افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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निकाह

12 hadeeths in this category
#58100HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने बच्चे को दूध पिलाने के दिनों में, पत्नी से संभोग करने से, मना करने का इरादा कर लिया था, लेकिन रूम तथा फ़ारस वालों को देखा कि वे ऐसा करते हैं और इससे उनके बच्चों को कुछ नुक़सान नहीं होता।

उक्काशा (रज़ियल्लाहु अंहु) की बहन जुज़ामा बिंत वहब (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि मैं कुछ लोगों के साथ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई। उस समय आप कह रहे थेः "मैंने बच्चे को दूध पिलाने के दिनों में पत्नी से संभोग करने से मना करने का इरादा कर लिया था,…

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#58101HadeethEnc[सह़ीह़]

यहूदी कहते हैं कि अज़्ल जीवित दफ़न करने की एक छोटी शक्ल है। आपने कहाः "यहूदी झूठ बोलते हैं। यदि अल्लाह पैदा करना चाहे, तो तुम उसे रोक नहीं सकते।"

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि एक व्यक्ति ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मेरे पास एक दासी है। मैं उससे संभोग करते समय अज़्ल (संभोग के समय वीर्य स्खलन से पहले लिंग को योनि से निकाल लेना) करता हूँ। मैं नहीं चाहता कि वह गर्भवती हो। दरअसल मैं भी वही चाहता हूँ,…

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#58103HadeethEnc[सह़ीह़]

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से पूछा गया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियों) का महर कितना होता था? उन्होंने कहाः आपकी पत्नियों के लिए आपका महर बारह ऊक़िया और एक नश्श (आधा ऊक़िया) था।

अबू सलमा बिन अब्दुर रहमान कहते हैंः मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पत्नी आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) से पूछा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नियों) का महर कितना होता था? उन्होंने कहाः आपकी पत्नियों के लिए आपका महर बारह ऊक़िया और एक नश्श था। उन्हों…

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#58104HadeethEnc[सह़ीह़]

अली (रज़ियललाहु अंहु) ने कहाः मैंने फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अंहा) से शादी की और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे उनके साथ शादीशुदा जीवन आरंभ करने दें। तो आपने कहाः "उसे कुछ दो।" मैंने कहाः मेरे पास कुछ नहीं है। आपने कहाः "तुम्हारा वह हुतमी कवच कहाँ है?"

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि अली (रज़ियललाहु अंहु) ने कहाः मैंने फ़ातिमा (रज़ियल्लाहु अंहा) से शादी की और कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे उनके साथ शादीशुदा जीवन आरंभ करने दें। तो आपने कहाः "उसे कुछ दो।" मैंने कहाः मेरे पास कुछ नहीं है। आपने कहाः…

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#58106HadeethEnc[सह़ीह़]

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक व्यक्ति का मामला आया, जिसने एक औरत से शादी की, किन्तु उसका महर निर्धारित नहीं किया और उससे संभोग करने से पहले ही मर गया। इसपर अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः लोगों से पूछो कि क्या उनके पास इस संबंध में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की कोई हदीस है? लोगों ने कहाः ऐ अबू अब्दुर रहमान, हमें इसके बारे में कोई हदीस नहीं मिलती। यह सुन उन्होंने कहाः मैं अपनी राय से कहूँगा। यदि सही हुआ तो अल्लाह की ओर से उसकी तौफीक़ के कारण है।

अलक़मा तथा असवद कहते हैं कि अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक व्यक्ति का मामला आया, जिसने एक औरत से शादी की, किन्तु उसका महर निर्धारित नहीं किया और उससे संभोग करने से पहले ही मर गया। इसपर अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) ने कहाः लोगों से पूछो कि क्या उनके पा…

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#58110HadeethEnc[सह़ीह़]

सबसे अच्छा निकाह वह है, जो सबसे आसान हो।

उक़बा बिन आमिर (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "सबसे अच्छा निकाह वह है, जो सबसे आसान हो।" तथा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति से कहाः "क्या तुम्हें यह पसंद होगा कि मैं अमुक स्त्री से तुम्हारा निकाह कर दूँ…

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#58116HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी एक पत्नी का वलीमा दो मुद्द जौ से किया था।

सफिया बिन्त शैबा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है, वह कहती हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपनी ए…

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#58117HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मदीने और ख़ैबर के बीच तीन दिन रुके और वहीं सफ़िया (रज़ियल्लाहु अंहा) से (शादी के बाद) वैवाहिक संबंध स्थापित किया। मैंने मुसलमानों को आपके वलीमे के लिए बुलाया, तो उसमें न रोटी थ…

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#58126HadeethEnc[सह़ीह़]

सुन्नत यह है कि जब आदमी पत्नी रहते हुए किसी कुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास सात दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए तथा जब किसी ग़ैरकुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास तीन दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैंः सुन्नत यह है कि जब आदमी पत्नी रहते हुए किसी कुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास सात दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए तथा जब किसी ग़ैरकुँवारी से विवाह करे, तो उसके पास तीन दिन रहे और उसके बाद बारी लगाए। अबू क़िलाबा कहते हैंः यदि मैं…

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#58127HadeethEnc[सह़ीह़]

तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा, तो शेष स्त्रियों के पास भी सात दिन रहूँगा।

उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने जब उनसे निकाह किया, तो उनके पास तीन दिन रहे और फ़रमायाः "तुम्हारे पति के निकट तुम्हारे मान-सम्मान में कोई कमी नहीं है। यदि तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे पास सात दिन रहूँगा। और अगर तुम्हार…

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#58128HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बारी का दिन बाँटते समय आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) को दो दिन दिया करते थे। उनका दिन और सौदा (रज़ियल्लाहु अंहा) का दिन।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैंः मैंने सौदा (रज़ियल्लाहु अंहा) के अतिरिक्त किसी स्त्री को नहीं देखा, जिनके स्थान पर मुझे ख़ुद होना सबसे अधिक पसंद हो। वह एक मज़बूत दिल व दिमाग़ की मालिक स्त्री थीं। आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि जब वह बूढ़ी हो गईं, तो उन्होंने अल्ल…

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