افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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मुसीबत के समय के अज़कार

12 hadeeths in this category
#3102HadeethEnc[सह़ीह़]

निश्चय यह निशानियाँ, जिन्हें अल्लाह भेजता है, किसी के मरने या जीने से सामने नहीं आतीं। बल्कि उन्हें वह अपने बंदों को डराने के लिए भेजता है। अतः जब उनमें से कोई चीज़ देखो, तो अल्लाह के ज़िक्र, दुआ और क्षमा याचना की ओर भागो।

अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैंः अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के समय में सूर्य ग्रहण हुआ, तो आप घबरा उठे, डर रहे थे कि कहीं क़यामत न आ जाए, यहाँ तक कि मस्जिद आए और सब से लंबे क़याम तथा सजदे के साथ नमाज़ पढ़ाई। मैंने आपको इतनी लं…

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#3492HadeethEnc[ह़सन ग़रीब]

एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर बोला कि ऐ अल्लाह के रसूल! मैं यात्रा पर निकलना चाहता हूँ। अतः, मुझे कुछ पाथेय प्रदान कीजिए। आपने कहाः अल्लाह तुझे धर्मपरायणता का पाथेय प्रदान करे।

अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर बोला कि ऐ अल्लाह के रसूल! मैं यात्रा पर निकलना चाहता हूँ। अतः, मुझे कुछ पाथेय प्रदान कीजिए। आपने कहाः अल्लाह तुझे धर्मपरायणता (तक़वा) का पाथेय प्रदान करे। उसने कहाः…

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#3578HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मुझे एक ऐसा वाक्य मालूम है कि अगर यह व्यक्ति उसे पढ़ ले, तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाए। अगर इसने कहा : मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ। तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाएगा।

सुलैमान बिन सुरद रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ बैठा हुआ था और (निकट ही) दो व्यक्ति एक-दूसरे को गाली गलौज कर रहे थे। उनमें एक व्यक्ति का चेहरा ग़ुस्से के कारण लाल हो गया था और उसकी रगें फूल गई थीं। यह देख…

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#4828HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब दस्तरख़्वान उठाते तो कहतेः "الحَمْدُ للهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ، غَيْرَ مَكْفِيٍّ، وَلَا مُوَدَّعٍ، وَلَا مُسْتَغْنًى عَنْهُ رَبَّنَا"। अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब दस्तरख़्वान उठाते तो कहतेः "الحَمْدُ للهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ، غَيْرَ مَكْفِيٍّ، وَلَا مُوَدَّعٍ، وَلَا مُسْتَغْنًى عَنْهُ رَبَّنَا"।

अबू उमामा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब दस्तरख़्वान उठाते तो कहतेः "الحَمْدُ للهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ، غَيْرَ مَكْفِيٍّ، وَلَا مُوَدَّعٍ، وَلَا مُسْتَغْنًى عَنْهُ رَبَّنَا" (अर्थात, सारी प्रशंसाएँ अ…

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#5271HadeethEnc[सह़ीह़]

अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक सवारी लाई गई, ताकि उसपर सवार हों। जब उन्होंने पायदान पर पाँव रखा, तो 'बिस्मिल्लाह' कहा।

अली बिन रबीआ कहते हैं कि मैंने देखा कि अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक सवारी लाई गई, ताकि उसपर सवार हों। जब उन्होंने पायदान पर पाँव रखा, तो 'बिस्मिल्लाह' कहा। फिर जब ठीक से बैठ गए, तो कहाः "सारी प्रशंसा अललाह की है, जिसने इसे हमारे वश में कर दिया, वरना हम…

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#5431HadeethEnc[ह़सन]

जिसने खाना खाने के बाद यह दुआ पढ़ीः 'الحمدُ للهِ الذي أَطْعَمَنِي هَذَا، وَرَزَقْنِيهِ مِنْ غَيرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ' (अर्थात - सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने मुझे यह खाना खिलाया तथा यह रोज़ी दी, जबकि इसमें मेरी शक्ति तथा सामर्थ्य का कोई दख़ल नहीं है) उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

सह्ल बिन मुआज़ अपने पिता से रिवायत करते हैं, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जिसने खाना खाने के बाद यह दुआ पढ़ीः 'الحمدُ للهِ الذي أَطْعَمَنِي هَذَا، وَرَزَقْنِيهِ مِنْ غَيرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ' (अर्थात - सारी प्रशंसा अल्…

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#5879HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब सोने लगते, तो अपने दोनों हाथों में फूँकते और सूरा अल-इख़लास, सूरा अल-फ़लक़ और सूरा अन-नास पढ़कर दोनों हाथों को शरीर पर फेरते।

आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब सोने लगते, तो अपने दोनों हाथों में फूँकते और सूरा अल-इख़लास, सूरा अल-फ़लक़ और सूरा अन-नास पढ़कर दोनों हाथों को शरीर पर फेरते। जबकि एक रिवायत में है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- प्रत्य…

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#5882HadeethEnc[सह़ीह़]

सारी प्रशंसा उस अल्लाह की है, जिसने हमें खिलाया, पिलाया, पर्याप्ति प्रदान की तथा शरण दी। कितने ऐसे लोग हैं, जिनको न कोई पर्याप्ति प्रदान करने वाला है, न शरण देने वाला।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बिस्तर पर आते, तो फ़रमाया करते : "सारी प्रशंसा उस अल्लाह की है, जिसने हमें खिलाया, पिलाया, पर्याप्ति प्रदान की तथा शरण दी। कितने ऐसे लोग हैं, जिनको न कोई पर्याप्ति प्रदान करने वाल…

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#5932HadeethEnc[स़ह़ीह़]

जो किसी स्थान में उतरते समय कहे : 'मैं अल्लाह की पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से उसके संपूर्ण शब्दों के द्वारा (उसकी) शरण माँगता हूँ', उसे कोई चीज़ वह स्थान छोड़ने तक नुक़सान नहीं पहुँचा सकती।

ख़ौला बिंत हकीम सुलमिया रज़ियल्लाहु अनहा से वर्णित है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "जो किसी स्थान में उतरते समय कहे : 'मैं अल्लाह की पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से उसके संपूर्ण शब्दों के द्वारा (उसकी) शरण माँगता हूँ…

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#5937HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी यात्रा पर निकलते तो यात्रा की कठिनाई, अप्रिय वापसी, बनाव के बाद बिगाड़, मज़लूम की बद्दुआ और परिवार तथा धन-माल में बुरी दृष्टि से अल्लाह की शरण माँगते थे।

अब्दुल्लाह बिन सरजिस (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी या…

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#5976HadeethEnc[स़ह़ीह़]

वायु को गाली मत दो। यदि कोई ऐसी बात देखो, जो पसंद न हो तो कहो : ऐ अल्लाह! हम तुझसे माँगते हैं इस वायु की भलाई, इसमें जो कुछ है उसकी भलाई और इसे जिसका आदेश दिया गया है उसकी भलाई। तथा ऐ अल्लाह! हम तुझसे शरण माँगते हैं इस वायु की बुराई से, इसमें जो कुछ है उसकी बुराई से और इसे जिसका आदेश दिया गया है उसकी बुराई से।

उबै बिन काब -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "वायु को गाली मत दो। यदि कोई ऐसी बात देखो, जो पसंद न हो तो कहो : ऐ अल्लाह! हम तुझसे माँगते हैं इस वायु की भलाई, इसमें जो कुछ है उसकी भलाई और इसे जिसका आद…

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