افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#66518[स़ह़ीह़]
HadeethEnc · 1.58.0

“निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ही स्वीकार करता है। अल्लाह ने ईमान वालों को वही आदेश दिया है, जो उसने रसूलों को दिया था।

Available translations

Choose an available translation of this Hadeeth

01

Hadeeth text

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "निश्चय अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ही ग्रहण करता है। उसने ईमान वालों को वही आदेश दिया है, जो रसूलों को दिया है। उसने (रसूलों से) कहा है : (ऐ रसूलो! स्वच्छ चीज़ें खाओ और अच्छे कार्य करो।) [सूरा अल-मोमिनून : 51] तथा (ईमान वालों से) कहाः (ऐ ईमान वालो! उन स्वच्छ चीज़ों में से खाओ, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं।) [सूरा अल-बक़राः 172] फिर अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक व्यक्ति का ज़िक्र किया, जो लंबी यात्रा में है, उसके बाल बिखरे हुए हैं और शरीर धूल से अटा हुआ है। वह आकाश की ओर अपने दोनों हाथों को फैलाकर कहता है : ऐ मेरे रब! ऐ मेरे रब! लेकिन उसका खाना हराम, उसका पीना हराम, उसका वस्त्र हराम और उसकी परवरिश हराम से हुई है। ऐसे में भला उसकी दुआ कैसी क़बूल हो सकती है?"
02

Explanation

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि अल्लाह पाक एवं पुनीत है, कमियों एवं दोषों से मुक्त तथा हर एतबार से परिपूर्ण है। वह केवल उन्हीं कार्यों, शब्दों और विश्वासों को स्वीकार करता है जो शुद्ध हों और जो केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए और उसके पैगंबर के तरीक़े के अनुसार किए गए हों। अल्लाह की निकटता केवल इसी प्रकार की इबादतों के द्वारा प्राप्त किया जाना चाहिए। याद रखें कि अपने कर्मों को शुद्ध करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन हलाल भोजन खाना है। हलाल भोजन खाने से व्यक्ति के कर्म शुद्ध होते हैं। इसीलिए जिस प्रकार अल्लाह ने रसूलों को हलाल भोजन खाने और अच्छे कर्म करने का आदेश दिया, उसी प्रकार उसने ईमान वालों को भी इसका आदेश दिया है। उसका कथन है : (ऐ रसूलो! हलाल चीज़ें खाओ और नेक अमल करो। निःसंदेह मैं वह सब जानता हूं जो तुम करते हो।) [सूरा मोमिनून : 51] एक अन्य स्थान में उसने कहा है : (ऐ ईमान वालो! हमारी दी हुई हलाल चीज़ें खाओ।) [सूरा बक़रा : 172]

फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हराम भोजन करने से सावधान किया। क्योंकि हराम भोजन कर्म को नष्ट कर देता है और उसे अल्लाह के यहाँ क़बूल होने नहीं देता। चाहे क़बूल होने के ज़ाहिरी सबब जितने भी पाए जाएँ। मसलन :

1- किसी नेक काम, जैसे हज, जिहाद और रिश्ते का हक़ अदा करने आदि के लिए लंबा सफ़र करना।

2- इन्सान का परेशान हाल होना। जैसे उसके बाल बिखरे हुए हों और धूल मिट्टी लगने के कारण उसके शरीर और कपड़े का रंग बदला हुआ हो। यह सब कुछ इस बात का प्रमाण है कि आदमी बहुत परेशान है।

3- दुआ के लिए आकाश की ओर हाथ उठाना।

4- अल्लाह के नामों को वसीला बनाना और गिड़गिड़ाकर दुआ करना। मसनल ऐ मेरे रब ! ऐ मेरे रब! कहना।

दुआ क़बूल होने के इन कारणों के पाए जाने के बावजूद उसकी दुआ क़बूल नहीं होती। क्योंकि उसका खाना हराम का, उसका पीना हराम का, उसका वस्त्र हराम का है और उसका पालन-पोषण हराम भोजन से हुआ है। ऐसे में उसकी दुआ क़बूल हो भी तो हो कैसे?
03

Benefits

सर्वशक्तिमान अल्लाह अपनी ज़ात, गुणों, कार्यों और आदेशों में परिपूर्ण है।
केवल अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए तथा उसके नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा बताए गए तरीक़े के अनुसार कार्य करने का आदेश।
ऐसी शैली अपनाना जो अमल के लिए उत्साह और प्रेरणा पैदा करे। इसका प्रमाण अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह कथन है : "अल्लाह ने ईमान वालों को उसी बात का आदेश दिया है, जिसका आदेश रसूलों को दिया है।" क्योंकि जब ईमान वाले को यह एहसास होगा कि जो काम वह करने जा रहा है, उसका आदेश रसूलों को भी दिया गया था, तो उसके मन में रसूलों के पदचिन्हों पर चलते हुए यह काम करने की परबल इच्छा पैदा होगी।
दुआ की स्वीकृति में बाधा डालने वाली चीजों में से एक है हराम भोजन खाना।
इस हदीस में पाँच चीज़ों का ज़िक्र है, जो दुआ के क़बूल होने का कारण बनती हैं : 1- लंबी यात्रा। क्योंकि इससे विनम्रता पैदा होती है, जो दुआ स्वीकार होने का एक प्रमुख कारण है। 2- परेशानी की हालत। 3- हाथों को आसमान की ओर उठाना। 4. बार-बार अल्लाह की रुबुबीयत (उसके स्रष्टा, स्वामी और प्रबंधक होने) का हवाला देते हुए आग्रह के साथ दुआ करना। दुआ के क़बूल होने का यह भी एक बड़ा कारण है। 5- हलाल चीज़ें खाना और पीना।
हलाल भोजन खाने से नेक कामों में मदद मिलती है।
क़ाज़ी कहते हैं : अरबी शब्द 'तैयिब' इसी भाषा के एक और शब्द 'ख़बीस' के विपरीत है। जब शब्द 'तैयिब' अल्लाह की विशेषता के रूप में आता है, तो इसका अर्थ यह है कि अल्लाह सभी कमियों से पाक है और सभी बुराइयों से स्वच्छ है। जब यह किसी व्यक्ति के गुण के रूप में आता है, तो इसका मतलब यह है कि वह बुरे आचरण और बुरे कर्मों से दूर है तथा अच्छे आचरण और कर्मों से युक्त है। जब यह धन के विशेषण के रूप में आए, तो इसका अर्थ यह होता है कि धन वैध और उत्कृष्ट है।

Attribution

[इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है]

Categories

Share

Share hadeeth

Sharing options · 0 Total shares

Share

← Back to encyclopedia
Shopping Basket

Loading...