افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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Prophetic Hadeeth Encyclopedia

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#58153HadeethEnc[मुझे अल्लामा अलबानी का कोई हुक्म नहीं मिला।]

जाहिलियत काल के लोग साल दो साल तक के लिए 'ईला' (अपनी पत्नी के पास न जाने की क़सम खाना) किया करते थे। फिर अल्लाह ने 'ईला' के समय का निर्धारण कर दिया। अतः, जिसने चार महीने से कम समय की ईला की, उसकी ईला, ईला नहीं है।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है, उन्होंने कहा किः जाहिलियत काल के लोग साल दो साल तक के लिए 'ईला' (अपनी पत्नी के पास न जाने की क़सम खाना) किया करते थे। फिर अल्लाह ने 'ईला' के समय का निर्धारण कर दिया। अतः, जिसने चार महीने से कम समय की ईला की, उसकी ई…

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#58154HadeethEnc[ह़सन]

एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उसने अपनी पत्नी से 'ज़िहार' करने के बाद उससे संभोग कर लिया था।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से वर्णित है, वह कहते हैंः एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उसने अपनी पत्नी से 'ज़िहार' करने के बाद उससे संभोग कर लिया था। उसने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मैंने अपनी पत्नी से ज़िहार किया और कफ़्फ़ारा…

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#58155HadeethEnc[ह़सन]

'ज़िहार' के बारे में सलमा बिन सख़्र की हदीस

सलमा बिन सख़्र (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैंः मैं एक ऐसा व्यक्ति था, जो अन्य लोगों की तुलना में पत्नी से अधिक संभोग किया करता था। यही कारण है कि जब रमज़ान का महीना आया, तो मुझे डर महसूस हुआ कि कहीं अपनी पत्नी से संभोग करते हुए सुबह न कर दूँ। अतः, रमज़ान म…

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#58156HadeethEnc[सह़ीह़]

उसकी पत्नी पर नज़र रखो, अगर वह गोरा-चिट्टा, सीधे बालों और लाल आँखों वाला बच्चा जनती है, तो वह हिलाल बिन उमय्या का है और अगर सुरमई आँखों, घुंघराले बालों और पतली पिंडलियों वाला बच्चा जनती है, तो वह शरीक बिन सहमा का है।

हिलाल बिन उमय्या ने अपनी पत्नी पर शरीक बिन सहमा के साथ व्यभिचार का आरोप लगाया। हिलाल बिन उमय्या बरा बिन मालिक के माँ शरीक भाई थे और 'लेआन' करने वाले पहले मुसलमान थे। वर्णनकर्ता कहते हैंः उन्होंने अपनी पत्नी से 'लेआन' कर लिया, तो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)…

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#58157HadeethEnc[सह़ीह़]

उवैमिर अजलानी, आसिम बिन अदी अंसारी के पास आए और उनसे कहाः ऐ आसिम, आप उस व्यक्ति के बारे में क्या कहते हैं, जो अपनी पत्नी के साथ किसी को पाए? क्या वह उसका वध कर दे तो आप लोग भी उसका वध कर देंगे या वह और क्या करे? ऐ आसिम, इस संबंध में आप मेरे लिए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछें।

इब्ने शिहाब से रिवायत है कि सह्ल बिन साद साइदी (रज़ियल्लाहु अंहु) ने उन्हें बतायाः उवैमिर अजलानी आसिम बिन अदी अंसारी के पास आए और उनसे कहाः ऐ आसिम, आप उस व्यक्ति के बारे में क्या कहते हैं, जो अपनी पत्नी के साथ किसी को पाए? क्या वह उसका वध कर दे तो आप लोग भी उसका वध कर द…

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#58158HadeethEnc[सह़ीह़]

एक व्यक्ति ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहाः मेरी पत्नी यदि कोई उसे छूना चाहे, तो आपत्ति नहीं करती (अर्थात: वह पुरुषों के साथ बात-चीत करने से नहीं बचती है, न उनसे टीक से परदा करती है, चुनांचे वह उससे मुसाफहा करलेते हैं या उसे छूलेते हैं, तो इसकी परवाह नही करती है)। आपने कहाः "उसे तलाक़ देकर अलग कर दो।" उसने कहाः मुझे भय है कि कहीं मेरा दिल उसमें अटका न रहे। फ़रमायाः "तब उससे लाभ उठाते रहो।"

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है, वह कहते हैं कि एक व्यक्ति ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहाः मेरी पत्नी यदि कोई उसे छूना चाहे, तो आपत्ति नहीं करती (अर्थात: वह पुरुषों के साथ बात-चीत करने से नहीं बचती है, न उनसे ठीक से परदा करती है,…

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#58160HadeethEnc[इसकी सनद ह़सन है।]

जब किसी ने क्षण भर के लिए भी अपने बच्चे का इक़रार कर लिया, तो वह उसका इनकार नहीं कर सकता।

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#58163HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम अपने बाग के खजूर अवश्य तोड़ो। हो सकता है कि तुम सदक़ा करो या कोई और भलाई का कार्य करो।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि मेरी ख़ाला को तलाक़ दे दी गई। (इद्दत के दौरान) उन्होंने अपने ख़जूर के बाग के फल तोड़ने का इरादा किया, तो एक व्यक्ति ने उन्हें घर से निकलने पर डाँट दिया। ऐसे में वह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास पहुँचीं, तो आप…

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#58164HadeethEnc[सह़ीह़]

"तुम इद्दत पूरी होने तक अपने उसी घर में रहो।" उनका कहना है कि फिर मैंने वहीं इद्दत के चार महीने दस दिन गुज़ारे।

फ़ुरैआ बिंत मालिक बिन सिनान (रज़ियल्लाहु अंहा), जो अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अंहु) की बहन हैं, का वर्णन है कि वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास यह पूछने के लिए गईं कि क्या वह (इद्दत के दौरान) अपने घर वालों की ओर लौट सकती हैं, जिनका संबंध बनी ख़दुरा क…

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#58165HadeethEnc[सह़ीह़]

फ़ातिमा बिंत क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहा) का यह कहना कि ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे पति ने मुझे तीन तलाक़ दे दिए हैं और मुझे भय है कि कोई मेरे यहाँ ज़बरदस्ती घुस न आए। तो आपके आदेश से उन्होंने जगह बदल लिया।

फ़ातिमा बिंत क़ैस (रज़ियल्लाहु अंहा) से वर्णित है, वह कहती हैं कि मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे पति ने…

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#58166HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम लोग हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत के बारे में संदेह में न डालो। उम्मे वलद (वह दासी जो अपने मालिक की संतान की माँ बन जाए) की इद्दत चार महीने दस दिन है।

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