افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#2963HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर एक सैन्यदल भेजा। उसमें अब्दुल्लाह बिन उमर भी शामिल थे।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर एक सैन्यदल भेजा। उसमें मैं भी शामिल था। हमें ऊँट और बकरियाँ प्राप्त हुईं। हमारे हिस्से में बारह-बारह ऊँट आए तथा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें…

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#2972HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे उहुद युद्ध के अवसर पर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने लाया गया। उस समय मेरी आयु चौदह साल थी। अतः, आपने मुझे अनुमति नहीं दी।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) कहते हैं कि मुझे उहुद युद्ध के अवसर पर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने लाया गया। उस समय मेरी आयु चौदह साल थी। अतः, आपने मुझे अनुमति नहीं दी। फिर खंदक़ के अवसर पर आपके सामने लाया गया। उस समय मेरी आयु पंद्रह साल…

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#2990HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने किसी लंबे बाल वाले लाल जोड़ा पहने व्यक्ति को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से सुंदर नहीं देखा

बरा बिन आज़िब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि मैंने किसी लंबे बाल वाले लाल जोड़ा पहने व्यक्ति को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से अधिक सुंदर नहीं देखा। आपके बाल कंधों को छू रहे होते थे। आपके दो कंधों के बीच फ़ासला था। आप न छोटे क़द के थे, न अधिक लंबे क़द के…

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#3018HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जूता पहनना, कंघी करना, पवित्रता प्राप्त करना तथा अपने सभी कार्यों को दाएँ से करना पसंद करते थे।

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल…

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#3019HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का दायाँ हाथ पवित्रता प्राप्त करने और खाने के लिए था। जबकि बायाँ हाथ इस्तिंजा करने (पेशाब एवं शोच करने के बाद, अंगों को धोने) एवं अन्य सफ़ाई के कामों के लिए होता था

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैंः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का दायाँ हाथ पवित्रता प्राप्त करने और खाने के लिए था। जबकि बायाँ हाथ इस्तिंजा करने एवं अन्य सफ़ाई के कामों के लिए होता था। हफ़सा (रज़ियल्लाहु अनहा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलै…

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#3020HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने सहाबियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किंतु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैंः जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथी मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्ल…

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#3022HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले

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#3030HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस पानी से इस्तिंजा (पवित्रता प्राप्त) करते।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो म…

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#3060HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैंने कभी अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस तरह खिल-खिलाकर हँसते हुए नहीं देखा कि आपके गले का कौआ नज़र आने लगे। आप केवल मुस्कुराया करते थे।

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : मैंने कभी अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अ…

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#3062HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है, वह कहते हैं : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं। ज़ोहर से पहले दो रकात, उसके बाद दो रकात, मग्रिब के बाद घर में दो रकात, इशा के बाद घर में दो रकात और सुबह की नमाज़ से पहले दो रकात। दरअसल…

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#3063HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते।

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#3110HadeethEnc[स़ह़ीह़]

क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाएगा

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती चीज़ें लाए…

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