افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
Islamic Reads · HadeethEnc

Prophetic Hadeeth Encyclopedia

Search and read verified Prophetic hadeeth translations, explanations, benefits, categories and source attribution.

Content source:HadeethEnc.com·Version 1.59.0
2,314hadeeths
Advanced search

Search the Hadeeth Encyclopedia

Smart instant results tolerate minor spelling mistakes, with every filter in one place.

13hadeeths
Clear filters
Categories

तलाक़

12 hadeeths in this category
#5827HadeethEnc[सह़ीह़]

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने अपनी पत्नी को मासिक धर्म की हालत में तलाक़ दे दी, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने इसकी चर्चा की। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को क्रोध में आ गए

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने अपनी पत्नी को मासिक धर्म की हालत में तलाक़ दे दी, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने इसकी चर्चा की। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को क्रोध में आ गए और फ़रमाया : "व…

Read hadeeth 2Views 0Cards 0Shares
Share
#6020HadeethEnc[सह़ीह़]

वह तुम्हारे भरण-पोषण का उत्तरदायी नहीं है।

फ़तिमा बिंत क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहा) से वर्णित है कि अबू अम्र बिन हफ़्स ने उन्हें तीन तलाक़ों में से अंतिम तलाक़ दे दिया, जबकि उस समय वह घर से बाहर थे। (एक दूसरी रिवायत में है उन्होंने उनको तीन तलाक़ दे दिया।) फिर उनके प्रतिनिधि ने फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अंहा) को कुछ जौ भे…

Read hadeeth 4Views 0Cards 0Shares
Share
#6089HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या तुम रिफ़ाआ के पास लौटकर जाना चाहती हो? नहीं, ऐसा उस समय तक नहीं हो सकता, जब तक तुम उसका शहद न चख लो और वह तुम्हारा शहद न चख ले।

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) फ़रमाती हैं कि रिफ़ाआ क़ुरज़ी की पत्नी अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई और कहने लगीः मैं रिफ़ाआ क़ुरज़ी के निकाह में थी। परन्तु उसने मुझे तीन तलाक़ें दे दी हैं। फिर मैंने अब्दुर्रहमान बिन ज़ुबैर से शादी कर ली है। लेकिन उसके पास…

Read hadeeth 1Views 0Cards 0Shares
Share
#8286HadeethEnc[सह़ीह़]

इद्दत पूरी हो चुकी है। अब तुम उसे नए सिरे से निकाह का संदेश भेजो।

ज़ुबैर बिन अव्वाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि उम्म-ए-कुलसूम बिंत उक़बा उनके निकाह में थीं। वह गर्भावस्था में थीं कि ज़ुबैर (रज़ियल्लाहु अंहु) से बोलीं : मुझे एक तलाक़ देकर मेरा दिल ख़ुश कर दो। सो, ज़ुबैर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उन्हें एक तलाक़ दे दिय…

Read hadeeth 2Views 0Cards 0Shares
Share
#58078HadeethEnc[सह़ीह़]

नहीं, ऐसा उस समय तक नहीं हो सकता, जब तक पहले पति की तरह दूसरा पति भी उसका मज़ा न चख ले।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि एक व्यक्ति ने अपनी स्त्री को तीन तलाक़ दे दिया और एक अन्य व्यक्ति ने उससे निकाह कर लिया। परन्तु उसने भी उसके साथ संभोग करने से पहले उसे तलाक़ दे दिया। ऐसे में, उसके पहले पति ने उससे निकाह करने की मंशा जताई। लेकिन जब अल्लाह के रसूल (सल…

Read hadeeth 3Views 0Cards 0Shares
Share
#58138HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) के ज़माने में तथा उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के ख़लीफ़ा रहने के (आरंभ के) दो सालों में (एक मजलिस) के तीन तलाक़ एक ही शुमार होते थे।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अंहु) के ज़माने में तथा उमर (रज़ियल्लाहु अंहु) के ख़लीफ़ा रहने के (आरंभ के) दो सालों में (एक मजलिस) के तीन तलाक़ एक ही शुमार होते थे। फिर उमर बिन ख़त्…

Read hadeeth 3Views 0Cards 0Shares
Share
#58140HadeethEnc[ह़सन]

(रुकाना और उनके भाइयों के पिता) अब्द-ए-यज़ीद ने रुकाना की माता को तलाक़ देकर मुज़ैना क़बीले की एक स्त्री से निकाह कर लिया। फिर, वह स्त्री नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगीः वह मुझे उतना ही संतुष्ट कर पाते हैं, जितना कि यह बाल।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि (रुकाना और उनके भाइयों के पिता) अब्द-ए-यज़ीद ने रुकाना की माता को तलाक़ देकर मुज़ैना क़बीले की एक स्त्री से निकाह कर लिया। फिर, वह स्त्री नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगीः वह मुझे उतना ही संतुष्…

Read hadeeth 2Views 0Cards 0Shares
Share
#58142HadeethEnc[ह़सन]

तीन काम ऐसे हैं कि उन्हें संजीदगी से किया जाए या मज़ाक़ से, उनका एतबार होगा; निकाह, तलाक़ और तलाक़शुदा स्त्री को इद्दत के अंदर लौटाना।

Read hadeeth 4Views 0Cards 0Shares
Share
#58144HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह ने मेरी उम्मत की वह बातें माफ़ कर रखी हैं, जो उसके दिलों में आएँ, जब तक अमल न करे अथवा ज़ुबान से न बोले।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "अल्ला…

Read hadeeth 2Views 0Cards 0Shares
Share
#58147HadeethEnc[सह़ीह़]

आदम की संतान को ऐसी वस्तु की मन्नत मानने का अधिकार नहीं, जिसका वह मालिक न हो, ऐसे दास को मुक्त करने का अधिकार नहीं जिसका वह स्वामी न हो और ऐसी स्त्री को तलाक़ देने का अधिकार नहीं जो उसके निकाह में न हो।

अम्र बिन शोऐब अपने पिता और वह अपने दादा से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "आदम की संतान को ऐसी वस्तु की मन्नत मानने का अधिकार नहीं, जिसका वह मालिक न हो, ऐसे दास को मुक्त करने का अधिकार नहीं जिसका वह स्वामी न हो और ऐसी स्त्री को…

Read hadeeth 4Views 0Cards 0Shares
Share
#58149HadeethEnc[सह़ीह़]

तुमने ग़ैर-सुन्नत तरीक़े से तलाक़ दी और ग़ैर-सुन्नत तरीक़े से लौटाया। उसे तलाक़ देते समय गवाह बनाओ और लौटाते समय गवाह बनाओ तथा ऐसा काम दोबारा न करो।

इमरान बिन हुसैन का वर्णन है कि उनसे एक व्यक्ति के बारे में पूछा गया, जो अपनी पत्नी को तलाक़ दे दे और फिर उससे संभोग कर ले और उसे तलाक़ देते समय और लौटाते समय गवाह न बनाए, तो उन्होंने कहाः तुमने ग़ैर-सुन्नत तरीक़े से तलाक़ दी और ग़ैर-सुन्नत तरीक़े से लौटाया। उसे तलाक़ दे…

Read hadeeth 2Views 0Cards 0Shares
Share

Shopping Basket

Loading...