Prophetic Hadeeth Encyclopedia
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फ़ज़ीलतें तथा आदाब
निश्चित रूप से तुम अपने धन में सब लोगों को शामिल नहीं कर सकते, लेकिन तुम्हारे हँसते चेहरे और अच्छे व्यवहार के दायरे में सबको आ जाना चाहिए।
“यदि ऐसा करना ज़रूरी हो, तो रास्ते को उसका हक़ दो।" लोगों ने पूछाः उसका हक़ क्या है? आपने फ़रमायाः "नज़र नीचे रखना, कष्टदायक वस्तुओं को रास्ते से हटाना, सलाम का उत्तर देना, भलाई का आदेश देना तथा बुराई से रोकना।”
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "तुम लोग रास्तों में बैठने से बचो।" लोगों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, हमें तो बैठना ही पड़ता है। (वहाँ बैठकर) हम बात-चीत करते हैं। आपने फ़रमायाः “यदि ऐसा करना ज़रूरी हो, तो रास्त…
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सर्वाधिक जो दुआ करते थे वह यह है : “हे अल्लाह, हमारे रब, हमें दुनिया में भी अच्छी दशा प्रदान कर और आख़िरत में भी अच्छी दशा प्रदान कर और हमें जहन्नम की यातना से बचा ले।”
“सय्यदुल इस्तिग़फार (सर्वश्रेष्ठ क्षमायाचना)
शद्दाद बिन औस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “सय्यदुल इस्तिग़फार (सर्वश्रेष्ठ क्षमायाचना) यह है कि बंदा इस प्रकार कहे : ऐ अल्लाह, तू ही मेरा रब है। तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। तू ने ही मेरी रचना की है और मैं तेर…
“सच्चाई को मज़बूती से थाम लो, क्योंकि सच्चाई नेकी (सुकर्म) की राह दिखाती है और नेकी जन्नत की ओर ले जाती है।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : “सच्चाई को मज़बूती से थाम लो, क्योंकि सच्चाई नेकी (सुकर्म) की राह दिखाती है और नेकी जन्नत की ओर ले जाती है। आदमी सर्वदा सत्य बोलता है तथा सत्य की खोज…
दो शब्द रहमान (अल्लाह) को बड़े प्रिय हैं
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : दो शब्द रहमान (अल्लाह) को बड़े प्रिय हैं, ज़ुबान पर बड़े हलके हैं और तराज़ू में बड़े भारी होंगे : सुबहानल्लाहिल अज़ीम, सुबहानल्लाहि व बिहम्दिहि (अल्लाह पाक है अपनी प्रशंसा…
मैंने तुम्हारे पास से जाने के बाद चार शब्द तीन बार कहे हैं। यदि उन्हें आज तुमने जो अज़कार पढ़े हैं, उनसे तौला जाए, तो वे चार शब्द भारी साबित होंगे।
मुसलमानों की माता जुवैरिया -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि : वह नमाज़ पढ़ने के बाद उसी जगह बैठी थीं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उनके पास से सुबह के समय फ़ज्र की नमाज़ पढ़ने के बाद निकले। फिर सूरज ऊपर चढ़ जाने के बाद लौटे, तो वह उसी जगह बैठी थीं। यह देख आपने कहा…
“अल्लाह के निकट दुआ से अधिक सम्मानित कोई चीज नहीं है।”
आदम की संतान ने कोई ऐसा कार्य नहीं किया, जो उसे अल्लाह के ज़िक्र की तुलना में अल्लाह के अज़ाब से अधिक बचाने वाला हो।
जो लोग किसी सभा में बैठते हैं और वहाँ अल्लाह को याद नहीं करते तथा अपने नबी पर दरूद नहीं भेजते, तो उनका वह बैठना उनके लिए पछतावे का कारण बनेगा। अब यदि अल्लाह चाहेगा, तो उन्हें यातना देगा और चाहेगा तो माफ़ करेगा।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जो लोग किसी सभा में बैठते हैं और वहाँ अल्लाह को याद नहीं करते तथा अपने नबी पर दरूद नहीं भेजते, तो उनका वह बैठना उनके लिए पछतावे का कारण बनेगा। अब यदि अल्लाह चाहेगा, तो…

