क्या तुम्हें इसी का आदेश दिया गया है? अथवा क्या तुम्हें इसीलिए इस धरा पर भेजा गया है कि एक आयत का खंडन दूसरी आयत से करो? तुमसे पूर्व की उम्मतें तो इन्हीं जैसी चीज़ों के कारण तबाह हुई हैं। तुम्हारा इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है। देखो कि तुम्हें क्या आदेश दिया गया है, तो उसपर अमल करो और किस बात से रोका गया है, तो उससे रुक जाओ।
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अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि एक जमात नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के द्वार के पास बैठी थी कि उनमें से किसी ने कहाः क्या अल्लाह ने ऐसा-ऐसा नहीं फ़रमाया है? फिर किसी ने कहाः क्या अल्लाह ने ऐसा-ऐसा नहीं फ़रमाया है? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इन बातों को सुना, तो घर से निकले। ऐसा लग रहा था कि आपके चेहरे पर अनार का रस निचोड़ दिया गया हो। फ़रमाया : “क्या तुम्हें इसी का आदेश दिया गया है? अथवा क्या तुम्हें इसीलिए इस धरा पर भेजा गया है कि एक आयत का खंडन दूसरी आयत से करो? तुमसे पूर्व की उम्मतें तो इन्हीं जैसी चीज़ों के कारण तबाह हुई हैं। तुम्हारा इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है। देखो कि तुम्हें क्या आदेश दिया गया है, तो उसपर अमल करो और किस बात से रोका गया है, तो उससे रुक जाओ।“
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