वह ज़माना क़रीब है, जब मुसलमान का बेहतरीन माल बकरियाँ होंगी, जिनको लेकर वह पहाड़ों की चोटियों की ओर निकल जाएगा।
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अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “वह ज़माना क़रीब है, जब मुसलमान का बेहतरीन माल बकरियाँ होंगी, जिनको लेकर वह पहाड़ों की चोटियों और बारिश के स्थानों की तरफ अपने दीन को बचाने के लिए निकल जाएगा।"
Explanation
"अपने धर्म को बचाने के लिए निकल जाएगा" यानी इस डर से भाग खड़ा होगा कि कहीं उसका धर्म फ़ितने का शिकार न हो जाए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इन्सान को शिर्क के क्षेत्र से इस्लाम के क्षेत्र की ओर एवं गुनाह के क्षेत्र से धर्म के अनुपालन के क्षेत्र की ओर हिजरत करने का आदेश दिया गया है। बिल्कुल इसी तरह जब लोग और समय बदल जाए, तो अलग-थलग रहना ही उत्तम है।
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