Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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सलाम करने तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब
सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।" जबकि सहीह बुख़ारी में है : "छोटा बड़े को सलाम…
यहूदियों तथा इसाइयों को पहले सलाम न करो और जब रास्ते में उनसे भेंट हो जाए, तो उन्हें तंग रास्ता अख़्तियार करने पर विवश कर दो।
छोटा बड़े को, गुज़रने वाला बैठे हुए को और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करे।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "छोटे बड़े को, ग…
जब लोग समूह में जा रहे हों, तो यह काफ़ी है कि उनकी ओर से उनमें से एक आदमी सलाम करे तथा यह भी काफ़ी है कि समूह की ओर से एक व्यक्ति सलाम का उत्तर दे।
अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "जब लोग स…
किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि अपने भाई से तीन दिन से अधिक बात-चीत बंद रखे, इस प्रकार कि दोनों मिलें, लेकिन यह भी मुँह फेर ले और वह भी मुँह फेर ले। उन दोनों में उत्तम वह है, जो पहले सलाम करे।
अबू ऐयूब अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि अपने भाई से तीन दिन से अधिक बात-चीत बंद रखे, इस प्रकार कि दोनों मिलें, लेकिन यह भी मुँह फेर ले और वह भी मुँह फेर ले। उन दोनों में उत…
मैंने अनस (रज़ियल्लाहु अंहु) से पूछाः क्या अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सहाबा में मुसाफ़हे (मुलाक़ात के समय हाथ मिलाने) का चलन था? तो फ़रमायाः हाँ!
वह कुछ बच्चों के पास से गुज़रे, तो उनको सलाम किया और कहा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐसा किया करते थे।
एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि इस्लाम का कौन-सा कार्य सबसे अच्छा है? आपने उत्तर दिया : "यह कि तुम खाना खिलाओ और जाने-पहचाने तथा अनजान सबको सलाम करो।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल…
ऐ अबुल हसन! अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने किस अवस्था में सुब्ह की? तो उन्होंने उत्तर दियाः अल-हमदुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) आपने स्वस्थ होकर सुब्ह की है।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की उस बीमारी के समय, जिसमें आपकी मृत्यु हुई, आपके यहाँ से बाहर आए तो लोगों ने कहा कि ऐ अबुल हसन! अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व स…
एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई अपने भाई अथवा अपने दोस्त से मिलते समय उसके लिए झुक जाए? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः क्या उसे गले से लगा ले और बोसा दे? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः फिर क्या उसका हाथ पकड़े और उससे मुसाफ़हा करे? फ़रमायाः हाँ।
अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हममें से कोई अपने भाई अथवा अपने दोस्त से मिलते समय उसके लिए झुक जाए? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः क्या उसे गले से लगा ले और बोसा दे? फ़रमायाः नहीं। उसने कहाः फिर क्या उसका हाथ पकड़े और उससे मुसा…
जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, तो उनके अलग होने से पहले-पहले उनको क्षमा कर दिया जाता है।
बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने…

