Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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नमाज़
जो व्यक्ति हमारी मस्जिदों या बाज़ारों से गुज़रे तथा उसके हाथ में तीर हो तो उसके फल को अच्छी तरह पकड़ ले या उसके फल को अपनी मुठ्ठी में दबा ले, ताकि ऐसा न हो कि किसी मुसलमान को उसकी नोक लग जाए।
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः “जो व्यक्ति हमारी मस्जिदों या बाज़ारों से गुज़रे तथा उसके हाथ में तीर हो तो उसके फल को अच्छी तरह पकड़ ले या उसके फल को अपनी मुठ्ठी में दबा ले, ताकि ऐसा न हो कि किसी म…
जो व्यक्ति अपनी रात की पूरी नमाज़ या उसका कुछ भाग पढ़े बिना सो जाए, फिर प्रातः उठकर फज्र तथा ज़ुहर के बीच पढ़ ले, उसे ऐसा लिखा जाएगा, जैसे उसने उसे रात ही में पढ़ी हो।
हे लोगों, सलाम फैलाओ (प्रचारित करो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को जोड़ो, रात्रि में जब लोग सो रहे होते हैं, तो उठ कर नमाज़ पढ़ो, (ऐसा करने पर) सुरक्षित रूप से जन्नत में प्रवेश पा जाओगे।
अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : जब अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना आए, तो लोग आपकी ओर दौड़ पड़े और कहा जाने लगा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ गए हैं। अल्लाह के रसूल आ गए हैं। अल्लाह के रसूल आ गए हैं। तीन बार। द…
जहाँ तक इस व्यक्ति की बात है, तो इसने अबुल क़ासिम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा की।
अबू शासा कहते हैं कि हम लोग अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) के साग मस्जिद में बैठे हुए थे कि इसी बीच मोअज़्ज़िन ने अज़ान दी। इतने में एक व्यक्ति खड़ा होकर मस्जिद से जाने लगा, तो अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) उसे लगातार देखते रहे, यहाँ तक कि जब वह मस्जिद से निकल गया, तो फ…
मैं देख रहा हूँ कि तुझे बकरी तथा देहात पसंद है। अतः, जब तुम बकरियों के साथ रहो
अब्दुल्लाह बिन अब्दुर रहमान बिन अबू सासआ से वर्णित है कि अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनसे फ़रमायाः मैं देख रहा हूँ कि तुझे बकरी तथा देहात पसंद है। अतः, जब तुम बकरियों के साथ रहो (अथवा देहात में रहो) और नमाज़ के लिए अज़ान दो, तो आवाज़ ऊँची करना। क्योंकि मुअज़्ज…
जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए।
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब तुममें से किसी को नमाज़ पढ़ने की दशा में नींद आए, तो सो जाए, यहाँ तक नींद खत्म हो जाए। क्योंकि ऊँघते हुए जब कोई नमाज़ पढ़ता है, तो वह नहीं जान पाता कि अपने लिए क्षमा की दुआ कर रहा ह…
मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ा करता था, तो आपकी नमाज़ भी संतुलित हुआ करती थी और आपका ख़ुतबा भी।
अबू अब्दुल्लाह बिन जाबिर बिन समुरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के…
जब तक चुस्ती बाक़ी रहे, नमाज़ पढ़ो और चुस्ती खत्म हो जाए, तो सो जाओ।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं कि एक बार नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में दाख़िल हुए, तो देखा कि दो स्तंभ के बीच एक रस्सी लटक रही है। आपने फरमाया : "यह रस्सी कैसी है?" लोगों ने कहा कि यह रस्सी ज़ैनब (रज़ियल्लाहु अन्हा) के द्वारा लटकाई हुई है। जब व…
जब इमाम आमीन कहे, तो तुम आमीन कहो। क्योंकि जिसका आमीन कहना फ़रिश्तों के आमीन के साथ होगा, उसके पिछले सारे पाप क्षमा कर दिए जाएँगे।
ठहरो! तुम उतना ही अमल करो, जितने की क्षमता रखते हो। अल्लाह की सौगंध, अल्लाह नहीं उकताएगा, यहाँ तक कि तुम ही उकता जाओगे। तथा आपकी नज़र में वही अमल सबसे प्रिय था, जिसे करने वाला हमेशा करता रहे।
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक बार उनके पास तशरीफ़ लाए। वहाँ एक औरत बैठी थी। आपने पूछाः "यह कौन है?" आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- ने कहा कि यह अमुक औरत है, जो अपनी नमाज़ का हाल बयान कर रही है। आपने फ़रमाया : "ठहरो! तुम उतना ही अमल…

