“निश्चय ही क़ुरान वाले का उदाहरण रस्सी से बंधे हुए ऊँटों के मालिक के समान है। यदि वह उनकी ठीक से देखभाल करेगा, तो उन्हें अपने पास रखने में सफल होगा और अगर उन्हें छोड़ देगा, तो वे भाग खड़े होंगे।”
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अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “निश्चय ही क़ुरान वाले का उदाहरण रस्सी से बंधे हुए ऊँटों के मालिक के समान है। यदि वह उनकी ठीक से देखभाल करेगा, तो उन्हें अपने पास रखने में सफल होगा और अगर उन्हें छोड़ देगा, तो वे भाग खड़े होंगे।”
Explanation
Benefits
कुरान को नियमित रूप से पढ़ने से ज़ुबान उसकी आदी बन जाती है और उसका पाठ करना आसान हो जाता है। अगर उसे छोड़ दिया जाए तो पढ़ना मुश्किल और बोझिल हो जाता है।
क़ाज़ी कहते हैं : इस हदीस में आए हुए शब्द 'صاحب القرآن' का अर्थ है : क़ुरआन को चाहने वाला। अरबी के शब्द 'المصاحبة' का अर्थ है : चाहत। इसी आधार पर अरबी में कहा जाता है : 'فلان صاحب فلان' (अमुक अमुक का चाहने वाला है) तथा 'أصحاب الجنة' (जन्नत की चाहत रखने वाले लोग) एवं 'أصحاب النار' (जहन्नम की चाहत रखने वाले लोग)।
आह्वान का एक तरीक़ा यह है कि उदाहरण प्रस्तुत किए जाएँ।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : यहाँ विशेष रूप से ऊँट का उल्लेख इसलिए किया गया है कि ऊँट पालतू जानवरों में सबसे ज़्यादा बिदकने वाला जानवर है। एक बार बिदक जाए, तो पकड़ना आसान नहीं रहता।
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