افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

12 hadeeths in this category
#58167HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने हफ़सा बिंत अब्दुर्रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) को, जब उनकी तीसरी माहवारी शुरू हुई, घर बदलवा दिया।

उरवा बिन ज़ुबैर का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) ने हफ़सा बिंत अब्दुर्रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) को, जब उनकी तीसरी माहवारी शुरू हुई, घर बदलवा दिया। इब्ने शेहाब कहते हैं कि उरवा की इस हदीस का ज़िक्र अमरा ब…

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#58168HadeethEnc[सह़ीह़]

दास आज़ाद स्त्री को दो तलाक़ देगा और वह तीन माहवारी इद्दत गु़ज़ारेगी, जबकि आज़ाद व्यक्ति दासी को दो तलाक़ देगा और वह आम दासियों की तरह दो माहवारी इद्दत गुज़ारेगी।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से वर्णित है कि वह कहा करते थेः दास आज़ाद स्त्री को दो तलाक़ देग…

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#58170HadeethEnc[मुझे अल्लामा अलबानी का कोई हुक्म नहीं मिला।]

जिस स्त्री का पति गुम हो जाए और पता न चल सके कि वह कहाँ है? वह चार साल प्रतीक्षा करे और फिर चार महीना दस दिन इद्दत गुज़ारे। अब उसके लिए कहीं और निकाह करना हलाल हो जाएगा।

उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः जिस स्त्री का पति गुम हो जाए और पता न चल सके कि वह कहाँ है? वह…

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#58172HadeethEnc[सह़ीह़]

कोई व्यक्ति किसी शादीशुदा स्त्री के पास हरगिज़ रात न बिताए। हाँ, यह और बात है कि वह उसकी पत्नी हो या उसकी कोई ऐसी रिश्तेदार हो, जिससे हमेशा के लिए निकाह जायज़ नहीं है।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "कोई व्यक्ति किसी शादीशुदा स्त्री के पास हरगिज़ रात न बिताए। हाँ, यह और बात है कि वह उसकी पत्नी हो या उसकी कोई ऐसी रिश्तेदार हो, जिससे हमेशा के लिे…

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#58173HadeethEnc[सह़ीह़]

किसी गर्भवती से संभोग न किया जाए जब तक प्रसव न हो जाए और न किसी बिना गर्भ वाली से संभोग किया जाए जब तक उसे एक माहवारी न आ जाए।

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने औतास युद्ध में प्राप्त होने वाली दासियों के संबंध में फ़रमायाः "किसी गर्भवती से संभोग न किया जाए जब तक प्रसव न हो जाए और न किसी बिना गर्भ वाली से संभोग किया जाए जब तक उसे एक माहवारी न आ ज…

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#58174HadeethEnc[सह़ीह़]

एक दो बार दूध पीने से हुरमत सिद्ध नहीं होती।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "एक दो बार दूध प…

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#58175HadeethEnc[सह़ीह़]

उसे दूध पिला दो, तुम उसपर हराम हो जाओगी और अबू हुज़ैफ़ा के दिल में जो बात है, वह ख़त्म हो जाएगी।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अबू हुज़ैफ़ा के 'मौला' (अर्थात उनके मुक्त किए हुए दास) सालिम अबू हुज़ैफ़ा तथा उनके परिवार के साथ उन्हीं के घर में रहते थे। अतः, अबू ह़ुज़ैफ़ा की पत्नी (जो सुहैल की बेटी थीं) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आईं और कहने लगींः स…

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#58176HadeethEnc[सह़ीह़]

क़ुरआन की जो आयतें उतारी गई थीं, उनमें से एक आयत थीः "दस बार दूध पीने से, जो मालूम हों, हुरमत साबित होती है।" फिर यह आयत मनसूख़ (निरस्त) हो गई और पाँच बार दूध पीने की बात कही गई, जो मालूम हों। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की जब मृत्यु हुई, तो ये शब्द क़ुरआन में मौजूद थे और पढ़े जा रहे थे।

आइश (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैंः क़ुरआन की जो आयतें उतारी गई थीं, उनमें से एक आयत थीः "दस बार दूध पीने से, जो मालूम हों, हुरमत साबित होती है।" फिर यह आयत मनसूख़ (निरस्त) हो गई और पाँच बार दूध पीने की बात कही गई, जो मालूम हों। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की…

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#58177HadeethEnc[सह़ीह़]

दूध पीने से हुरमत उसी समय सिद्ध होती है, जब दूध अंतड़ियों तक पहुँचे और उन्हें सैराब करने का कार्य करे और दूध पिलाने का कार्य दूध छुड़ाने से पहले हुआ हो।

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#58181HadeethEnc[सह़ीह़]

देने वाले का हाथ ऊपर होता है। आरंभ उससे करो जिसके ऊपर खर्च करना तुम्हारे ऊपर वाजिब है : तुम्हारी माता, तुम्हारे पिता, तुम्हारी बहन, तुम्हारे भाई, फिर सबसे निकट का संबंधी और उसके बाद सबसे निकट का संबंधी।

तारिक़ अल-मुहारिबी से वर्णित है, वह कहते हैं : हम लोग मदीना पहुँचे तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिंबर पर खड़े होकर ख़ुतबा (भाषण) दे रहे थे और फ़रमा रहे थे : “देने वाले का हाथ ऊपर होता है। आरंभ उससे करो जिसके ऊपर खर्च करना तुम्हारे ऊपर वाजिब है : तुम्हारी…

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#58183HadeethEnc[सह़ीह़]

किसी व्यक्ति के पापी (गुनहगार) होने के लिए बस इतना काफी है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का राशन रोक ले, जिसका राशन उसके हाथ में है।

ख़ैसमा से रिवायत है, वह कहते हैं कि हम लोग अब्दुल्लाह बिन अम्र -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- के साथ बैठे हुए थे कि इसी बीच उनके घर की व्यवस्था से जुड़ा हुआ एक व्यक्ति उनके पास आया, तो उन्होंने उससे कहा : क्या तुमने ग़ुलामों को उनका राशन दे दिया? उसने कहा : नहीं, तो आपने फ़रमाया…

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#58185HadeethEnc[सह़ीह़]

सर्वोत्तम सदका वह है जो अपनी आवश्यकता के बराबर धन बचाकर रखने के बाद किया जाए, ऊपर वाला हाथ नीचे वाले हाथ से उत्तम है और तुममें से हर व्यक्ति को चाहिए कि उससे आरंभ करे जिसके ऊपर खर्च करना उसके ऊपर वाजिब है।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “सर्वोत्तम सदका वह है जो अपनी आवश्यकता के बराबर धन बचाकर रखने के बाद किया जाए, ऊपर वाला हाथ नीचे वाले हाथ से उत्तम है और तुममें से हर व्यक्ति को चाहिए कि उससे आरंभ करे…

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