افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
Islamic Reads · HadeethEnc

Prophetic Hadeeth Encyclopedia

Search and read verified Prophetic hadeeth translations, explanations, benefits, categories and source attribution.

Content source:HadeethEnc.com·Version 1.58.0
2,313hadeeths
Advanced search

Search the Hadeeth Encyclopedia

Smart instant results tolerate minor spelling mistakes, with every filter in one place.

15hadeeths
Clear filters
Categories

नमाज़ की सुन्नतें

12 hadeeths in this category
#3097HadeethEnc[सह़ीह़]

अगर नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम हो।

अबू जुहैम बिन हारिस बिन सिम्मा अंसारी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः " यदी नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम ह…

Read hadeeth
Share
#3098HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुम में से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। अगर वह न रुके, तो उससे लड़ाई करे, इसलिए कि वह शैतान है।

अबू सईद ख़ुदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः…

Read hadeeth
Share
#3106HadeethEnc[सह़ीह़]

जब गर्मी अधिक तेज़ हो, तो ज़ुहर की नमाज़ ज़रा ठंड पड़ने पर पढ़ा करो, क्योंकि गर्मी की भीषणता जहन्नम की लपट का एक भाग है।

अब्दुल्लाह बिन उमर, अबू हुरैरा और अबूज़र- रज़ियल्लाहु अम्हुम- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु…

Read hadeeth
Share
#3112HadeethEnc[सह़ीह़]

मैं ने अनस बिन मालिक- रज़ियल्लाहु अन्हु- से पूछाः क्या अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने दोनों जूतों समेत नमाज़ पढ़ते थे? उन्होंने कहाः हाँ।

Read hadeeth
Share
#3175HadeethEnc[सह़ीह़]

मैंने मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की नमाज़ को ध्यान से देखा, तो पाया कि आपका क़याम, रुकू, रुकू के बाद सीधे खड़ा होना, सजदा, दो सजदों के बीच बैठना, उसके बाद का सजदा और सलाम एवं नमाज़ के स्थान से निकलने के बीच का अंतराल, यह सब लगभग बराबर होते थे।

बरा बिन आज़िब- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- कहते हैं कि मैंने मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की नमाज़ को ध्यान से देखा, तो पाया कि आपका क़याम, रुकू, रुकू के बाद सीधे खड़ा होना, सजदा, दो सजदों के बीच बैठना, उसके बाद का सजदा और सलाम एवं नमाज़ के स्थान से निकलने के बीच का अंतर…

Read hadeeth
Share
#7191HadeethEnc[सह़ीह़]

यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम होगा। अबू नज़्र कहते हैं : मुझे नहीं पता कि आपने चालीस दिन फ़रमाया है अथवा महीना अथवा साल।

अबू जुहैम बिन हारिस बिन सिम्मा अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "यदि नमाज़ी के सामने से गुज़रने वाला जान ले कि उसपर कितना गुनाह है, तो नमाज़ी के सामने से गुज़रने की तुलना में, चालीस तक ठहरे रहना उसके लिए उत्तम होगा।"…

Read hadeeth
Share
#10868HadeethEnc[सह़ीह़]

हम लोग नमाज़ पढ़ते और हमारे आगे से पशु गुजरते रहते। हमने इसका उल्लेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपने फरमयाः "कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु अपने सामने रख लो, तो सामने से गुज़रने वाली कोई चीज़ तुम्हें नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।

तलहा बिन उबैदुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं : हम लोग नमाज़ पढ़ते और हमारे आगे से पशु गुजरते रहते। हमने इसका उल्लेख अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से किया, तो आपने फ़रमयाः "कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु अपने सामने रख लो, त…

Read hadeeth
Share
#10869HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से कोई नमाज़ पढ़े, तो अपनी नमाज़ के लिए कोई ओ़ट बना ले, चाहे वह एक तीर ही क्यों न हो।

सबरा बिन माबद जुहनी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः“जब तु…

Read hadeeth
Share
#10870HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा हो और उसके सामने कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु हो, तो वह उसके लिए ओट हो जाती है। किंतु, यदि उसके सामने कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु न हो, तो उसकी नमाज़ को गधा, महिला तथा काला कुत्ता भंग कर देते हैं।

अबूज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई नमाज़ के लिए खड़ा हो और उसके सामने कजावे के पिछले भाग की लकड़ी के समान कोई वस्तु हो, तो वह उसके लिए ओट हो जाती है। किंतु, यदि उसके सामने कजाव…

Read hadeeth
Share
#10871HadeethEnc[सह़ीह़]

जब तुममें से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। यदि वह न रुके, तो उससे भिड़ जाए, इसलिए कि वह शैतान है।

अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई सुतरा सामने रखकर नमाज़ पढ़े और कोई उसके सामने से गुज़रना चाहे, तो उसे रोके। यदि वह न रुके, तो उससे भिड़ जाए, इसलिए कि वह शैतान है।" एक दूसरी रिवायत में इस प्…

Read hadeeth
Share
#10881HadeethEnc[सह़ीह़]

अपने इस परदे को हमारे सामने से हटा दो। क्योंकि, इसके चित्र बराबर मेरी नमाज़ में व्यवधान डाल रहे हैं।

अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) के पास एक परदा था, जिससे उन्होंने अपने घर के एक भाग को ढाँप रखा था। लेकिन, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "अपने इस परदे को हमारे सामने से हटा दो। क्योंकि, इसके चित्र बराबर मेरी नमाज़ में व्यवधान ड…

Read hadeeth
Share
#10882HadeethEnc[सह़ीह़]

मेरी यह चादर अबू जह्म को दे दो और अबू जह्म से उसकी अंबजानी चादर (बिना धारियों वाली मोटी चादर) ले आओ। क्योंकि इसने अभी नमाज़ से मेरा ध्यान भटकाने का काम किया है।

आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने विभिन्न रंगों की रेखाओं वाली एक चादर में नमाज़ पढ़ी। चुनांचे, उसकी रेखाओं पर एक नज़र डाली और जब पूरी कर चुके, तो फ़रमाया : "मेरी यह चादर अबू जह्म को दे दो और अबू जह्म से उसकी अंबजानी चादर (बिना धार…

Read hadeeth
Share

Shopping Basket

Loading...