افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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मासूर दुआएँ

12 hadeeths in this category
#5488HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तेरी नेमत के छिन के जाने, (विपत्ति में) तेरी प्रदान की हुई सुरक्षा के बदल जाने, तेरी अचानक आपदा तथा तेरे हर प्रकार के क्रोध से तेरी शरण चाहता हूँ।

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो दुआएँ किया करते थे, उनमें से एक यह है : "ऐ अल्लाह! मैं तेरी नेमत के छिन के जाने, (विपत्ति में) तेरी प्रदान की हुई सुरक्षा के बदल जाने, तेरी अचानक आपदा तथा तेरे ह…

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#5489HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ क़र्ज़ के बोझ तथा शत्रुओं के हावी होने और दुश्मनों के हँसने से।

अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इ…

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#5502HadeethEnc[स़ह़ीह़]

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सर्वाधिक जो दुआ करते थे वह यह है : “हे अल्लाह, हमारे रब, हमें दुनिया में भी अच्छी दशा प्रदान कर और आख़िरत में भी अच्छी दशा प्रदान कर और हमें जहन्नम की यातना से बचा ले।”

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#5878HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह, मैं तेरी शरण माँगता हूँ, विवशता तथा सुस्ती से, कंजूसी और बुढ़ापे से एवं क़ब्र की यातना से।

ज़ैद बिन अरक़म -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, मैं तेरी शरण माँगता हूँ, विवशता तथा सुस्ती से, कंजूसी और बुढ़ापे से एवं क़ब्र की यातना से। ऐ अल्लाह, मुझे तक़वा प्रदान करो और पवित्र कर दे। तू ही मुझे सबसे बे…

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#5884HadeethEnc[ह़सन]

क्या मैं तुम्हें कुछ शब्द न सिखा दूँ, जो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुझे सिखाए थे कि यदि तुम्हारे ऊपर पहाड़ के बराबर भी क़र्ज़ हो, तो उसे अल्लाह अदा कर दे? तुम कहोः ऐ अल्लाह, मुझे हलाल देकर हराम से बचा ले और मुझे अपने अनुग्रह से अपने सिवा दूसरों से बेनियाज़ कर दे।

अली -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि उनके पास एक दास आया, जिसका अपने मालिक से यह उनुबंध था कि वह उसे क़िस्तवार कुछ धन देकर ख़ुद को मुक्त कर लेगा। वह कहने लगा कि मैं निर्धारित धनराशि अदा करने से विवश हो चुका हूँ। अतः आप मेरी सहायता करें। यह सुन अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने…

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#5914HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ विवशता, सुस्ती, कायरता, अधिक बुढ़ापे और कंजूसी से। तेरी शरण में आता हूँ क़ब्र के अज़ाब से तथा तेरी शरण में आता हूँ जीवन और मृत्यु के फ़ितने से।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कहा करते थेः ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण में आता हूँ विवशता, सुस्ती, कायरता, अधिक बुढ़ापे और कंजूसी से। तेरी शरण में आता हूँ क़ब्र के अज़ाब से तथा तेरी शरण में आता हूँ जीवन और मृत्यु के फ़…

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#5915HadeethEnc[स़ह़ीह़]

कहो : ऐ अल्लाह! मेरा मार्गदर्शन कर और मुझे सही रास्ते पर चला। "الْهُدَى" शब्द ज़बान पर लाते समय अपने रास्ता पा लेने को याद कर लिया करो और "السَّدَاد" शब्द ज़बान पर लाते समय तीर को सीधे निशाने पर लगाने को याद कर लिया करो।

अली रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "कहो : ऐ अल्लाह! मेरा मार्गदर्शन कर और मुझे सही रास्ते पर चला। "الْهُدَى" शब्द ज़बान पर लाते समय अपने रास्ता पा लेने को याद कर लिया करो और "السَّدَاد" शब्द ज़बान पर ला…

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#6003HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सफ़र में निकलते समय अपने ऊँट पर ठीक से बैठ जाते तो तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहते और फिर फ़रमातेः «سبحان الذي سخَّر لنا هذا وما كنا له مُقْرِنِينَ وإنا إلى ربنا لـمُنْقَلِبُون» "पाक है वह हस्ती, जिसने इस जानवर को हमारे वश में कर दिया, अन्यथा हम उसे अपने क़ाबू में करने में सक्षम नहीं थे तथा निश्चय ही हम अपने रब की ओर लौटकर जाने वाले हैं।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सफ़र में निकलते समय अपने ऊँट पर ठीक से बैठ जाते तो तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहते और फिर फ़रमातेः «سبحان الذي سخَّر لنا هذا وما كُنَّا له مُقْرِنِينَ وإنَّا إلى ربِّنا لـمُن…

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#6040HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह से, आज़माइश की कठिनाई, दुर्भाग्य का शिकार होने, तक़दीर के अप्रिय निर्णय और कठिनाई में देखकर शत्रुओं के खुश होने से अल्लाह की शरण माँगा करो।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से वर्णन करते हैं कि आपने फ़रमायाः अल्लाह से आज़माइश की कठिनाई, दुर्भाग्य का शिकार होने, तक़दीर के अप्रिय निर्णय और कठिनाई में देखकर शत्रुओं के खुश होने से अल्लाह की शरण माँगा करो। एक रिवायत में है क…

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