अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) फ़ज्र की अंतिम रकात में, रुकू से सिर उठाने और 'سَمِعَ الله لمن حَمِدَه رَبَّنا ولك الحَمْدُ' कहने के बाद कहतेः ऐ अल्लाह, अमुक, अमुक और अमुक पर लानत कर। इसी पर अल्लाह तआला ने यह आयत उतारीः (لَيْسَ لَكَ مِنَ الأَمْرِ شَيْءٌ) (ऐ रसूल! आपका इसमें कुछ बस नहीं)।
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़ज्र की अंतिम रकात में, रुकू से सिर उठाने और 'سَمِعَ الله لمن حَمِدَه رَبَّنا ولك الحَمْدُ' कहने के बाद कहते हुए सुनाः ऐ अल्लाह! अमुक, अमुक और अमुक पर लानत कर। इ…

