افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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अक़ीदा

12 hadeeths in this category
#10557HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐसा लगता है कि आज भी मैं बनी ग़नम की गली में वह उड़ती हुई धूल देख रहा हूँ, जो जिबरील (सलवातुल्लाहि अलैहि) के क़ाफ़िले से उठी थी, जब वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ बनू क़ुरैज़ा की ओर चले थे

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#10559HadeethEnc[सह़ीह़]

यही वह सहाबी हैं, जिनके लिए अर्श हिल उठा, आकाश के द्वार खोले गए और उनके जनाज़े में सत्तर हज़ार फ़रिश्ते उपस्थित रहे, (इसके बावजूद) उन्हें क़ब्र के अंदर एक बार भींचा गया और फिर छोड़ दिया गया

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (साद बिन मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु के बारे में) फ़रमाया: यह वह सहाबी हैं, जिनके लिए अर्श हिल उठा, आकाश के द्वार खोले गए और उनके जनाज़े में सत्तर हज़ार फ़रिश्ते…

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#10560HadeethEnc[सह़ीह़]

मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़…

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#10561HadeethEnc[सह़ीह़]

हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास रहकर चर्मपत्रों से क़ुरआन एकत्र कर रहे थे, इसी बीच आपने कहा: शाम की धरती धन्य है!

ज़ैद बिन साबित (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास रहकर चर्मपत्रों से क़ुरआन एकत्र कर रहे थे। इसी बीच आपने कहा: शाम की धरती धन्य है! हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों कहा? तो आपने फ़रमाया: क्योंकि दयावान (अल्लाह) क…

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#10562HadeethEnc[सह़ीह़]

जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर डूब जाए तथा सूरज डूबने एवं निकलने का समय देखकर ही नमाज़ न पढ़ो; क्योंकि सूरज शैतान के दो सींगों के बीच में निकलता है

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब सूरज का किनारा दिखाई दे, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ तक कि वह पूरे तौर पर ज़ाहिर हो जाए और जब सूरज का किनारा ग़ायब हो जाए, तो नमाज़ पढ़ना बंद कर दो, यहाँ त…

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#10564HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ उमर! शैतान तुम से डरता है, मैं बैठा था, तो यह दफ़ बजाती रही, अबू बक्र आए तो बजाती रही, अली आए तो बजाती रही, उसमान आए तो भी बजाती रही, लेकिन ऐ उमर! जब तुम आए तो इसने दफ़ फेंक दिया

बुरैदा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी युद्ध में निकले। वापस आए तो एक काली- कलौटी दासी आकर कहने लगी: ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने मन्नत मानी थी कि यदि अल्लाह आपको सुरक्षित वापस ले आए, तो मैं आपके सामने दफ़ बजाऊँगी और गाऊँगी। यह स…

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#10567HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरे पास जिन्नों की ओर से एक बुलाने वाला आया था, अतः, मैं उसके साथ गया और उन्हें क़ुरआन सुनाया

आमिर कहते हैं कि मैंने अलक़मा से पूछा: क्या अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) जिन्नों से मुलाक़ात वाली रात अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ मौजूद थे? उनका कहना है कि अलक़मा ने उत्तर दिया: ख़ुद मैंने अब्दुल्लाह बिन मसऊद से पूछा था कि क्या जिन्नों वाल…

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#10569HadeethEnc[सह़ीह़]

इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है, फिर अपनी सेनाओं को भेजता है, उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव करने वाला होता है

जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है। फिर अपनी सेनाओं को भेजता है। उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव मचाने वाला हो। उनमें एक आकर कहता है: मैंन…

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#10570HadeethEnc[सह़ीह़]

बनू ज़ुरैक़ के एक व्यक्ति ने, जिसे लबीद बिन आसम कहा जाता था, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर जादू कर दिया था, जिसके कारण आपको लगता था कि आपने कोई काम कर लिया है, हालाँकि वह काम नहीं किया होता

आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि बनू ज़ुरैक़ के एक व्यक्ति ने, जिसे लबीद बिन आसम कहा जाता था, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर जादू कर दिया था, जिसके कारण आपको लगता था कि आपने कोई काम कर लिया है, हालाँकि वह काम नहीं किया होता। यहाँ तक कि एक दिन या एक रात…

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#10573HadeethEnc[सह़ीह़]

हमारे पास अबू जुमुआ अंसारी आए और फ़रमाया: हम लोग दस व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ थे, जिनमें मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अनहु) भी मौजूद थे, हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या सवाब के मामले में कोई हमसे भी आगे बढ़ सकता है?

इब्ने जुबैर कहते हैं: हमारे पास अबू जुमुआ अंसारी (रज़ियल्लाहु अनहु) आए और फ़रमाया: हम लोग दस व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ थे, जिनमें मुआज़ बिन जबल (रज़ियल्लाहु अनहु) भी मौजूद थे। हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! हम आप पर ईमान लाए और हमने आपका अनुस…

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#10621HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम आज शाम और रातभर चलोगे, तो कल इनशा अल्लाह पानी के स्थान तक पहुँच जाओगे

अबू क़तादा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें संबोधित किया और कहा: तुम आज शाम और रातभर चलोगे, तो कल इनशा अल्लाह पानी के स्थान तक पहुँच जाओगे। तो लोग चल पड़े। कोई किसी को मुड़कर देख नहीं रहा था। अबू क़तादा कहते…

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#10635HadeethEnc[स़ह़ीह़]

''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा स्थान) और श्रेष्ठतम दर्जा प्रदान कर और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें वचन दिया है।" उसके लिए क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश अनिवार्य हो जाएगी।''

जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे…

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