افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#65426[صحيح]
HadeethEnc · 1.24.0

जो व्यक्ती आमच्या प्रमाणे नमाज अदा करतो, आमच्या केंद्रीत काबा कडे चेहरा करतो, आमचा जिब्हा म्हणजे हलाल केलेले मास खातो तोच मुसलमान आहे, ज्याला सर्वोच्च अल्लाह व प्रेषितांकडुन संरक्षण मिळाले आहे, बस्स अल्लाह ने दिलेल्या संरक्षणाचा घात करु नका

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01

Hadeeth text

हजरत अनस बिन मालीक रजिअल्लाहु अनहु वर्णन करतात की: प्रेषित सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम नी फरमाविले आहे की: <<जो व्यक्ती आमच्या प्रमाणे नमाज अदा करतो, आमच्या केंद्रीत काबा कडे चेहरा करतो, आमचा जिब्हा म्हणजे हलाल केलेले मास खातो तोच मुसलमान आहे, ज्याला सर्वोच्च अल्लाह व प्रेषितांकडुन संरक्षण मिळाले आहे, बस्स अल्लाह ने दिलेल्या संरक्षणाचा घात करु नका>>.
02

Explanation

प्रेषितांनी सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम नी स्पष्ट केले आहे की, जो व्यक्ती धर्माच्या बाह्य स्वरूपाचे पालन करतो, जसे नमाज आमच्या पद्धतीने अदा करतो, काबा ला केंद्र बनवितो, आमच्या हलाल केलेल्या मांसाला वैध समजुन खातो, तोच असा मुसलमान आहे, ज्याला अल्लाह व प्रेषितां कडुन वचन व संरक्षण प्राप्त आहे, म्हणुन याबाबतीत अल्लाह व प्रेषितांच्या कराराला तोडु नका.
03

Benefits

ईब्ने रजब रहमतुल्लाह सांगतात की:सदर हदिस दर्शविते की फक्त कलमा उच्चारल्याने रक्त सुरक्षीत होत नाही, तर जोपर्यंत त्या कलेमा चे हक्क अदा करत नाही, त्यापैकी सर्वात महत्त्वाचा हक्क नमाज आहे, म्हणुन नमाज चा विशेष करुन उल्लेख केला आहे, दुसऱ्या एका हदिस मध्ये नमाज सोबत जकात चा सुद्धा उल्लेख आला आहे.
लोकांविषयी बाह्य स्वरुप बघितल्या जाते, आंतरीक स्वरुप नाही, जो व्यक्ती धर्माच्या बाह्य स्वरूपावर चालतो त्याला ईस्लाम चा पायीक माणल्या जाते, जोपर्यंत त्याच्या कडुन बाह्य स्वरूपाचे उल्लंघन होत नाही.
ईब्ने रजब रहमतुल्लाह सांगतात की:काबा कडे तोंड करून नमाज अदा करण्याचा उल्लेख या करता आला आहे की, तीच नमाज मान्य आहे जी मुस्लीमां मध्ये सर्वमान्य आहे, ज्याचा उल्लेख ग्रंथात व प्रेषितांना सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम करण्यात आला आहे, अर्थात काबा कडे तोंड करून अदा करावी, जो व्यक्ती रद्द ठरल्यावरही आपला चेहरा बैतुल मकदिस कडे करुन नमाज अदा करतो, जसे यहुदी व ईसाई व ईतर अनेकेनेश्वरवादी प्रमाणे, तर तसे लोकं मुसलमान नाहीत, मग ते कितीही एकेश्वरवादाची ग्वाही देत असले तरीही ते मुसलमान नाहीत.
या हदिस मध्ये काबा चे महत्व स्पष्ट होते, कारण नमाज च्या अटी पैकी एक काबा कडे चेहरा करण्याचा उल्लेख आहे, ईतर अट जसे शुद्धता चा उल्लेख आला नाही.
ईब्ने रजब रहमतुल्लाह सांगतात की:मुसलमानाच्या जबिहा हलाल मांसाचा उल्लेख, याचे स्पष्ट प्रमाण आहे की इस्लाम च्या संपुर्ण बाह्य स्वरूपाचे पालन करणे आवश्यक आहे, त्यापैकी एक म्हणजे जबिहा खाणे व त्यांच्या जबिहा हलाल पद्धत चा मनोमनी स्वीकार करणे सुद्धा आहे, जो याचा ईंकार करतो तो मुसलमान नाही.

Attribution

[رواه البخاري]

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