افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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सहाबा रज़ियल्लाहु अनहुम की फ़ज़ीलतें

12 hadeeths in this category
#3570HadeethEnc[सह़ीह़]

इसने कार्य थोड़ा किया और प्रतिफल बड़ा प्रदान किया गया।

बरा बिन आज़िब- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास लोहे का कवच पहना हुआ एक व्यक्ति आया और बोलाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैं युद्ध करूँ या इस्लाम ग्रहण करूँ? फ़रमायाः "इस्लाम ग्रहण करो, फिर युद्ध करो।" अतः, वह मुसलमान हो गया और उसके…

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#3597HadeethEnc[सह़ीह़]

कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मेरे मामा ह़राम भी शामिल थे।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैंः कुछ लोग अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहा कि हमारे साथ कुछ लोगों को भेजें, जो हमें क़ुरआन और सुन्नत सिखाएँ। अतः आपने उनकी ओर सत्तर अंसारियों को भेजा, जिन्हें 'अल-क़ुर्रा' (क़ुरआन पढ़ने वाले) कहा जाता था। उनमें मे…

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#3601HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह तआला ने मुझे आदेश दिया है कि तेरे सामने 'لم يكن الذين كفروا...' पढ़ूँ।

अनस बिन मालिक - रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उबै बिन कअब- रज़ियल्लाहु अन्हु- से कहाः अल्लाह तआला ने मुझे आदेश दिया है कि तेरे सामने 'لم يكن الذين كفروا...' पढ़ूँ। उन्होंने पूछा कि क्या अल्लाह ने मेरा नाम भी लिया है?" फ़रमाय…

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#3855HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ साद बिन मुआज़! काबा के रब की क़सम, मुझे उहुद पर्वत के निकट से जन्नत की सुगंध आ रही है।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मेरे चचा अनस बिन नज़्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- बद्र के युद्ध में शरीक नहीं हो सके थे। अतः, उन्होंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं आपके द्वारा मुश्रिकों से लड़े गए प्रथम युद्ध में शामिल नहीं हो सका। यदि अल्लाह ने मुझे उनसे लड़ने का अवसर दिया…

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#4290HadeethEnc[सह़ीह़]

बहुत ख़ूब, यह तो बहुत लाभदायक माल है। यह तो वाकई लाभदायक धन है। जो कुछ तुमने कहा, उसे मैंने सुन लिया। मेरी राय यह है कि तुम इसे अपने रिश्तेदारों में बाँट दो।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अबू तल्हा- रज़ियल्लाहु अन्हु- मदीने में तमाम अनसार से ज़्यादा खुजूर के बाग वाले मालदार व्यक्ति थे तथा उनका सबसे प्रिय धन बैरूहा नामी बाग था, जो मस्जिद नबवी के सामने था। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्…

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#4458HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अंसारियो! क्या मैंने तुम्हें सत्य की राह से भटका हुआ नहीं पाया तो अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा सीधा रास्ता दिखाया? तुम बिखरे हुए नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा आपस में जोड़ दिया? तुम कंगाल नहीं थे कि अल्लाह ने तुम्हें मेरे द्वारा धनी बनाया?

अब्दुल्लाह बिन ज़ैद बिन आसिम कहते हैं कि जब हुनैन के दिन अल्लाह ने अपने रसूल को गनीमत का धन प्रदान किया तो उसे लोगों और नए-नए इस्लाम ग्रहण करने वालों के बीच बाँट दिया और अंसार को कुछ नहीं दिया। इससे अंसार ने अपने दिलों में कुछ नाराज़गी महसूस की; क्योंकि लोगों को जो कुछ…

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#4507HadeethEnc[सह़ीह़]

एक व्यक्ति ने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से यात्रा के दौरान रोज़ा रखने के संबंध में प्रश्न किया तो आपने फ़रमाया: यदि चाहो तो रोज़ा रखो और अगर चाहो तो न रखो।

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#4925HadeethEnc[सह़ीह़]

जिबरील (अलैहिस्सलाम), अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर बोले कि आप लोग बद्र के युद्ध में शामिल रहने वाले सहाबा को अपने अंदर कैसा मानते हैं? आपने उत्तर दियाः हम उन्हें सबसे उत्तम मुसलमानों में शुमार करते हैं।

रिफ़ाआ बिन राफे ज़ुरक़ी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि जिबरील (अलैहिस्सलाम), अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर बोले कि आप लोग बद्र के युद्ध में शामिल रहने वाले सहाबा को अपने अंदर कैसा मानते हैं? आपने उत्तर दियाः हम उन्हें सबसे उत्तम मुसलमानों में शुमा…

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#5219HadeethEnc[सह़ीह़]

कूफ़ा वालों ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के यहाँ साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शिकायत की, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनको हटाकर अम्मार बिन यासिर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को उनका हाकिम बना दिया।

जाबिर बिन समुरा (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि कूफ़ा वालों ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के यहाँ साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अन्हु) की शिकायत की, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उनको हटाकर अम्मार बिन यासिर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) को उनका हाकिम बना दिया। उन लोगों न…

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#5654HadeethEnc[सह़ीह़]

उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने पहले हिजरत करने वाले मुहाजिरों के लिए पेंशन की राशि निर्धारित की।

नाफे से वर्णित है कि उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने पहले हिजरत करने वाले मुहाजिरों के लिए पेंशन की राशि चार हज़ार निर्धारित की, तो अपने बेटे के लिए तीन हज़ार पाँच सौ। ऐसे में उनसे कहा गया कि जब वह एक मुहाजिर हैं, तो आपने उनके लिए कम राशि क्यों निर्धारित की? इसपर…

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#5864HadeethEnc[सह़ीह़]

ज़ुबैर बिन अव्वाम -रज़ियल्लाहु अन्हु- की मृत्यु और उनका क़र्ज़ अदा करने का क़िस्सा।

अबू खुबैब अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से वर्णित है, वह कहते हैं कि जब जंग-ए-जमल के दिन ज़ुबैर -रज़ियल्लाहु अन्हु- खड़े हुए, तो मुझे बुलाया। जब मैं उनके पास खड़ा हो गया, तो फ़रमाया : ऐ मेरे बेटे, आज या तो ज़ालिम मारा जाएगा या मज़लूम। जबकि मुझे लगता है कि…

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