जब कोई बंदा किसी वस्तु पर धिक्कार करता है, तो धिक्कार आकाश की ओर चल देता है, लेकिन उसके लिए आकाश के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। अतः, वह धरती की ओर उतरने लगता है, लेकिन धरती के द्वार भी उसके लिए बंद कर दिए जाते हैं। फिर वह दाएँ-बाएँ जाने का प्रयास करता है, लेकिन जब कहीं कोई जगह नहीं मिलती, तो उसकी ओर लौटता है, जिसपर धिक्कार किया गया है। यदि वह उसके योग्य है, तो ठीक। अन्यथा, धिक्कार करने वाले की ओर लौट जाता है।
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अबु दरदा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जब कोई बंदा किसी वस्तु पर धिक्कार करता है, तो धिक्कार आकाश की ओर चल देता है, लेकिन उसके लिए आकाश के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। अतः, वह धरती की ओर उतरने लगता है, लेकिन धरती के द्वार भी उसके लिए बंद कर दिए जाते हैं। फिर वह दाएँ-बाएँ जाने का प्रयास करता है, लेकिन जब कहीं कोई जगह नहीं मिलती, तो उसकी ओर लौटता है, जिसपर धिक्कार किया गया है। यदि वह उसके योग्य है, तो ठीक। अन्यथा, धिक्कार करने वाले की ओर लौट जाता है।"
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