افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह पर ईमान

12 hadeeths in this category
#6332HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नेकी के काम करने की क्षमता माँगता हूँ, बुराइयों को छोड़ने का सुयोग माँगता हूँ, अधीनों से प्रेम करने का मनोबल माँगता हूँ और इस बात का प्रार्थी हूँ कि तू मेरे सारे गुनाहों को माफ कर दे और मुझपर दया कर। जब तू किसी समुदाय को विपदा ग्रस्त करना चाहे तो मुझे उस विपदा में लिप्त करने से पहले ही उठा लेने का तुझसे अनुनय- विनय करता हूँ और तुझसे मैं तेरा प्रेम और तुझसे प्रेम करने वाले का प्रेम माँगता हूँ और उस कर्म का प्रेम माँगता हूँ जो तेरे प्रेम से करीब कर दे

मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़ज्र की नमाज़ के लिये आने में विलंब किया, यहाँ तक कि सुर्य निकलने लगा, तो बड़ी तेज़ी से आए और नमाज़ के लिए इक़ामत कही गई और आप ने संक्षिप्त नमाज़ पढ़ाई। सलाम फेरने के पश्चा…

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#6333HadeethEnc[सह़ीह़]

एक यहूदी ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहाः ऐ मुहम्मद, अल्लाह (क़यामत के दिन) आकाशों को एक उँगली पर, धरतियों को एक उँगली पर, पहाड़ों को एक उँगली पर, पेड़ों को एक उँगली पर और सारी सृष्टियों को एक उँगली पर थाम लेगा और फिर कहेगा : मैं ही बादशाह हूँ।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- फ़रमाते हैं कि एक यहूदी ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आकर कहाः ऐ मुहम्मद, अल्लाह (क़यामत के दिन) आकाशों को एक उँगली पर, धरतियों को एक उँगली पर, पहाड़ों को एक उँगली पर, पेड़ों को एक उँगली पर और सारी सृष्टियों को एक उँगली…

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#6336HadeethEnc[ह़सन]

जब कोई मुस्लिम व्यक्ति नमाज़ एवं ज़िक्र के लिए मस्जिदों में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने लगता है, तो अल्लाह उससे उसी प्रकार प्रसन्न होता है, जिस प्रकार किसी खोए हुए व्यक्ति के घर आने पर उसके घर वाले प्रसन्न होते हैं।

अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से वर्णित है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "जब कोई मुस्लिम व्यक्ति नमाज़ एवं ज़िक्र के लिए मस्जिदों में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने लगता है, तो अल्लाह उससे उसी प्रकार प्रसन्न होता है, जिस प्रकार किसी खोए हुए व्यक्ति…

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#6337HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जो मेरे किसी वली (मित्र) से शत्रुता का रास्ता अपनाएगा, मैं उसके साथ जंग का एलान करता हूँ। मेरा बंदा जिन कामों के द्वारा मेरी निकटता प्राप्त करना चाहता है, उनमें मेरे निकट सबसे प्यारी चीज़ मेरे फ़र्ज़ किए हुए काम हैं

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "अल्लाह कहता है : जो मेरे किसी वली (मित्र) से शत्रुता का रास्ता अपनाएगा, मैं उसके साथ जंग का एलान करता हूँ। मेरा बंदा जिन कामों के द्वारा मेरी निकटता प्राप्त करना…

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#6338HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह ने जन्नत में आदम का चित्र बनाया, तो जब तक चाहा, उसे उसी दशा में छोड़े रखा। इस बीच इब्लीस उसके चोरों ओर चक्कर लगाने लगा और देखने लगा कि यह क्या है! जब देखा कि वह अंदर से खाली है, तो समझ गया कि अल्लाह ने कोई ऐसी मख़लूक़ बनाई है, जिसे अपने ऊपर नियंत्रण नहीं होगा।

अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "जब अल्लाह ने जन्नत में आदम का चित्र बनाया, तो जब तक चाहा, उसे उसी दशा में छोड़े रखा। इस बीच इब्लीस उसके चोरों ओर चक्कर लगाने लगा और देखने लगा कि यह क्या है! जब…

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#6362HadeethEnc[ह़सन]

इसे निकाल दो, क्योंकि यह तुम्हारी बीमारी को बढ़ाने ही का काम करेगा। तथा यदि तुम इसे पहनकर मरोगे, तो कभी सफल नहीं हो सकोगे।

इमरान बिन हुसैन (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति के हाथ में पीतल का एक कड़ा देखा, तो उससे कहाः "यह क्या है?" उसने उत्तर दियाः वाहिना (एक बीमारी) के कारण इसे पहने हुआ हूँ। आपने फ़रमायाः "इसे निकाल दो, क्योंकि यह तुम्हारी बीमा…

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#6458HadeethEnc[सह़ीह़]

जब उच्च एवं महान अल्लाह किसी बंदे से मोहब्बत करता है, तो जिब्रील को पुकारकर कहता है कि अल्लाह अमुक बंदे से मोहब्बत करता है, तो तुम भी उससे मोहब्बत करो। चुनांचे जिब्रील उससे मोहब्बत करने लगते हैं। फिर वह आकाश वालों में एलान करते हैं कि अल्लाह अमुक बंदे से मोहब्बत करता है, तो तुम लोग भी उस से मोहब्बत करो। चुनांचे आकाश वाले भी उससे मोहब्बत करने लगते हैं। फिर धरती पर उपस्थित लोगों के दिलों में उसकी मोहब्बत पैदा कर दी जाती है।

अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जब उच्च एवं महान अल्लाह किसी बंदे से मोहब्बत करता है, तो जिब्रील को पुकारकर कहता है कि अल्लाह अमुक बंदे से मोहब्बत करता है, तो तुम भी उससे मोहब्बत करो। चुनांचे जिब्रील उससे मोहब्बत करने लगते हैं। फिर वह आकाश वा…

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#6461HadeethEnc[सह़ीह़]

जब बंदा मुझसे एक बित्ता क़रीब आता है, तो मैं उससे एक हाथ क़रीब आता, जब वह मुझसे एक हाथ क़रीब आता है, तो मैं उससे दोनों हाथों को फैलाकर जितनी दूरी बनती है, उतना क़रीब आता हूँ और जब वह मेरे पास चलकर आता है, तो मैं उसके पास दौड़ कर आता हूँ।

अनस बिन मालिक और अबू हुरैरा -अल्लाह उन दोनों से प्रसन्न हो- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने रब से रिवायत करते हुए कहते हैं कि अल्लाह तआला फरमाता है : "जब बंदा मुझसे एक बित्ता क़रीब आता है, तो मैं उससे एक हाथ क़रीब आता, जब वह मुझसे एक हाथ क़रीब आता है…

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#6615HadeethEnc[स़ह़ीह़]

''तुममें से हर एक के साथ अल्लाह बात करेगा, इस तरह कि उसके और उसके रब के बीच कोई अनुवादक न होगा।

अदी बिन हातिम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : ''तुममें से हर एक के साथ अल्लाह बात करेगा, इस तरह कि उसके और उसके रब के बीच कोई अनुवादक न होगा। वह अपने दायीं ओर देखेगा तो अपने भेजे हुए अमल को देखेगा और ब…

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#6761HadeethEnc[स़ह़ीह़]

किसी ऊँट के गले में कोई ताँत अथवा अन्य कोई वस्तु बंधी मिले, तो उसे रहने न दिया जाए, बल्कि काट दिया जाए।

अबू बशीर अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : एक यात्रा में वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे। उनका कहना है कि जब लोग अपने सोने की जगहों में थे, तो आपने एक व्यक्ति को भेजा कि किसी ऊँट के गले में कोई ताँत अथवा अन्य कोई वस्तु बंधी मिले, तो उसे रहने न दिया…

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#6762HadeethEnc[ह़सन]

जिसने तावीज़ लटकाया, उसने शिर्क किया।

उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास दस लोगों का एक गिरूह आया, जिनमें से नौ लोगों से आपने बैअत ली, जबकि एक व्यक्ति से बैअत नहीं ली, अतः उन्होंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! आपने नौ लोगों से बैअत ली और एक व्यक…

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#6763HadeethEnc[ह़सन]

जिसने कोई वस्तु लटकाई, उसे उसी के हवाले कर दिया जाता है।

अब्दुल्लाह बिन उकैम -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जिसने…

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