जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, तो उनके अलग होने से पहले-पहले उनको क्षमा कर दिया जाता है।
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बरा बिन आज़िब -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफ़हा करते हैं, तो उनके अलग होने से पहले-पहले उनको क्षमा कर दिया जाता है।"
Explanation
Benefits
मुनावी कहते हैं : सुन्नत यह है कि अगर कोई मजबूरी न हो तो दाएँ हाथ को दाएँ हाथ पर रखा जाए।
सलाम को आम करने की प्रेरणा और एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान भाई से मुसाफ़हा करने के बड़े प्रतिफल का बयान।
इस हदीस के दायरे में हराम मुसाफ़हा बाहर है। जैसे किसी अजनबी महिला से मुसाफ़हा करना।
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