افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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रोज़े

12 hadeeths in this category
#2754HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- प्रत्येक रमज़ान में दस दिन एतेकाफ़ करते थे। परन्तु जब मृत्यु का वर्ष आया, तो बीस दिन एतेकाफ़ किया।

अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- प्रत्येक रमज़ान में दस दिन एते…

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#3015HadeethEnc[सह़ीह़]

बिलाल रात रहते ही अज़ान देते हैं, अतः तुम इब्ने उम्मे मकतूम की अज़ान सुनने तक खाते- पीते रहो

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने…

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#3449HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या बात है कि माहवारी वाली स्त्री छूटे हुए रोज़े बाद में रख लेती है, लेकिन छूटी हुई नमाज़ें बाद में नहीं पढ़ती? उन्होंने कहाः क्या तू हरूरिया है? मैंने कहाः नहीं, मैं हरूरिया तो नहीं हूँ, लेकिन पूछ्ना चाहती हूँ। तब उन्होंने कहाः हमें इस स्थिति से गुज़रना पड़ता, तो हमें छूटे हुए रोज़ों को बाद रख लेने का आदेश दिया जाता, लेकिन छूटी हुई नमाज़ों को बाद में पढ़ने का आदेश नहीं दिया जाता था।

मुआज़ा कहती हैं कि मैंने आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से पूछाः क्या बात है कि माहवारी वाली स्त्री छूटे हुए रोज़े बाद में रख लेती है, लेकिन छूटी हुई नमाज़ें बाद में नहीं पढ़ती? उन्होंने कहाः क्या तू हरूरिया है? मैंने कहाः नहीं, मैं हरूरिया तो नहीं हूँ, लेकिन पूछ्ना चाहती हूँ।…

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#3546HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह कहता है : आदम की संतान का हर अमल उसके लिए है, सिवाय रोज़े के कि रोज़ा केवल मेरे लिए है और मैं ही उसका बदला दूँगा।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अल्लाह कहता है : आदम की संतान का हर अमल उसके लिए है, सिवाय रोज़े के कि रोज़ा केवल मेरे लिए है और मैं ही उसका बदला दूँगा। रोज़ा ढाल है। जब तुममें से किसी के रोज़…

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#3738HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जन्नत में एक द्वार है, जिसे रय्यान कहा जाता है। क़यामत के दिन उससे रोज़ेदार प्रवेश करेंगे। उनके सिवा कोई उस द्वार से प्रवेश नहीं करेगा।

सह्ल -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जन्नत में एक द्वार है, जिसे रय्यान कहा जाता है। क़यामत के दिन उससे रोज़ेदार प्रवेश करेंगे। उनके सिवा कोई उस द्वार से प्रवेश नहीं करेगा। कहा जाएगा : रोज़ेदार कहाँ हैं? अतः, व…

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#3755HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रमज़ान महीने के अंतिम दस दिनों में दूसरे दिनों की तुलना में कहीं अधिक इबादत में लीन रहा करते थे।

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रमज़ा…

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#3769HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में रोज़ा न रखते, यहाँ तक कि हम सोचने लगते कि इस महीने में रोज़ा रखेंगे ही नहीं और किसी महीने में रोज़ा रखते जाते, यहाँ तक कि हमें लगने लगता कि इस महीने में रोज़ा छोड़ेंगे ही नहीं। तथा तुम उनको रात में नमाज़ पढ़ते हुए देखना चाहते तो देख लेते और सोते हुए देखना चाहते तो भी देख लेते।

अनस- रज़ियललाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में रोज़ा न रखते, यहाँ तक कि हमें लगने लगता कि इस महीने में रोज़ा रखेंगे ही नहीं और किसी महीने में रोज़ा रखते जाते, यहाँ तक कि हमें लगने लगता कि इस महीने में रोज़ा छोड़ेंगे ही नहीं।…

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#4202HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

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#4439HadeethEnc[सह़ीह़]

आज रोज़ा न रखने वाले नेकी ले गए।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हम लोग अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ एक यात्रा में थे। कोई रोज़े से था, तो कोई बिना रोज़े का। वह कहते हैं कि इसी दौरान एक दिन, जब धूप बड़ी तेज़ थी, हम एक जगह रुके। हमारे बीच सबसे छाया वाला व्यक्ति वह था, जिस…

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