افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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स्त्रियों से संबंधित अहकाम

12 hadeeths in this category
#6220HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) घर में क्या करते थे? उन्होंने कहा कि आप अपने घर वालों की सेवा में लगे रहते और जब नमाज़ का समय आता, तो नमाज़ के लिए चले जाते

असवद बिन यज़ीद कहते हैं कि आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) से प्रश्न किया गया कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि…

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#6612HadeethEnc[सह़ीह़]

अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- का एक पुत्र बीमार था। अबू तलहा कहीं बाहर गए, तो उसकी मृत्यू हो गई।

अनस -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- का एक पुत्र बीमार था। अबू तलहा कहीं बाहर गए, तो उसकी मृत्यू हो गई। जब वह लौटकर आए, तो कहा : मेरे बेटे का क्या हुआ? बच्चे की माँ उम्मे सुलैम ने कहा : वह पहले से अधिक आराम में है। फिर उन्होंने उनके…

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#6983HadeethEnc[सह़ीह़]

न दी हुई चीज़ को ज़ाहिर करने वाला ऐसा है, जैसे किसी ने झूठ का जोड़ा पहन रखा हो।

असमा -रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि एक औरत ने रसूलुल्लाह -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मेरी एक सौतन है। अगर मैं उसका दिल जलाने के लिए उसके सामने किसी चीज़ के मिलने का इज़हार करूँ, जो मेरे पति ने मुझे नहीं दी है, तो क्या मुझे गुनाह होगा? तो र…

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#8871HadeethEnc[सह़ीह़]

तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं

अबू सईद खु़दरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई और उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मर्द लोग आपकी हदीस लेकर चले गए। इसलिए आप हमारे लिए भी एक दिन निर्धारित कर दें, जिसमें हम उपस्थित हों और आप हमें वह चीज़ सिखाएँ ज…

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#10011HadeethEnc[स़ह़ीह़]

ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक देखी है।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा क्यों है? आपने उत्तर दिया : "तुम लानत अधिक करती हो और पति की नाशुक्री करती हो। मैंने विवेक एवं दीन में अधूरी होने के बावजूद तुम (औरतों) से ज़्यादा किसी को भी एक विवेकशील व्यक्ति के विवेक को भ्रमित कर देने वाला नहीं देखा।

अबू सईद खु़दरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ईद अल-अज़हा या ईद अल-फ़ित्र के दिन ईदगाह की ओर निकले और इस दौरान औरतों के निकट से गुज़रे, तो फ़रमाया : "ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक…

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#10566HadeethEnc[सह़ीह़]

उसकी क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, जब भी शैतान तुम्हें (ऐ उमर!) किसी रास्ते पर चलता हुआ देखता है, तो तुम्हारा रास्ता छोड़ कर कोई और रास्ता अपना लेता है

साद बिन अबू वक़्क़ास (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि उमर (रज़ियल्लाहु अनहु) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आने की अनुमति माँगी। उस समय आपके पास क़ुरैश की कुछ स्त्रियाँ मौजूद थीं, जो आपसे ज़ोर- ज़ोर से बातें कर रही थीं और आपसे अधिक (तवज्जो अथवा नान- न…

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#10603HadeethEnc[स़ह़ीह़]

कोई स्त्री दो दिन की दूरी के सफर पर उस समय तक न निकले, जब तक उसके साथ उसका पति या कोई महरम (ऐसा रिश्तेदार जिसके साथ कभी शादी न हो सकती हो) न हो

अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, जो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ बारह धर्मयुद्धों में शामिल हुए थे, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से चार बातें सुनी हैं, जो मुझे बड़ी अच्छी लगती हैं। आपने फ़रमाया है : "कोई स्त्र…

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#10652HadeethEnc[सह़ीह़]

तसबीह (सुबहान अल्लाह कहना) पुरुषों के लिए है और ताली बजाना स्त्रियों कि लिए।

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “तसबीह (सुबहान…

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#58098HadeethEnc[सह़ीह़]

जब कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को अपने बिस्तर पर बुलाए और उसके इनकार करने पर वह नाराज़ होकर रात गुज़ारे, तो फ़रिश्ते सुबह तक उसपर लानत करते रहते हैं।

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#58132HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे साथ लेकर यात्रा में निकलते।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का वर्णन है, वह कहती हैं कि जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी यात्रा में निकलने का इरादा करते, तो अपनी पत्नियों के बीच क़ुरआ अंदाज़ी करते और जिसका नाम निकलता उसे साथ लेकर यात्रा में निकलते। एक युद्ध में क़ुरआ अंदाज़ी की, तो मेरा न…

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#58158HadeethEnc[सह़ीह़]

एक व्यक्ति ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहाः मेरी पत्नी यदि कोई उसे छूना चाहे, तो आपत्ति नहीं करती (अर्थात: वह पुरुषों के साथ बात-चीत करने से नहीं बचती है, न उनसे टीक से परदा करती है, चुनांचे वह उससे मुसाफहा करलेते हैं या उसे छूलेते हैं, तो इसकी परवाह नही करती है)। आपने कहाः "उसे तलाक़ देकर अलग कर दो।" उसने कहाः मुझे भय है कि कहीं मेरा दिल उसमें अटका न रहे। फ़रमायाः "तब उससे लाभ उठाते रहो।"

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) का वर्णन है, वह कहते हैं कि एक व्यक्ति ने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहाः मेरी पत्नी यदि कोई उसे छूना चाहे, तो आपत्ति नहीं करती (अर्थात: वह पुरुषों के साथ बात-चीत करने से नहीं बचती है, न उनसे ठीक से परदा करती है,…

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#58172HadeethEnc[सह़ीह़]

कोई व्यक्ति किसी शादीशुदा स्त्री के पास हरगिज़ रात न बिताए। हाँ, यह और बात है कि वह उसकी पत्नी हो या उसकी कोई ऐसी रिश्तेदार हो, जिससे हमेशा के लिए निकाह जायज़ नहीं है।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "कोई व्यक्ति किसी शादीशुदा स्त्री के पास हरगिज़ रात न बिताए। हाँ, यह और बात है कि वह उसकी पत्नी हो या उसकी कोई ऐसी रिश्तेदार हो, जिससे हमेशा के लिे…

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