افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नमाज़ के अज़कार

12 hadeeths in this category
#3103HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ क़ब्र की यातना से, जहन्नम की यातना से, जीवन और मृत्यु के फ़ितने से और मसीह-ए-दज्जाल के फ़ितने से

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन शब्दों द्वारा दुआ करते थे : "ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ क़ब्र की यातना से, जहन्नम की यातना से, जीवन और मृत्यु के फ़ितने से और मसीह-ए-दज्जाल के फ़ितने से।" और मुस्लिम…

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#3104HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं कहता हूँ : ऐ अल्लाह, मेरे तथा मेरे गुनाहों के बीच उतनी दूरी पैदा कर दे, जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच रखी है।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ की तकबीर कहते, तो (सूरा फ़ातिहा) पढ़ने से पहले कुछ देर ख़ामोश रहते। सो, मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, आपपर मेरे माँ-बाप फ़िदा हों, आप तकबीर और (सूरा फ़ातिहा) पढ़ने के…

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#3518HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं तुमको वसीयत करता हूँ कि हर नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ना हरगिज़ न छोड़ना : ऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र करने, शुक्र करने और बेहतर अंदाज़ में अपनी इबादत करने में मेरी मदद फ़रमा।

मुआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है कि : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनका हाथ पकड़ा और फ़रमाया : "ऐ मुआज़! अल्लाह की क़सम, मैं तुमसे मोहब्बत रखता हूँ।" आगे फ़रमाया : "ऐ मुआज़! मैं तुमको वसीयत करता हूँ कि हर नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ना हरगिज़ न छोड़…

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#3566HadeethEnc[स़ह़ीह़]

(ऐ अल्लाह! तू पवित्र एवं प्रशंसनीय है। तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है)। तथा एक रिवायत में हैः मेरा हाथ आपके कदमों के भीतरी भाग पर पड़ा, जबकि आप मस्जिद में थे, दोनों क़दम खड़े थे और आप कह रहे थेः (ऐ अल्लाह! मैं तेरे क्रोध से तेरी प्रसन्नता की शरण माँगता हूँ, तेरी सज़ा से तेरे क्षमादान की शरण माँगता हूँ और तुझसे तेरी शरण में आता हूँ। मैं तेरी प्रशंसा अधिकार अनुसार नहीं कर सकता। तू वैसा ही है, जैसा तूने अपने बारे में कहा है)।

आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : मुझे एक रात अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बिस्तर पर नहीं मिले। मैंने ढूँढना शुरू किया, तो मेरे हाथ आपके पैरों के तलवों से जा लगे। दरअसल आप मस्जिद में (सजदे की हालत में) थे और आपके दोनों क़दम खड़े थे। आप फ़रमा रह…

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#5212HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सूरा नस्र उतरने के बाद जब भी कोई नमाज़ पढ़ी, उसके अंदर यह दुआ ज़रूर पढ़ी : (ऐ अल्लाह, ऐ हमारे रब, तू अपनी प्रशंसा के साथ पाक है। ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ कर दे।)

मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सूरा नस्र उतरने के बाद जब भी कोई नमाज़ पढ़ी, उसके अंदर यह दुआ ज़रूर पढ़ी : (ऐ अल्लाह, ऐ हमारे रब, तू अपनी प्रशंसा के साथ पाक है। ऐ अल्लाह, तू मुझे माफ कर दे।…

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#5377HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर दरूद कैसे भेजें?

अब्दुर रहमान बिन अबू लैला कहते हैं कि काब बिन उजरा मुझसे मिले और कहने लगे : क्या मैं तुम्हें कोई तोहफ़ा न दूँ? अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर दरूद कैसे…

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#6203HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम प्रत्येक नमाज़ के बाद इन्हीं शब्दों के द्वारा तहलील (अल्लाह का गुणगान) करते थे।

अबू अल-ज़ुबैर से वर्णित है, उन्होंने कहा : अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु अनहुमा प्रत्येक नमाज़ का सलाम फेरने के बाद कहा करते थे : " لا إله إلا الله وحده لا شريكَ له، له الملك وله الحمد وهو على كل شيءٍ قديرٌ، لا حولَ ولا قوةَ إلا بالله، لا إله إلا الله، ولا نعبد إلا…

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#6259HadeethEnc[स़ह़ीह़]

प्रत्येक फ़र्ज नमाज़ के पश्चात कही जाने वाली तसबीहों को कहने वाले -या उनका पालन करने वाले- नाकाम नहीं होंगे। अर्थात 33 बार सुबहानल्लाह, 33 बार अल-हम्दु लिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर।

काब बिन उजरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "प्रत्येक फ़र्ज नमाज़ के पश्चात कही जाने वाली तसबीहों को कहने वाले -या उनका पालन करने वाले- नाकाम नहीं होंगे। अर्थात 33 बार सुबहानल्लाह, 33 बार अल-हम्दु लिल्लाह और 34 बा…

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#8280HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैंने जो पहले किया और जो बाद में किया, जो छिपाकर किया तथा जो दिखाकर किया और जिसमें मैंने अति की और जिसको तू मुझसे भी बेहतर जानने वाला है, उन सभी गुनाहों को माफ़ कर दे। तू ही आदेशपालन का सामर्थ्य देकर आगे करता है और तू ही अवज्ञा के कारण पीछे करता है। तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है।

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब नमाज़ के लिए खड़े होते, तो यह दुआ पढ़तेः «وجَّهت وجْهي للذي فَطَر السَّماوات والأرض حَنيفا، وما أنا من المشركين، إن صلاتي، ونُسُكي، ومَحْيَاي، ومَمَاتِي لله ربِّ العالمين،…

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#8281HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक रात तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप खड़े हुए और सूरा बक़रा पढ़ी। जब रहमत की आयत से गुज़रते, तो रुककर (अल्लाह से उसकी दया) माँगते और जब अज़ाब की आयत से गुज़रते, तो रुककर (उससे अल्लाह की) शरण माँगते।

औफ़ बिन मालिक अशजई (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक रात तहज्जुद की नमाज़ पढ़ी। आप खड़े हुए और सूरा बक़रा पढ़ी। जब रहमत की आयत से गुज़रते, तो रुककर (अल्लाह से उसकी दया) माँगते और जब अज़ाब की आयत से…

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#8311HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह, ऐ जिबराईल, मीकाईल तथा इसराफ़ील के रब! आकाश तथा धरती को बनाने वाले और हाज़िर और ग़ायब की ख़बर रखने वाले! तू ही अपने बंदों के मतभेदों का निर्णय करने वाला है, मुझे अपनी अनुमति से जिसके प्रति मतभेद हो गया है, उसमें सत्य की राह दिखा। निश्चय तू जिसे चाहता है उसे सही रास्ता दिखाता है।

अबू सलमा बिन अब्दुर रहमान बिन औफ़ कहते हैं कि मैंने उम्मुल मोमिनीन आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से पूछा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब रात में तहज्जुद की नमाज़ के लिए खड़े होते, तो क्या कहकर नमाज़ प्रारंभ करते? आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहा : आप (सल्लल्लाहु अलैहि व…

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