افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नमाज़ियों से होने वाली गलतियाँ

12 hadeeths in this category
#3088HadeethEnc[स़ह़ीह़]

खाने की मौजूदगी में नमाज़ न पढ़ी जाए और न उस समय जब इन्सान को पेशाब-पाखाना की हाजत सख़्त हो।

आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते…

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#10650HadeethEnc[सह़ीह़]

यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है।

मुआविया बिन हकम सुलमी (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैं एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ रहा था कि अचानक हममें से एक आदमी ने छींका और मैंने "यरहमुकल्लाह" (अल्लाह तुझपर रहम करे) कह दिया। इसपर लोग मुझे घूरने लगे, तो मैंने…

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#10874HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कोख पर हाथ रखकर नमाज़ पढ़ने से मना किया है।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कोख पर हाथ रखकर…

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#10875HadeethEnc[सह़ीह़]

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्ह) से वर्णित है कि वह इस बात को नापसंद करती थीं कि कोई (नमाज़ पढ़ते समय) अपने हाथ को कोख पर रखे तथा कहा करती थीं कि यहूदी ऐसा करते हैं।

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#10877HadeethEncसह़ीह़

जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा होता है, तो अल्लाह की रहमत उसकी ओर मुतवज्जेह होती है। अतः, वह कंकड़ न छूए।

अबूज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा होता है, तो अल्लाह की रहमत उसकी ओर मुतवज्जेह होती है। अतः, वह कंकड़ न छूए।" तथा मुऐक़ीब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व…

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#10878HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पूछा : नमाज़ में इधर उधर देखना कैसा है? तो आपने उत्तर दिया : "यह एक प्रकार की चोरी है, जो शैतान बंदे की नमाज़ में करता है।"

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#10880HadeethEnc[सह़ीह़]

तुममें से कोई जब नमाज़ में खड़ा होता है, तो वह अपने रब से व्यक्तिगत रूप से बात कर रहा होता है या उसका रब उसके और क़िबले के बीच होता है। इसलिए, तुममें से कोई (नमाज़ की हालत में) क़िबले की ओर न थूके। बल्कि बाएँ तरफ़ या अपने क़दमों के नीचे थूके।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बार (मस्जिद के अंदर) क़िबले की ओर थूक देखा, तो यह आपको बहुत बुरा लगा और इसका प्रभाव आपके चेहरे पर देखा गया। चुनांचे आप खड़े हुए और उसे अपने हाथ से साफ़ किया तथा फ़रमाया : "तुममें से क…

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#10883HadeethEnc[स़ह़ीह़]

कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वे नमाज़ में अपनी नज़रें आकाश की ओर उठाते हैं?" आपने इसके बारे में बड़ी सख़्त बात करते हुए यहाँ तक फ़रमा दिया : "वे इससे ज़रूर रुक जाएँ, वरना उनकी आँखें उचक ली जाएँगी।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वे नमाज़ में अपनी नज़रें आकाश की ओर उठाते हैं?" आपने इसके बारे में बड़ी सख़्त बात करते हुए यहाँ तक फ़रमा दिया : "वे इसस…

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#10906HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से और क़ुरआन पाठ "अल-ह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नमाज़ तकबीर से और क़ुरआन पाठ "अल-ह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" से आरंभ करते थे। जब आप रुकूअ करते, तो अपने सर को न उठाए रखते और न बहुत झुका देते, बल्कि इन दोनों के…

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#11272HadeethEnc[सह़ीह़]

एक रात में दो वित्र नहीं हैं।

क़ैस बिन तल्क़ से रिवायत है, वह कहते हैं कि रमज़ान के दिन में तल्क़ बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हु हम से मिलने के लिए आए, तथा शाम के समय हमारे पास रहे और इफ़्तार किया, फिर रात में हमें (रात की) नमाज़ पढ़ाई और (अन्त में) हमें वित्र की नमाज़ भी पढ़ाई, फिर अपनी मस्जिद की ओर गए…

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#65088HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जो व्यक्ति किसी नमाज़ को भूल जाए, तो वह उसे उस समय पढ़ ले, जब याद आ जाए। इसके सिवा उसका कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) नहीं है

अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो व्यक्ति किसी नमाज़ को भूल जाए, तो वह उसे उस समय पढ़ ले, जब याद आ जाए। इसके सिवा उसका कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) नहीं है : {وَأَقِمِ الصَّلاةَ لِذِكْرِي} (तथा मेरे स्मरण…

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#65100HadeethEnc[स़ह़ीह़]

सबसे बुरा चोर वह है, जो अपनी नमाज़ में चोरी करता है।" किसी सहाबी ने पूछा कि नमाज़ में चोरी करने का क्या मतलब है? आपने उत्तर दिया : "रुकू एवं सजदा संपूर्ण रूप से न किया जाए।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे बुरा चोर वह है, जो अपनी नमाज़ में चोरी करता है।" किसी सहाबी ने पूछा कि नमाज़ में चोरी करने का क्या मतलब है? आपने उत्तर दिया : "रुकू एवं सजदा संपूर्ण रूप से न किया जाए…

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