افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#65231[صحيح]
HadeethEnc · 1.24.0

प्रत्येक पैगंबराला एक (निशाणी) चमत्कार दिल्या गेला आहे, ज्यावर लोकांनी ईमान आणावं

Available translations

Choose an available translation of this Hadeeth

01

Hadeeth text

हजरत अबुहुरैरा अल्लाह प्रसन्न असो त्यांच्यावर कथन करतात की: प्रेषितांनी सलामती असो त्यांच्यावर फरमाविले: <<प्रत्येक पैगंबराला एक (निशाणी) चमत्कार दिल्या गेला आहे, ज्यावर लोकांनी ईमान आणावं, मला जे देण्यात आले आहे,ती वही आहे, मला पुर्ण विश्वास आहे की संपुर्ण प्रेषितांमध्ये माझेच अनुयायी सर्वात जास्त असतील>>.
02

Explanation

प्रेषितांनी सलामती असो त्यांच्यावर सविस्तर फरमाविले आहे की: तमाम पैगंबरांना सर्वोच्च अल्लाह ने स्पष्ट निशाण्या व चमत्कार प्रदान केले, ज्याद्वारे त्यांचे पैगंबरत्व सिद्ध झाले, ज्यांना बघुनच लोकं त्यांच्यावर ईमान आणत होते, आणी हे चमत्कार इतके मजबुत व प्रबल होते की लोकं त्याचा विरोध करुच शकत नव्हते, काही लोकं आपल्या हटधर्मीपणामुळे त्यांचा जाणुन बुजुन ईंकार करत होते. प्रेषितांचा सलामती असो त्यांच्यावर चमत्कार अप्रतिम कुरआन आहे, जो साक्षात अल्लाह ने पैगंबरावर अवतरीत केला; हा ईतका जबरदस्त चमत्कार आहे, जो सरासर आपल्या अनोख्या शैलीमुळे व नेहमी स्वीकारलेला, अतोनात फायदा संपन्न, व हमेशा बाकी राहणारा, या मध्ये आवाहन आहे, तसेच स्पष्ट प्रमाण सुद्धा आहे, येणाऱ्या संकटा ची भविष्यवाणी आहे, या कुरआन चा फायदा हजर व गैरहजर तसेच भविष्यात येणाऱ्या सगळयांनाच लाभणार आहे,
म्हणुनच प्रेषितांनी सलामती असो त्यांच्यावर फरमाविले आहे:मला आशा आहे की कयामतच्या दिवसी माझ्या अनुयायांची संख्या संपुर्ण पैगंबरांच्या अनुयाया पेक्षा निश्चीतच जास्त राहणार.
03

Benefits

पैगंबरांच्या चमत्काराचा उल्लेख मिळतो, हा चमत्कार संपुर्ण उम्मत (समुदाया) करिता एकमेव अल्लाह कडुन दया व क्रॄपा आहे.
प्रेषितांचे अल्लाह ची सलामती असो त्यांच्यावर महत्व व उच्चता झळकते.
प्रेषित मुहम्मदांचा सलामती असो त्यांच्यावर उच्च दर्जा व श्रेष्ठत्व सर्व पैगंबरांवर सिद्ध होते.
विद्वानांचे मत ईब्ने हजर रहमतुल्लाह च्यां मते: प्रेषितांचं सलामती असो त्यांच्यावर फरमान "आणी माझ्याकडे साक्षात अल्लाह ने वहि पाठवली" : अर्थात प्रेषित मुहम्मद सलामती असो त्यांच्यावर ला चमत्कार फक्त कुरआन पुरता मर्यादित नाही, किंवा असंही नाही, की ईतर पैगंबरांसारखे चमत्कार मिळाले नाहीत, तर त्याउलट त्याचा अर्थ असा आहे की, कुरआन असा चमत्कार आहे, जो अप्रतिम व महान आहे, जो फक्त आणी फक्त मुहम्मद पैगंबरांनाच सलामती असो त्यांच्यावर देण्यात आला आहे.
ईमाम नववी रहमतुल्लाह च्यां मते: प्रेषितांचे सलामती असो त्यांच्यावर फरमान"(मला आशा आहे की कयामतच्या दिवसी, मी सर्वात जास्त अनुयायीधारक असेल) हे प्रेषितांच्या निशाणी पैकी एक निशाणी आहे, प्रेषितांचं हे भाकित आज हुबेहूब खरे ठरले आहे, कारण प्रेषितांनी सलामती असो त्यांच्यावर हे भाकित केले त्यावेळी मुस्लीमांची संख्या कमी होती, नंतर एकमेव अल्लाह ने मुस्लीमांना बहुसंख्यक बनविले, त्यांच्या मध्ये बरकत प्रदान केली, इथपर्यंत की ईस्लाम सर्वदुर पसरला, मुस्लीमांची संख्या द्विगुणीत झाली, एकमेव अल्लाह ची क्रॄपा.

Attribution

[متفق عليه]

Categories

Share

Share hadeeth

Sharing options · 0 Total shares

Share

← Back to encyclopedia
Shopping Basket

Loading...