افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की विशेषताएँ

12 hadeeths in this category
#6038HadeethEnc[सह़ीह़]

क्या तुम समझते हो कि मैंने तुम्हारा ऊँट लेने के लिए उसका मूल्य कम लगाया है? तुम अपना ऊँट और अपने दिर्हम ले लो। सब तुम्हारा है।

जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि वह एक ऊँट पर सवार होकर चल रहे थे कि ऊँट थक गया और उन्होंने उसे छोड़ देने का मन बना लिया। परन्तु, इसी बीच अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुझसे आ मिले और मेरे लिए दुआ की तथा उस ऊँट को मारा। सो, वह ऐसे चलने लग…

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#6222HadeethEnc[इसकी सनद ह़सन है]

जब कोई बंदा मुझपर सलाम पढ़ता है, अल्लाह मुझे मेरी आत्मा लौटा देता है, ताकि मैं उसे सलाम का उत्तर दे दूँ।

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब कोई…

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#6613HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आवाज़ दुर्बल सुनी है, जिससे महसूस हो रहा है कि आप भूखे हैं। क्या तुम्हारे पास कुछ है?

अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि अबू तलहा –रज़ियल्लाहु अनहु- ने उम्मे सुलैम –रज़ियल्लाहु अनहा- से कहा : मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की आवाज़ दुर्बल सुनी है, जिससे महसूस हो रहा है कि आप भूखे हैं। क्या तुम्हारे पास कुछ है? उन्होंने कहा : हाँ! फिर उन्…

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#8298HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में चाँद के दो टुकड़े हुए, तो पहाड़ ने एक टुकड़े को परदे में कर दिया और दूसरा टुकड़ा पहा़ड़ के ऊपर था। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “ऐ अल्लाह! तू गवाह रह!”

अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मरफ़ूअन रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में चाँद के दो टुकड़े हुए, तो पहाड़ ने एक टुकड़े को परदे में कर दिया और दूसरा टुकड़ा पहा़ड़ के ऊपर था। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ…

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#8308HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह से भय करो और अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि ज़ैद बिन हारिसा (रज़ियल्लाहु अन्हु) शिकायत लेकर आए, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “अल्लाह से भय करो और अपनी पत्नी को अपने पास रोके रखो।” अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि यदि अल्लाह के रसू…

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#8367HadeethEnc[सह़ीह़]

हम लोग एक सफर में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। हम रात भर चलते रहे, यहाँ तक कि रात का अंतिम पहर हुआ, तो कुछ देर के लिए सो गए। वैसे भी, मुसाफिर के लिए सोने से उत्तम कोई वस्तु नहीं होती। हम सोए रहे, यहाँ तक कि सूरज की गरमी से ही जागे। सबसे पहले जागने वाले व्यक्ति अमुक, फिर अमुक, फिर अमुक, फिर उमर बन खत्ताब थे।

इमरान बिन हुसैन -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि हम लोग एक सफर में नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ थे। हम रात भर चलते रहे, यहाँ तक कि रात का अंतिम पहर हुआ, तो कुछ देर के लिए सो गए। वैसे भी, मुसाफिर के लिए सोने से उत्तम कोई वस्तु नहीं होती। ह…

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#10558HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर वह मेरे निकट आता, तो फ़रिश्ते उसकी बोटी- बोटी उचक लेते

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अबू जह्ल ने कहा: क्या मुहम्मद तुम्हारे सामने ज़मीन पर अपना चेहरा रखता है? वर्णनकर्ता का कहना है कि उससे कहा गया: हाँ। इसपर उसने कहा: लात तथा उज़्ज़ा की क़सम! यदि मैंने उसे ऐसा करते देखा, तो उसकी गर्दन पर पाँव रख दूँगा या उसके…

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#10953HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अम्र बिन मुआज़ के पाँव पर, उसके काटे जाने के समय ,थूका, तो वह ठीक हो गए।

बुरैदा-रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अम्र बिन मुआज़ के पाँ…

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#10955HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपना हाथ मेरे मुख पर फेरा तथा मेरे लिए दुआ की, तो वह एक सौ बीस साल तक जीवित रहे और उन के सिर में केवल कुछ ही बाल सफेद थे।

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#10956HadeethEnc[ह़सन]

मुझे कभी आँख आई (नेत्र-शोथ हुई) और न ही कभी सिर में दर्द हुआ जब से अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे चेहरे को पोंछा था, और मेरी आँखों में थुका था (और ऐसा) ख़ैबर के दिन (हुआ था) जब आप ने मुझे झंडा दिया था।

अली बिन अबू तालिब- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है वह कहते हैंः मुझे कभी आँख आई (नेत्र-शोथ हुई) और न ही कभी सिर में दर्द हुआ जब से अल्लाह के रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मेरे चेहरे को पोंछा था, और मेरी आँखों में थुका था (और ऐसा) ख़ैबर के दिन (हुआ था) जब आप ने मुझ…

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#10958HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं क़तादा बिन मिलह़ान के पास उनकी मृत्यु के समय था उसी समय उनके घर के काफी दूर से एक व्यक्ति गुजरा, तो मैंने उस व्यक्ति के गुजरने को क़तादा के चेहरे में देखा,जब मैंने उनको देखा तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उन के मुख पर तेल मल दिया गया हो।

अबुल अला बिन उमैर- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं क़तादा बिन मिलह़ान के पास उनकी मृत्यु के समय था उसी समय उनके घर के काफी दूर से एक व्यक्ति गुजरा, तो मैंने उस व्यक्ति के गुजरने को क़तादा के चेहरे में देखा, जब मैंने उनको देखा तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उनके मुख पर तेल मल…

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