افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा

11 hadeeths in this category
#3062HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है, वह कहते हैं : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं। ज़ोहर से पहले दो रकात, उसके बाद दो रकात, मग्रिब के बाद घर में दो रकात, इशा के बाद घर में दो रकात और सुबह की नमाज़ से पहले दो रकात। दरअसल…

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#3177HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक सफर में थे। इशा की नमाज़ पढ़ी, तो एक रकअत में सूरा वत्-तीनि वज़्-ज़ैतून की तिलावत की। मैंने आपसे उत्तम आवाज़ अथवा उत्तम क़िराअत किसी की नहीं सुनी।

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#3220HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ पढ़ते, तो (सजदे की अवस्था में) अपने दोनों बाज़ुओं को इतना हटाकर रखते कि आपकी बगलों का उजलापन प्रकट हो जाता।

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#3227HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं इस मामले में कोई कोताही नहीं करूँगा कि तुम्हें वैसी ही नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसी अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ाया करते थे।

अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि उन्होंने कहाः मैं इस मामले में कोई कोताही नहीं करूँगा कि तुम्हें वैसी ही नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसी अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ाया करते थे। (इस हदीस के वर्णनकर्ता साबित कहते हैंः) चुनांचे अनस- रज़ियल्लाहु अन्ह…

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#3443HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सवार होकर एवं पैदल चलकर क़ुबा जाते और वहाँ दो रकात नमाज़ पढ़ते थे।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सवार होकर एवं पैदल चलकर क़ुबा जाते और वहाँ दो रकात नमाज़ पढ़ते थे। तथा एक रिवायत में हैः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) प्रत्येक शनिवार को सवार होकर एवं पैदल चलकर क़ुबा मस्जिद जाते तथा अब…

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#3727HadeethEnc[सह़ीह़]

एक रात मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ी जिसमें आपने सूरा बक़रा पढ़ना शुरू किया।

हुज़ैफ़ा बिन यमान- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि एक रात मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ी। आपने सूरा बक़रा पढ़ना शुरू किया। मैंने सोचा, शायद सौ आयतों के बाद रुकू करेंगे, लेकिन पढ़ना जारी रखा। मैंने सोचा, शायद इसे एक रकअत में पढ़ेंगे, प…

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#4226HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आपने क्या इरादा किया था? तो बोलेः सोचने लगा था कि आपको छोड़कर बैठ जाऊँ।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने एक रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप इतनी देर तक खड़े रहे कि मेरी नीयत बिगड़ गई। उनसे पूछा गया कि आपने क्या इरादा किया था? तो बोलेः सोचने लगा था कि आपको छोड़कर बैठ जाऊँ…

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#4247HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) रात के प्रथम भाग में सोते और अंतिम भाग में उठकर नमाज़ पढ़ते थे।

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#4829HadeethEnc[सह़ीह़]

जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे।

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#5320HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जुमा के दिन फ़ज्र की नमाज़ में "الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةَ" और هَلْ أتى" على الإنسان" पढ़ते थे।

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#5817HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ा करता था, तो आपकी नमाज़ भी संतुलित हुआ करती थी और आपका ख़ुतबा भी।

अबू अब्दुल्लाह बिन जाबिर बिन समुरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि मैं नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के…

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