افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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मस्जिदों के आदाब

12 hadeeths in this category
#8952HadeethEnc[सह़ीह़]

यदि तुम दोंनों इसी शहर के होते तो मैं तुम्हें कष्ट देता, तुम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मस्जिद में आवाज़ ऊँची करते हो

साइब बिन यज़ीद (रजियल्लाहु अनहु), जो एक सहाबी थे, कहते हैं कि मैं मस्जिद-ए- नबवी में था। इतने में एक व्यक्ति नें मुझे कंकड़ मारा। मैंने देखा तो वह उमर बिन खत्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) हैं। उन्होंने मुझ से फ़रमाया: इन दोनों को मेरे पास ले आओ, तो मैं उन्हें लेकर आया। आपने उन…

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#10885HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने महल्लों में मस्जिदें बनाने तथा उन्हें पवित्र एवं स्वच्छ और सुगंधित रखने का आदेश दिया है।

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने महल्लों में मस्जिदे…

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#10887HadeethEnc[स़ह़ीह़]

वे ऐसे लोग हैं कि उन लोगों के अंदर जब कोई सदाचारी बंदा अथवा सदाचारी व्यक्ति मर जाता, तो उसकी कब्र के ऊपर मस्जिद बना लेते

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि उम्म-ए-सलमा रज़ियल्लाहु अनहा ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास हबशा (इथियोपिया) में देखे हुए मारिया नामी एक गिरजाघर और उसके चित्रों का वर्णन किया, तो आपने कहा : "वे ऐसे लोग हैं कि उन लोगों के अंदर जब…

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#10888HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर कुछ सवार भेजे, जो बनू हनीफ़ा के एक आदमी को पकड़ लाए। उस आदमी का नाम सुमामा बिन उसाल था। लोगों ने उसे मस्जिद के एक खंबे से बाँध दिया।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्द की ओर कुछ सवार भेजे, जो बनू हनीफ़ा के एक आदमी को पकड़ लाए। उस आदमी का नाम सुमामा बिन उसाल था। लोगों ने उसे मस्जिद के एक खंबे से बाँध दिया। फिर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसके पास त…

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#10889HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं आपको अल्लाह की क़सम देकर पूछता हूँ, क्या आपने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुना है कि : "ऐ हस्सान! मेरी ओर से उत्तर दो! ऐ अल्लाह! पवित्र आत्मा (जिबरील) के द्वारा तू इसकी सहायता कर।?" तो उन्होंने उत्तर दिया : मैं अल्लाह को गवाह बनाकर कहता हूँ कि हाँ, आपने ऐसा कहा था।

अबू हुरैरा से वर्णित है कि उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) हस्सान (रज़ियल्लाहु अन्हु) के निकट से गुज़रे, जो मस्जिद में शेर पढ़ रहे थे, तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उन्हें घूरकर देखा। इसपर उन्होंने कहा : मैं मस्जिद के अंदर उनकी उपस्थिति में भी शेर पढ़ता था, जो आपसे उत्तम थे। फि…

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#10890HadeethEnc[सह़ीह़]

जो किसी व्यक्ति को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते हुए सुने, तो कहे : अल्लाह उसको तुम्हें वापस न लौटाए। क्योंकि मस्जिदें इसके लिए नहीं बनी हैं।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया : “जो किसी व्यक्ति को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते हुए सुने, तो कहे : अल्लाह उसको तुम्हें वापस न लौटाए। क्योंकि मस्जिदें इसके लिए नहीं बनी ह…

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#10891HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : जब किसी व्यक्ति को मस्जिद में क्रय-विक्रय करते हुए देखो, तो कहो : अल्लाह तुम्हारे व्यापार में लाभ न दे। और जब किसी को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते देखो, तो कहो : अल्लाह उसे तुम्हें वापस न करे।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब किसी व्यक्ति को मस्जिद में क्रय-विक्रय करते हुए देखो, तो कहो : अल्लाह तुम्हारे व्यापार में लाभ न दे। और जब किसी को मस्जिद में खोए हुए सामान को खोजने का ऐलान करते देखो,…

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#10892HadeethEnc[ह़सन]

मस्जिदों में न तो हद लागू की जाएगी और उनके अंदर क़िसास लिया जाएगा।

हकीम बिन हिज़ाम (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "मस्जिदों…

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#10893HadeethEnc[सह़ीह़]

ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके लिए मस्जिद में एक ख़ेम लगा दिया था, ताकि निकट से उनकी देखभाल कर सकें।

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है कि ख़ंदक़ के दिन साद (रज़ियल्लाहु अंहु) जख़्मी हो गए थे। उनको क़ुरैश की बनू मईस बिन आमिर बिन लुऐ शाखा के हिब्बान बिन क़ैस नामी एक व्यक्ति ने, जिसे हिब्बान बिन अरिक़ा कहा जाता था, उनके बाज़ू की रग में तीर मार दिया था। चुनांचे नबी (सल…

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#10894HadeethEnc[सह़ीह़]

"जाने भी दो अबू बक्र! ये ईद के दिन हैं।" मालूम रहे कि वे मिना के दिन थे।

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है कि मिना के दिनों में अबू बक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु) उनके पास आए। उस समय उनके यहाँ दो लड़कियाँ डफ़ बजा रही थीं तथा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपने शरीर को एक कपड़े से ढाँपकर लेटे हुए थे। अबू बक्र ने उन दोनों को डाँटा, तो आपने चेहरे…

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#10895HadeethEnc[सह़ीह़]

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं : वह मेरे पास आकर बातें किया करती थी और जब भी मेरे पास आती, यह शेर ज़रूर पढ़ती। कमरबंद का दिन अल्लाह की अजीब क़ुदरतों में से है। उसने मुझे कुफ़्र के देश से मुक्ति प्रदान की।

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से वर्णित है, वह कहती हैं कि अरब के किसी क़बीले के पास एक काली-कलौटी दासी थी, जिसे उन्होंने आज़ाद कर दिया था, मगर वह उनके साथ ही रहती थी। वह कहती है कि एक बार उस क़बीले की एक बच्ची बाहर निकली। उसपर लाल तसमों का एक कमरबंद था, जिसे उसने उतारकर रख…

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