افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सीरत-ए-नबवी

12 hadeeths in this category
#3769HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में रोज़ा न रखते, यहाँ तक कि हम सोचने लगते कि इस महीने में रोज़ा रखेंगे ही नहीं और किसी महीने में रोज़ा रखते जाते, यहाँ तक कि हमें लगने लगता कि इस महीने में रोज़ा छोड़ेंगे ही नहीं। तथा तुम उनको रात में नमाज़ पढ़ते हुए देखना चाहते तो देख लेते और सोते हुए देखना चाहते तो भी देख लेते।

अनस- रज़ियललाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में रोज़ा न रखते, यहाँ तक कि हमें लगने लगता कि इस महीने में रोज़ा रखेंगे ही नहीं और किसी महीने में रोज़ा रखते जाते, यहाँ तक कि हमें लगने लगता कि इस महीने में रोज़ा छोड़ेंगे ही नहीं।…

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#3855HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ साद बिन मुआज़! काबा के रब की क़सम, मुझे उहुद पर्वत के निकट से जन्नत की सुगंध आ रही है।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मेरे चचा अनस बिन नज़्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- बद्र के युद्ध में शरीक नहीं हो सके थे। अतः, उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं आपके द्वारा मुश्रिकों से लड़े गए प्रथम युद्ध में शामिल नहीं हो सका। यदि अल्लाह ने मुझे उनसे लड़ने का अवसर दिया…

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#3885HadeethEnc[सह़ीह़]

कभी ऐसा नहीं हुआ कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कुछ माँगा गया और आपने ना कह दी।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का वर्णन है कि कभी ऐसा नहीं हुआ कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कुछ माँगा गया और आपने ना कह दी। तथा अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से जब इस्लाम के वास्ते से कुछ माँग…

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#3915HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर मैं अपने इन खुजूरों को खाने तक जीवित रहा तो यह बड़ा लंबा जीवन होगा। अतः, अपने पास मौजूद खुजूरों को फेंक दिया और मुश्रिकों से लड़ने लगे, यहाँ तक कि मारे गए।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथी चले, यहाँ तक कि मुश्रिकों से पहले ही बद्र पहुँच गए। उसके बाद मुश्रिकजन भी आ गए। ऐसे में, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तुममें से कोई मुझसे पहले किसी वस्तु…

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#4179HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू बक्र से कहो कि लोगों को नमाज़ पढ़ाएँ।

अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बीमारी अधिक बढ़ गई और आपसे नमाज़ के बारे में कहा गया तो फ़रमायाः अबू बक्र से कहो कि लोगों को नमाज़ पढ़ाएँ। इसपर आइशा - रज़ियल्लाहु अन्हा- ने कहाः अबू बक्र एक नर्म दिल व्यक…

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#4221HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दूध पेश किया गया, जिसमें पानी मिला हुआ था। उस समय आपके दाएँ एक देहाती और बाएँ अबू बक्र- रज़ियल्लाहु अन्हुम- बैठे हुए थे। आपने दूध पिया और उसके बाद देहाती को देते हुए कहाः दाएँ वाले से शुरू किया करो।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दूध पेश किया गया, जिसमें पानी मिला हुआ था। उस समय आपके दाएँ एक देहाती और बाएँ अबू बक्र- रज़ियल्लाहु अन्हुम- बैठे हुए थे। आपने दूध पिया और उसके बाद देहाती को देते हुए कहाः दाएँ…

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#4222HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का विजय के दिन काले रंग की पगड़ी बाँधकर दाख़िल हुए।

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का विजय के दिन काले रंग का साफा अर्थात पगड़ी बाँधकर दाख़िल हुए। अबू सईद अम्र बिन हुरैस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः गोया कि मैं अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देख रहा ह…

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#4226HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आपने क्या इरादा किया था? तो बोलेः सोचने लगा था कि आपको छोड़कर बैठ जाऊँ।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आपने क्या इरादा किया था? तो बोलेः सोचने लगा था कि आपको छोड़कर बैठ जाऊँ…

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#4228HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कोई काम पसंद होता, इसके बावजूद उसे इस डर से छोड़ देते कि लोग उसपर अमल करने लगें और उनपर फ़र्ज़ कर दिया जाए।

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#4231HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे एक ऊँट खरीदा और उन्हें क़ीमत नापकर देते समय कुछ अधिक दिया।

जाबिर- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनसे एक ऊँट खरीदा और…

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