افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#66210[स़ह़ीह़]
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तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाओगे, चोरी नहीं करोगे, व्यभिचार नहीं करोगे

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01

Hadeeth text

उबादा बिन सामित -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, जो बद्र युद्ध में शरीक थे और अक़बा की रात अगुवा (नक़ीब) नियुक्त किए गए लोगों में से एक थे, कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया, जबकि आपके आस-पास आपके साथियों में से कई लोग मौजूद थे : "तुम लोग मुझसे इस बात पर बैअत करो कि तुम किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाओगे, चोरी नहीं करोगे, व्यभिचार नहीं करोगे, अपनी संतान का वध नहीं करोगे, कोई ऐसा आरोप (कलंक) नहीं लगाओगे जिसे तुम अपने हाथों एवं पैरों से गढ़ लिए हो और किसी भले काम में अवज्ञा नहीं करेंगे। जो अपने दिए हुए इन वचनों को पूरा करेगा, उसे अल्लाह के यहाँ प्रतिफल मिलेगा और जो इनमें से किसी चीज़ में संलिप्त होगा और उसे दुनिया में दंड मिल गया, तो यह उसके लिए कफ़्फ़ारा है। और जो इनमें से किसी चीज़ में संलिप्त हुआ और अल्लाह ने पर्दा डाल दिया, तो वह अल्लाह के हवाले है। चाहे तो क्षमा कर दे और चाहे तो दंड दे।" चुनांचे हमने इन बातों पर आपसे बैअत की।
02

Explanation

उबादा बिन सामित रज़ियल्लाहु अनहु, जो महान बद्र युद्ध में शामिल हुए थे और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मदीना हिजरत करने से पहले मक्का में मौजूदगी के दौरान अक़बा की रात मिना में आपके सहयोग की प्रतिज्ञा लेने वाले प्रतिनिधि मंडल के सरदार थे, बताते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने सहाबा के बीच बैठे हुए थे कि उनसे निम्नलिखित बातों पर बैअत करने को कहा : 1- अल्लाह की इबादत किसी को साझी नहीं बनाएँगे। 2- चोरी नहीं करेंगे। 3- व्यभिचार में संलिप्त नहीं होंगे। 4- अपने बच्चों की हत्या नहीं करेंगे। ग़रीबी के डर से बच्चों की और शर्म के डर से बच्चियों की। 5- ऐसा झूठ सामने नहीं रखेंगे, जिसे उन्होंने हाथों और पैरों के दरमियान गढ़ लिया हो। क्योंकि अधिकतर गुनाह उन्हीं के द्वारा होते हैं, यद्यपि दूसरे अंग भी गुनाह में शामिल हो जाएँ। 6- किसी नेकी के काम में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अवज्ञा नहीं करेंगे। बैअत करने वालों में से जो इस बैअत का पालन करेगा, उसका प्रतिफल देना अल्लाह का काम है। और जो ऊपर बयान किए गए गुनाहों में से शिर्क को छोड़कर किसी अन्य गुनाह में संलिप्त होगा, और दुनिया में उसे उसका शरई दंड मिल गया, तो यह दंड उसके लिए प्रायश्चित बन जाएगा और फलस्वरूप वह पाक-साफ़ हो जाएगा। इसके विपरीत जो व्यक्ति इनमें से किसी गुनाह में संलिप्त होगा और उसके बाद अल्लाह ने उसके गुनाह पर पर्दा डाल दिया, तो फिर मामला अल्लाह के हाथ में रहेगा। चाहे तो माफ़ कर दे और चाहे तो दंड दे। चुनांचे उपस्थित सभी लोगों ने आपके हाथ पर इन बातों की प्रतिज्ञा ली।
03

Benefits

अक़ाबा की पहली बैअत की विषयवस्तु का विवरण, जो मक्का में जिहाद अनिवार्य होने से पहले की गई थी।
सिंधी कहते हैं : "في معروف" : ज़ाहिर सी बात है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सारे ही आदेश अच्छे काम के हैं। इससे परे की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अतः आपके शब्द "في معروف" अनुसरण के अनिवार्य होने का कारण बताने और यह स्पष्ट करने के लिए हैं कि किसी सृष्टि का अनुसरण बुरे काम में नहीं किया जाएगा। साथ ही यह कि बैअत के समय अच्छे काम में अनुसरण की शर्त रखनी चाहिए। संपूर्ण अनुसरण की बैअत नहीं होनी चाहिए।
मुहम्मद बिन इस्माईल तैमी आदि कहते हैं : यहाँ संतान की हत्या की बात विशेष रूप से इसलिए कही गई है कि यह हत्या भी है और संबंध-विरोधी कार्य भी। इसलिए इससे मना करने की अधिक ज़रूरत थी। दूसरी बात यह है कि अरबों में लड़कियों को ज़िंदा दफ़न करना और ग़रीबी के भय से बच्चों की हत्या करना एक साधारण बात थी। तीसरी बात यह है कि बच्चों का ज़िक्र इसलिए भी हुआ है कि बच्चे इस अवस्था में नहीं होते कि अपनी रक्षा कर सकें।
नववी कहते हैं : इस हदीस की व्यापकता अल्लाह के निम्नलिखित कथन द्वारा सीमित कर दी गई है : {إِنَّ اللَّهَ ‌لَا ‌يَغْفِرُ أَنْ يُشْرَكَ بِهِ} इसलिए अगर इस्लाम धर्म का परित्याग करने वाले व्यक्ति को उसके इस अपराध के कारण (इस्लामी हुकूमत द्वारा) मृत्यु दंड दिया जाता है, तो यह मृत्यु दंड उसके लिए कफ़्फ़ारा नहीं बनेगा।
क़ाज़ी अयाज़ कहते हैं : अधिकतर उलेमा का मत यह है कि शरई दंड कफ़्फ़ारा बन जाया करते हैं।

Attribution

[इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]

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