افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सदाचारी बंदों के हालात

12 hadeeths in this category
#3028HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं तुमसे केवल अल्लाह के लिए मोहब्बत करता हूँ। तो उसने कहाः वह भी तुमसे मोहब्बत करे, जिसके लिए तुम्हें मुझसे मोहब्बत है।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि एक व्यक्ति नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास बैठा हुआ था कि एक और व्यक्ति उसके पास से गुज़रा। तो उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं इससे मोहब्बत करता हूँ। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "क्या तुमने उसे बताया है?"…

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#3032HadeethEnc[ह़सन]

अल्लाह तआला के सम्मान में यह बात भी सम्मिलित है कि सफ़ेद बाल वाले मुसलमान का तथा उस कुरवान वाले का, जो न उसमें अतिशयोक्ति करता हो और न उससे बेवफ़ाई करता हो एवं उस प्रशासक का सम्मान किया जाए, जो न्यायप्रिय हो।

अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "अल्लाह तआला के सम्मान में यह बात भी सम्मिलित है कि सफ़ेद बाल वाले मुसलमान का तथा उस कुरवान वाले का, जो न उसमें अतिशयोक्ति करता हो और न उससे बेवफ़ाई करता हो एवं उस प्रशास…

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#3127HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अच्छे और बुरे साथी की मिसाल ऐसी है, जैसे कस्तूरी वाला और आग की भट्टी धौंकने वाला।

अबू मूसा रज़ियल्लाहु अन्हु अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से रिवायत करते हैं कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अच्छे और बुरे साथी की मिसाल ऐसी है, जैसे कस्तूरी वाला और आग की भट्टी धौंकने वाला। कस्तूरी वाला या तो तुझे भेंट में खुशबू देगा, या तू उससे खर…

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#3136HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं तेरे पास अल्लाह का संदेश लेकर आया हूँ कि अल्लाह तुमसे मुहब्बत करता है, जैसे तुम अल्लाह के लिए उससे मुहब्बत रखते हो।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से मरफ़ूअन वर्णित है कि( एक व्यक्ति अपने भाई से दूसरे गाँव में मिलने गया, तो अल्लाह ने उसकी सुरक्षा के लिए रास्ते में एक फ़रिश्ता नियुक्त कर दिया। जब वह फ़रिश्ते के पास आया, तो फ़रिश्ते ने पूछाः तुम कहाँ जा रहे हो? उसने कहाः मैं इस गाँव मे…

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#3362HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह तआला ने फ़रमायाः "मेरी मोहब्बत उन लोगों के लिए वाजिब हो गई, जो मेरे लिए आपस में एक-दूसरे से मोहब्बत करते हैं, मेरे लिए एक-दूसरे के साथ बैठते हैं, मेरे लिए एक-दूसरे से मिलते हैं और मेरे लिए एक-दूसरे पर ख़र्च करते हैं।"

अबू इदरीस ख़ौलानी (रहिमहुल्लाह) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं दिमश्क़ की मस्जिद में दाख़िल हुआ, तो देखा कि एक युवा वहाँ मौजूद है, जिसके अगले दाँत चमक रहे हैं और उसके साथ और लोग भी उपस्थित हैं। जब उन लोगों का किसी बात में विभेद होता है, तो उससे पूछते हैं और उसके मत को…

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#3367HadeethEnc[स़ह़ीह़]

तुम्हारे कमज़ोर लोगों के कारण ही तुम्हारी सहायता की जाती है और तुम्हें रोज़ी दी जाती है।

मुस्अब बिन साद कहते हैं : साद -रज़ियल्लाहु अनहु- के मन में आया कि उन्हें अपने से कमतर लोगों पर कुछ श्रेष्ठ…

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#3508HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह तआला ने कहाः मेरे प्रताप के कारण एक-दूसरे से प्रेम करने वालों के लिए नूर के मिंबर होंगे तथा उनपर नबी एवं शहीद भी रश्क करेंगे।

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#3645HadeethEnc[सह़ीह़]

सुफ़्फ़ा वालों तथा आम सहाबा की दुनिया से निस्पृहता

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः मैंने सत्तर सुफ़्फ़ा वालों को देखा। उनमें से किसी के पास चोगा नहीं होता था। या तो लुंगी होती थी या फिर चादर, जिसे वे अपने गले से बाँध लेते थे, जो कभी आधी पिंडलियों तक पहुँचती थी, तो कभी टखनों तक। उसे वे अपने हाथों से पकड़े रहते थ…

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#3698HadeethEnc[सह़ीह़]

हमें दुनिया की वह सारी वस्तुएँ प्रदान की गईं, जो तुम देख रहे हो। हमें तो कभी-कभी भय लगता है कि कहीं हमारे अच्छे कर्मों का बदला दुनिया ही में न दे दिया गया हो।

इबराहीम बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ़ का वर्णन है कि अब्दुर्रहमान बिन औफ़ - रज़ियल्लाहु अन्हु- रोज़े से थे, जब उनके सामने (इफ़तार के समय) खाना परोसा गया, तो कहाः मुसअब बिन उमैर, जो कि मुझसे बेहतर थे, शहीद हुए, तो कफन के लिए एक चादर के सिवा कुछ न मिल सका। वह भी ऐसी कि सिर ढाँ…

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#6829HadeethEnc[सह़ीह़]

वह ज़माना क़रीब है, जब मुसलमान का बेहतरीन माल बकरियाँ होंगी, जिनको लेकर वह पहाड़ों की चोटियों की ओर निकल जाएगा।

अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “वह ज़माना क़रीब है, जब मुसलमान का बेहतरीन माल बकरियाँ होंगी, जिनको लेकर वह पहाड़ों की चोटियों और बारिश के स्थानों की तरफ अपने दीन को बचाने के लिए निकल ज…

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#65022HadeethEnc[स़ह़ीह़]

क़यामत उस समय तक क़ायम नहीं होगी, जब तक इस तरह की हालत पैदा न हो जाए कि एक व्यक्ति किसी की क़ब्र के पास से गुज़रे और कहे कि काश! इसके स्थान पर मैं होता!

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़यामत उ…

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