ऐ अल्लाह, ऐसा हज विशुद्ध रूप से केवल तेरे लिए है जिस में ढ़ोंग व पाखंड का कोई अंश नहीं है।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि नबी - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपनी हज यात्रा एक पुराने ज़ीन तथा मामूली चादर पर (आरंभ) की जिसका मुल्य चार दिरहम के बराबर था या उस से भी कम था, फिर आप ने कहाः ऐ अल्लाह, ऐसा हज विशुद्ध रूप से केवल तेरे लिए…

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#10970HadeethEnc[सह़ीह़]

उन लोगों के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस से घृणा करते हैं।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि उन लोगों (सहाबा) के समीप अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से अधिक प्रिय कोई भी नहीं था, (इसके बावजूद) वह लोग आप को देख कर खड़े नहीं होते थे क्योंकि वह जानते थे कि अल्लाह के रसूल (-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम-) इस…

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#10971HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरी देखभाल के लिए तशरीफ लाये । न ख़च्चर पर सवार थे, और न घोड़े पर (बल्कि पैदल तशरीफ लाये) ।

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, उन्होंने फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरी देखभाल क…

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#10972HadeethEnc[सह़ीह़]

यूसुफ बिन अब्दुल्लाह बिन सलाम- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का कथन कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरा नाम यूसुफ रखा तथा मुझे अपनी गोद में बिठाया।

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#10973HadeethEnc[सह़ीह़]

आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से प्रश्न किया गया कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने घर में क्या करते थे? उन्होंने उत्तर दिया किः आप भी मनुष्यों के समान एक मनुष्य थे, कपड़ों से जूंए निकालते, बकरी दूहते तथा अपने काम स्वयं करते।

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#10974HadeethEnc[सह़ीह़]

आप न तो अपशब्द बोलने वाले थे न ही अश्लील बातें करने वाले और न ही बाजारों में जा कर हल्ला करने वाले, आप बुराई का बदला बुराई से नहीं देते थे, बल्कि आप माफ कर देते तथा नजरअंदाज कर देते।

अबू अब्दुल्लाह अल जदली से वर्णित है वह कहते हैं किः मैंने आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के स्वभाव के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा किः आप न तो अपशब्द बोलने वाले थे न ही अश्लील बातें करने वाले और न ही बाजारों में जा कर हल्ला करने व…

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#10975HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब नबी बनाया गया तो आप की आयु चालीस वर्ष थी, आप मक्का में तेरह वर्ष तक रहे जहाँ आप पर वह्य उतरती रही, फिर आप को हिजरत (पलायन) का आदेश दिया गया, तो आप ने हिजरत की जहां (मदीना में) आप दस साल तक रहे, और जब आप की मृत्यु हुई उस समय आप की आयु तिरसठ (63) साल थी।

इब्ने अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है वह कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब नबी बनाया गया तो आप की आयु चालीस वर्ष थी, आप मक्का में तेरह वर्ष तक रहे जहाँ आप पर वह्य उतरती रही, फिर आप को हिजरत (पलायन) का आदेश दिया गया तो आप ने हिजरत की जहां (मदीना…

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#10976HadeethEnc[सह़ीह़]

सबसे अंतिम दृष्टि जो मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर डाली थी वह यह थी कि आप ने पर्दा हटाया जब्कि लोग अबू बकर- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पीछे पंक्तियों में खड़े थे।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैं कि सबसे अंतिम दृष्टि जो मैंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की ओर डाली थी वह यह थी कि आप ने पर्दा हटाया जब्कि लोग अबू बकर- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पीछे पंक्तियों में खड़े थे, तो अबू बकर ने चाहा कि पीछे हट जाएं,…

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#10979HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं किसी की आसान मृत्यु पर रश्क नहीं करती थी जब से मैंने अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- पर मृत्यु की सख़्ती देखी।

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#10980HadeethEnc[सह़ीह़]

जब नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु हुई, तो सहाबा ने कहाः आपको कहाँ दफ़न किया जाए? तब अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अंहु- ने कहाः उसी स्थान में जहाँ आपकी मृत्यु हुई है।

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#10982HadeethEnc[ह़सन]

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु के पश्चात अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अंहु- आपके पास आए, आपकी दोनों आँखों के बीच बोसा दिया, आपकी दोनों कंपटियों पर दोनों हाथ रखे और फ़रमायाः हाय मेरे नबी! हाय मेरे परम मित्र! हाय मेरे ख़ालिस दोस्त!

आइशा -रज़ियल्लाहु अंहा- का वर्णन है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मृत्यु के पश्चात अबू बक्र -रज़ियल्लाहु अंहु- आपके पास आए, आपकी दोनों आँखों के बीच बोसा दिया, आपकी दोनों कंपटियों पर दोनों हाथ रखे और फ़रमायाः हाय मेरे नबी! हाय मेरे परम मित्र! हाय मेरे ख़ालिस दोस्त…

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