लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे।
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सह्ल बिन साद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे।"
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लोगों के अंदर भलाई सुन्नत के अनुसरण के कारण बाक़ी रहेगी। जैसे ही सुन्नत के साथ छेड़-छाड़ शुरू होगी, बिगाड़ की राहें खुलने लगेंगी।
पूर्ववर्ती किताब वालों और बिदअतियों का विरोध, जो देर से इफ़तार किया करते हैं।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : इस हदीस के अंदर इफ़तार में देर न करने का कारण बयान कर दिया गया है। मुहल्लब कहते हैं : इसके अंदर हिकमत यह है कि रात के समय को दिन में जोड़ने से बचा जाए, यह रोज़ेदार के लिए अधिक आरामदायक है और इससे उसके अंदर रोज़े की ताक़त अधिक बाक़ी रहती है। लेकिन इसके साथ ही उलेमा का इस बात पर भी इत्तेफ़ाक़ है कि जल्दी उसके बाद ही की जाएगी, जब अपनी आँख से देख लेने या दो विश्वसनीय लोगों की गवाही के बाद इस बात का यक़ीन हो जाए कि सूरज डूब चुका है। वैसे, ज़्यादा पुख़्ता मत के अनुसार एक विश्वसनीय व्यक्ति की गवाही भी काफ़ी है।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : चेतावनी : आज के समय प्रकट होने वाली एक बहुत ही ग़लत बिदअत यह है कि रमज़ान महीने में फ़ज्र से लगभग बीस मिनट पहले दूसरी अज़ान दे दी जाती है और यह बताने के लिए कि अब रोज़ा रखने का इरादा रखने वाले के लिए खाना-पीना हराम हो चुका हैै, चराग़ बुझा दिए जाते हैं। यह सब कुछ एहतियात के नाम पर किया जाता है। इसी एहतियात के कारण वे सूरज डूब जाने के कुछ देर बाद अज़ान देते हैं। इस तरह इफ़तार में देर और सहरी में जल्दी करते हैं और सुन्नत की मुख़ालफ़त के शिकार हो जाते हैं। अतः उनमें भलाई कम हो गई और बुराई बढ़ गई। और अल्लाह ही है जिससे सहायता मांगी जाती है।
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