افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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Prophetic Hadeeth Encyclopedia

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#6377HadeethEnc[सह़ीह़]

अपने पिता से विमुख न हो, क्योंकि अपने पिता से विमुख होना कुफ़्र है।

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#6379HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जिसने यह कहकर क़सम खाई कि लात तथा उज़्ज़ा की क़सम, वह 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहे और जिसने अपने साथी से कहा कि आओ हम जुआ खेलें, वह सद्क़ा करे।

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#6380HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक दिन सुबह को दज्जाल का ज़िक्र किया। आपने उसे इतना तुच्छ बताया और उसके फ़ितने को इतना भयानक दिखाया कि हमें लगने लगा कि वह यहीं कहीं खजूर के बागों के पास मौजूद होगा।

नव्वास बिन समआन -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक दिन सुबह को दज्जाल का ज़िक्र किया। आपने उसे इतना तुच्छ बताया और उसके फ़ितने को इतना भयानक दिखाया कि हमें लगने लगा कि वह यहीं कहीं खजूर के बागों के पास मौजूद होगा। जब हम…

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#6381HadeethEnc[सह़ीह़]

मदीना ईर से लेकर स़ौर तक हरम है। इसमें जो व्यक्ति धर्म के नाम पर कोई नया काम करेगा या इस तरह का काम करने वाले किसी व्यक्ति को शरण देगा, उसपर अल्लाह, फ़रिश्तों एवं सारे लोगों की लानत है। क़यामत के दिन अल्लाह न उसकी तौबा क़बूल करेगा, न फ़िदया।

यज़ीद बिन तारिक़ कहते हैं कि मैंने अली -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- को मिंबर पर खुत्बा के दौरान कहते हुए सुना है : अल्लाह की क़सम, हमारे पास कोई ऐसी पुस्तक नहीं है, जिसे हम पढ़ते हों, सिवाय अल्लाह की किताब के और उसके जो कुछ इस सहीफ़े में लिखा है। फिर उन्होंने उसे खोला, तो उ…

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#6383HadeethEnc[सह़ीह़]

जिसने मेरी आज्ञा का पानल किया, उसने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया और जिसने मेरी अवज्ञा की, उसने अल्लाह की अवज्ञा की। जो अमीर की आज्ञा का पालन करता है, वह मेरी आज्ञा का पालन करता है और जो अमीर की अवज्ञा करता, वह मेरी अवज्ञा करता है।

अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जिसने मेरी आज्ञा का पानल किया, उसने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया और जिसने मेरी अवज्ञा की, उसने अल्लाह की अवज्ञा की। जो अमीर की आज्ञा का पालन करता है, वह मेरी आज्ञा का पालन करता है और जो अमीर की अवज्ञा करता, वह…

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#6384HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम्हारे सबसे अच्छे शासक वह हैं, जिन्हें तुम पसंद करते हो और वे तुम्हें पसंद करते हैं। इसी तरह, वे तुम्हारे लिए दया की प्रार्थना करते हैं और तुम उनके लिए दया की प्रार्थना करते हो। जबकि तुम्हारे सबसे बुरे शासक वह हैं, जिन्हें तुम नापसंद करते हो और वे तुम्हें नापसंद करते हैं। इसी तरह, तुम उनपर लानत भेजते हो और वे तुमपर लानत भेजते हैं।

औफ बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफूअन वर्णित है : "तुम्हारे सबसे अच्छे शासक वह हैं, जिन्हें तुम पसंद करते हो और वे तुम्हें पसंद करते हैं। इसी तरह, वे तुम्हारे लिए दया की प्रार्थना करते हैं और तुम उनके लिए दया की प्रार्थना करते हो। जबकि तुम्हारे सबसे बुरे शासक…

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#6386HadeethEnc[दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़]

हम रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की अगवानी के लिए बच्चों के साथ सनिय्यतुल वदा तक गए।

साइब बिन यज़ीद -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब तबूक युद्ध से वापस आए, तो लोगों ने आपकी अगवानी की और मैंने बच्चों के साथ सनिय्यतुल वदा पर आपकी अगवानी की। तथा बुखारी की रिवायत में है : वह कहते हैं कि हम रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की…

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#6388HadeethEnc[सह़ीह़]

कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "कर्तव्यनिष्ठ दास के लिए दोगुना प्रतिफल है।" उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में अबू हुरैरा की जान है, यदि अल्लाह के मार्ग में जिहाद, हज तथा माँ की देख-रेख की ज़िम्मेवारी न होत…

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#6389HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब भी दो चीज़ों में से किसी एक का चयन करना होता, तो आप हमेशा दोनों में से अधिक आसान का चयन करते, जब तक कि वह आसान काम पाप न होता। यदि वह पाप होता, तो आप उससे सबसे ज़्यादा दूर रहते।

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब भी दो चीज़ों में से किसी एक का चयन करना होता, तो आप हमेशा दोनों में से अधिक आसान का चयन करते, जब तक कि वह आसान काम पाप न होता। यदि वह पाप होता, तो आप उसस…

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#6390HadeethEnc[सह़ीह़]

फ़रिश्ते अभी तक उनपर अपने परों से छाया किए हुए हैं।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- फ़रमाते हैं कि मेरे पिता को, जिनके शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया गया था, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास लाया गया और आपके सामने रखा गया। जब मैं उनके चेहरे से कपड़ा हटाने के लिए आगे बढ़ा, तो लोगों ने मुझे मना किया। इसपर नबी…

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