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अल-वला तथा अल-बरा (मैत्री तथा अलगाव) से संबंधित अहकाम
एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका आमंत्रण स्वीकार करो, जब तुमसे शुभचिंतन की आशा रखे तो उसका शुभचिंतक बनो, जब छींकने के बाद अल्लाह की प्रशंसा करे तो 'यरहमुकल्लाह' कहो, जब बीमार हो तो उसका हाल जानने जाओ और जब मर जाए तो उसके जनाज़े में शामिल हो।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका आमंत्रण स्वीकार…
जो किसी को हानि पहुंचाएगा, अल्लाह उसको हानि पहुंचाएगा और जो किसी को कठिनाई में डालेगा, अल्लाह उसे कठिनाई में डालेगा।
अबू सिर्मा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो किसी…
मैं हर उस मुसलमान से बरी हूँ, जो काफ़िरों के बीच में रहता हो।
जरीर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ख़सअम क़बीले की ओर एक सैन्यदल भेजा। (युद्ध के दौरान) उनमें से कुछ लोग बचाव के लिए सजदे में गिर पड़े, लेकिन मुसलमानों ने देर किए बिना उन्हें क़त्ल कर डाला। वर्णनकर्ता का कह…

