افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
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हज तथा उमरा के अहकाम एवं मसायल

12 hadeeths in this category
#2750HadeethEnc[सह़ीह़]

मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हज कराया गया, जबकि उस समय मेरी आयु सात साल थी।

साइब बिन यज़ीद- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि मुझे हज्जतुल वदा के अवसर पर अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु…

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#2755HadeethEnc[सह़ीह़]

उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने पालनहार की अनुकंपा तलाश करो।)

अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि उकाज़, मजिन्ना और ज़ुल-मजाज़ जाहिलियत काल के बाज़ार थे। पर सहाबा ने हज के दिनों में व्यापार करने को पाप समझा, तो यह आयत उतरीः "ليس عليكم جناح أن تبتغوا فضلاً من ربكم" (अर्थातः तुमपर इसमें कोई गुनाह नहीं है कि अपने…

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#3020HadeethEnc[सह़ीह़]

जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने सहाबियों को आदेश दिया कि शुरू के तीन चक्करों में दुलकी चाल से चलें, किंतु काबा के यमनी रुक्न और हजर-ए- असवद वाले रुक्न के बीच साधारण चाल से चलें

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैंः जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके साथी मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार ने दुर्बल बना दिया है! यह सुनकर अल्लाह के नबी (सल्ल…

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#3022HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले

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#3024HadeethEnc[स़ह़ीह़]

मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।

उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से वर्णित है कि वह हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फ़रमाया : मैं अच्छी तरह जानता हू…

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#3025HadeethEnc[सह़ीह़]

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्जतुल वदा के अवसर पर ऊँट पर सवार होकर तवाफ़ किया। आप मुड़े हुए किनारे वाली छड़ी से हजरे असवद को छू रहे थे।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से रिवायत है, कहते हैंः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हज्…

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#3034HadeethEnc[सह़ीह़]

ऐ लोगो, शांति बनाए रखो, क्योंकि नेकी तेज़ चलने ही से नहीं मिलती।

अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अरफ़ा के दिन वहाँ से मुज़दलिफ़ा की ओर चले, तो अपने पीछे ऊँट को बहुत ज़्यादा डाँटने, मारने तथा ऊँट के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुनी। यह देख, अपने कोड़े से उनकी ओर इशारा किया और फ़रमायाः…

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#3040HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (मदीने से) अल-शजरा के रास्ते से निकलते और अल-मुअर्रस के रास्ते से अंदर आते। और जब मक्का में प्रवेश करते, तो ऊँची घाटी से प्रवेश करते और निचली घाटी से निकलते।

अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) फ़रमाते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) (मदीने…

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#3052HadeethEnc[सह़ीह़]

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिना आए, तो जमरा पहुँचकर कंकड़ी मारी, फिर मिना में अपने ठहरने के स्थान पर आए और क़ुरबानी की तथा सर के बाल मूँड़ने वाले से कहाः "सर के बाल मूँड़ दो।" साथ ही आपने पहले सर के दाएँ भाग की ओर इशारा किया और फिर बाएँ भाग की ओर इशारा किया। फिर मुँड़े हुए बाल लोगों को देने लगे।

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मिना आए, तो जमरा पहुँचकर कंकड़ी मारी, फिर मिना में अपने ठहरने के स्थान पर आए और क़ुरबानी की तथा सर के बाल मूँड़ने वाले से कहाः "सर के बाल मूँड़ दो।" साथ ही आपने पहले सर के दाएँ भाग की…

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#3067HadeethEnc[सह़ीह़]

'तमत्तो' (अर्थात हज के अवसर पर उमरा करके एहराम खोल देने और नए सिरे से एहराम बाँधकर हज करने) की आयत उतरी और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें उसपर अमल करने का आदेश भी दिया। बाद में कोई ऐसी आयत नहीं उतरी, जो इस आयत के आदेश को निरस्त करती हो तथा रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने जीवन काल में कभी इससे मना नहीं किया।

इमरान बिन हुसैन (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैंः अल्लाह की किताब में 'तमत्तो' की आयत उतरी और हमने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ उसपर अमल भी किया। न तो कुरआन की कोई आयत उतरी है, जो उसे हराम बताए और न रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने जीवनकाल में उस…

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