افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#6611[स़ह़ीह़]
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जो भी सोना या चाँदी रखने वाला व्यक्ति अपने उस धन का हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, उसके लिए क़यामत के दिन आग की तख़्तियाँ तैयार की जाएँगी

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01

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अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो भी सोना या चाँदी रखने वाला व्यक्ति अपने उस धन का हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, उसके लिए क़यामत के दिन आग की तख़्तियाँ तैयार की जाएँगी और उन्हें जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, फिर उनसे उसके पहलू, उसकी पेशानी और पीठ को दागा जाएगा। जब-जब तख़्तियाँ ठंडी हो जाएँगी, उन्हें दोबारा गर्माया जाएगा। यह अज़ाब एक ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल के बराबर होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि बंदों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और (अज़ाब में गिरफ़्तार व्यक्ति) जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाले अपने रास्ते को देख ले।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! ऊँटों का क्या हुक्म है? आपने फ़रमाया : "जो व्यक्ति ऊँटों का मालिक हो और उनका हक़ (ज़कात) अदा न करता हो, जबकि उनका हक़ यह भी है कि उनको पानी पिलाने के दिन (ज़रूरतमंदों एवं यात्रियों के लिए) उनका दूध दूहा जाए, तो क़यामत के दिन एक बड़े समतल मैदान में उसे ऊँटों के सामने मुँह के बल औंधा डाल दिया जाएगा और उसके सारे ऊँट पहले से भी अधिक मोटे होकर वहाँ उपस्थि होंगे। ऊँट का एक बच्चा तक अनुपस्थित नहीं होगा। यह ऊँट अपने खुरों से उस व्यक्ति को रौंदेंगे और अपने मुँह से उसे काटेंगे। जब अंतिम ऊँट (उसे रौंदते हुए) गुज़र जाएगा, तो पहले ऊँट को दोबारा लौटा दिया जाएग। यह अज़ाब ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि बंदों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और वह जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाला अपना रास्ता देख ले।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! गायों और बकरियों का क्या हुक्म है? आपने फ़रमाय : "जो व्यक्ति गायों और बकरियों का मालिक हो और उनका हक़ (ज़कात) अदा न करता हो, क़यामत के दिन उसे एक बड़े समतल मैदान में उसकी गायों एवं बकरियों के सामने औंधे मुँह डाल दिया जाएगा। एक भी गाय या बकरी कम नहीं दिखेगी। किसी का सींग न मुड़ा होगा, न टूटा होगा और न कोई बिना सींग की होगी। वह अपनी सींगों से उसे मारेंगी और अपने खुरों से उसे रौंदेंगी। जब अंतिम गाय या बकरी रौंदकर गुज़र जाएगी, तो पहली गाय को दोबारा लौटा दिया जाएग। यह अज़ाब ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि लोगों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और वह व्यक्ति जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाला अपना रास्ता देख ले।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! घोड़ों के बारे में क्या हुक्म है? आपने फ़रमयाा : 'घोड़े तीन प्रकार के होते हैं। एक तो वह घोड़े जो इन्सान के लिए बोझ (गुनाह का सबब) होते हैं, दूसरे वह घोड़े जो इन्सान के लिए पर्दा होते हैं और तीसरे वह घोड़े जो इन्सान के लिए सवाब का सबब बनते हैं। जो घोड़े इन्सान के लिए गुनाह का सबब हुआ करते हैं, वह ऐसे घोड़े हैं, जिन्हें वह लोगों को दिखाने, अभिमान और मुसलमानों का मुक़ाबला करने के लिए रखता है। इस प्रकार के घोड़े इन्सान के लिए गुनाह का सबब हुआ करते हैं। जो घोड़े इन्सान के लिए पर्दा बनते हैं, वह ऐसे घोड़े हैं, जिन्हें इन्सान अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए पालता है और उनकी पीठ और गर्दनों के बारे में अल्लाह के हक़ को नहीं भूलता। इस प्रकार के घोड़े इन्सान के लिए पर्दा हुआ करते हैं। जो घोड़े इन्सान के लिए नेकी का सबब हुआ करते हैं, वह ऐसे घोड़े हैं, जिन्हें आदमी अल्लाह के मार्ग में जिहाद के उद्देश्य से मुसलमानों के लिए चरागाह या बाग में बाँधकर रखे। वह घोड़े उस चरागाह या बाग में जो कुछ भी खाते हैं, उनके परिमाण में उसके लिए नेकियाँ लिखी जाती हैं और उनकी लीद एवं पेशाब के परिमाण में भी उसके हक़ में नेकियाँ लिखी जाती हैं। अगर वह अपनी रस्सी तोड़कर एक टीले या दो टीलों पर दौड़कर चढ़ जाएँ, तो इस दौरान उनके पाँव के पड़ने वाले निशानों और उनकी गिरने वाली लीद के परिमाण में भी अल्लाह उसके लिए नेकियाँ लिख देता है। अगर उनका मालिक उन्हें ले कर किसी नदी पर से गुज़रे और वह उसका पानी पी लें, हालाँकि उसका उन्हें पानी पिलाने का इरादा न भी हो, तब भी वह जितना पानी पीते हैं, उसके अनुसार अल्लाह उसके लिए नेकियाँ लिख देता है।'"
02

Explanation

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने विभिन्न प्रकार के धन तथा उनकी ज़कात अदा न करने वाले को क़यामत के दिन होने वाली सज़ा का ज़िक्र किया है। मसलन :

1- सोना, चाँदी तथा उनके जैसे अन्य धन एवं तिजारत के सामान। इनपर अगर ज़कात वाजिब हो जाए और ज़कात अदा न की जाए, तो क़यामत के दिन इनको पिघलाकर पहले तख़्तियों के रूप में ढाला जाएगा और उसके बाद उन तख़्तियों को जहन्नम की आग में तपाकर उनके मालिक को अज़ाब दिया जाएगा, अतः उनसे उसके पहलू, पेशानी और पीठ को दागा जाएगा, जब-जब वह ठंडी पड़ जाएँगी, उन्हें दोबारा तपाया जाएगा। क़यामत के दिन अज़ाब का यह सिलसिला दिन भर जारी रहेगा। वह दिन भी पचास हज़ार साल का होगा। थमेगा उसी समय जब लोगों के बीच अल्लाह फ़ैसला कर देगा और यह तय हो जाएगा कि वह जन्नत जाने वालों में से है या जहन्नम की तरफ जाने वालों में से है।

2- ऊँट का जो मालिक फ़र्ज़ ज़कात और उसका हक़ अदा न करता हो, मसलन उसका दूध ग़रीबों और निर्धनों को न पिलाता हो, तो क़यामत के दिन किसी एक भी ऊँट को छोड़े बिना उसके सारे ऊँटों को मोटा-ताज़ा बनाकर लाया जाएगा, फिर उनके मालिक को उनके सामने एक समतल एवं विस्तृत भूमि में लिटा दिया जाएगा, उसके बाद वह ऊँट उसे अपने पैरों से रौंदेंगे और अपने दाँतों से काटेंगे। जब अंतिम ऊँट भी गुज़र जाएगा, तो पहले ऊँट से फिर से यह सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। अज़ाब का यह सिलसिला क़यामत के रोज़ दिन भर जारी रहेगा और वह दिन भी पचास हज़ार वर्ष का होगा। थमेगा उसी समय जब सारे लोगों के बीच अल्लाह निर्णय कर देगा और यह तय हो जाएगा कि वह जन्नत जाने वालों में से है या जहन्नम की तरफ जाने वालों में से है।।

3- गाय और बकरी का जो मालिक उनकी फ़र्ज़ ज़कात न देता हो, क़यामत के दिन उनकी पूरी संख्या के साथ इस तरह लाया जाएगा कि एक गाय या बकरी भी इधर-उधर न होगी। सब जानवर बिलकुल सही-सालिम होंगे। न किसी का सींग मुड़ा होगा, न किसी का सींग टूटा होगा और न कोई जानवर बिना सींग का होगा। फिर उनके मालिक को एक बड़े एवं समतल मैदान में उनके सामने लिटा दिया जाएगा। फिर ये गायें और बकरियाँ उसे अपने सींगों से मारेंगी और अपने पैरों से कुचलेंगी। जब अंतिम गाय एवं बकरी भी गुज़र जाएगी, तो पहली गाय या बकरी से फिर से यह सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। अज़ाब का यह सिलसिला क़यामत के रोज़ दिन भर जारी रहेगा और वह दिन भी पचास हज़ार वर्ष का होगा। थमेगा उसी समय जब सारे लोगों के बीच अल्लाह निर्णय कर देगा तो वह या तो जन्नत वालों में से होगा या जहन्नम वालों में से होगा।

4- घोड़ा पालने वाला। दरअसल घोड़े तीन प्रकार के हुआ करते हैं :

1- ऐसा घोड़ा जो मालिक के लिए गुनाह का कारण बने। इससे मुराद ऐसा घोड़ा है, जिसे प्रसिद्धि, अभिमान एवं मुसलमानों से युद्ध के लिए पाला जाए।

2- ऐसा घोड़ा जो इन्सान के लिए पर्दे का कारण हो। इससे मुराद ऐसा घोड़ा है, जिसे अल्लाह की राह में जिहाद के लिए रखा जाए और फिर उसके साथ अच्छा व्यवहार करते हुए उसे खिलाने-पिलाने और उसकी देखभाल की बेहतर व्यवस्था की जाए, और इसी के अन्तर्गत नर घोड़े को मादा घोड़ी के पास जाने देना है।

3- ऐसा घोड़ा जो सवाब का कारण बने। इससे मुराद ऐसा घोड़ा है, जिसे अल्लाह की राह में जिहाद के लिए रखा जाए। इस प्रकार के घोड़े जब किसी चरागाह या बाग़ में होते हैं, तो उस चरागाह या बाग़ में जो कुछ भी खाते हैं, उसी परिमाण में उनके मालिक के लिए नेकियाँ लिखी जाती हैं, तथा उनकी लीद और मूत्र के परिमाण में भी उसके लिए नेकियाँ लिख दी जाती हैं। अगर वह रस्सी तोड़कर एक टीले या दो टीलों पर दौड़कर चढ़ जाएँ, तो उनके पैरों के निशानों और इस दौरान गिरने वाली लीद के समान अल्लाह तआला उसके लिए नेकियाँ लिख देता है। अगर उनका मालिक उन्हें किसी नहर पर ले जाए और वो उनका पानी पी लें, चाहे उनका मालिक उन्हें वहाँ पानी पिलाने का इरादा न भी रखता हो, तब भी वो जितना पानी पीते हैं, उसके पिरमाण में अल्लाह उनके लिए नेकियाँ लिख देता है।

उसके बाद अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से गधों के बारे में पूछा गया कि क्या इस विषय में गधों का हुक्म घोड़ों की तरह है?

आपने उत्तर दिया कि मेरे पास गधों के बारे में कोई निर्देश नहीं आया है। अलबत्ता, यह अद्भुत एवं सारगर्भित आयत मौजूद है, जिसके दायरे में हर प्रकार की नेकियाँ और गुनाह आ जाते हैं, आयत का अर्थ है : जिसने कण भर भी नेकी की होगी, वह उसको देख लेगा, तथा जिसने कण भर भी बुराई की होगी, वह उसे देख लेगा। [सूरा ज़लज़ला : 8] यानी जिसने अच्छे इरादे से गधा पाला होगा, वह उसका सवाब सामने देखेगा और जिसने बुरे इरादे से गधा पाला होगा, वह उसकी सज़ा सामने देखेगा। इस आयत के दायरे में हर प्रकार के कार्य आ जाते हैं।
03

Benefits

ज़कात देना वाजिब है। ज़कात रोकने वाले को बड़ी सख़्त चेतावनी दी गई है।
सुस्ती के कारण ज़कात न देने वाला काफ़िर तो नहीं है, लेकिन बड़े ख़तरे के दहाने पर हुआ करता है।
इन्सान जब किसी नेकी के काम का इरादा करके उसे कर डालता है, तो उसे उस कार्य के विवरणों का भी सवाब मिलता है, चाहे उनकी नीयत न भी की हो।
धन में ज़कात के अतिरिक्त और भी हक़ हुआ करते हैं।
ऊँट का एक हक़ यह है कि जब उसे पानी पिलाने के लिए घाट में ले जाया जाए, तो वहाँ मौजूद ग़रीबों को भी उसका दूध दोहकर पिलाया जाए, ताकि ज़रूरतमंदों को घर-घर न जाना पड़े और जानवरों के लिए भी अच्छा हो। इब्न-ए-बत्ताल कहते हैं : धन पर दो प्रकार के हक़ हैं :व्यक्तिगत अनिवार्यता एवं उसके सिवा। जानवर का दूध दोहकर ग़रीबों को पिलाना अनिवार्य हक़ के दायरे में तो नहीं आता, लेकिन नैतिकता का तक़ाज़ा है।
ऊँट, बैल एवं बकरे से जुड़ा हुआ एक हक़ यह है कि जब उन्हें किसी मादा जानवर को गाभिन करने के लिए छोड़ने को कहा जाए, तो छोड़ दिया जाए।
गधों और उन तमाम चीज़ों का, जिनके बारे में शरीयत का कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद न हो, हुक्म यह है कि वह क़ुरआन की इस आयत की व्यापकता के दायरे में आती हैं : {जिसने कण भर भी नेकी की होगी, वह उसे देख लेगा और जिसने कण भर भी बुराई की होगी, वह उसे देख लेगा।}
इस आयत में नेक काम करने की प्रेरणा दी गई है, चाहे थोड़ा ही क्यों न हो। इसी तरह बुरे काम से सावधान किया गया है, चाहे मामूली ही क्यों न हो।

Attribution

[इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]

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