افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#65312[स़ह़ीह़]
HadeethEnc · 1.58.0

{क्या तुम हाजियों को पानी पिलाने और सम्मानित मस्जिद की सेवा को, उसके (ईमान के) बराबर समझते हो, जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाया।} [सूरा तौबा : 19] आयत के अंत तक।

Available translations

Choose an available translation of this Hadeeth

01

Hadeeth text

नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिंबर के पास था, तो एक व्यक्ति ने कहा : मुझे कोई परवाह नहीं कि मैं इस्लाम के बाद हाजियों को पानी पिलाने के सिवा कोई और काम न करूँ। और दूसरे ने कहा : मुझे कोई परवाह नहीं कि मैं इस्लाम के बाद सम्मानित मस्जिद (काबा) की सेवा करने के सिवा कोई और काम न करूँ। जबकि एक अन्य व्यक्ति ने कहा : अल्लाह की राह में जिहाद करना तुम दोनों की कही हुई बातों से उत्तम है। तो उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उन्हें डाँटा और कहा : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिंबर के पास अपनी आवाज़ें ऊँची न करो। दरअसल वह जुमे का दिन था। लेकिन जब मैं जुमे की नमाज़ पढ़ लूँगा, तो (अंदर जाकर) आपसे उस बात के बारे में पूछूँगा जिसमें तुम लोगों ने मतभेद किया है। चुनांचे इसी संदर्भ में सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने यह आयत उतारी : {क्या तुम हाजियों को पानी पिलाने और सम्मानित मस्जिद की सेवा को, उसके (ईमान के) बराबर समझते हो, जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाया।} [सूरा तौबा : 19] आयत के अंत तक।
02

Explanation

नौमान बिन बशीर रज़ियल्लाहु अन्हुमा ने वर्णन किया है कि वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिंबर के पास बैठे हुए थे कि एक आदमी को कहते हुए सुना : मुझे कोई परवाह नहीं कि मैं इस्लाम लाने के बाद हाजियों को पानी पिलाने के सिवा कोई और अमल न करूँ। एक दूसरे व्यक्ति ने कहा : मुझे इसकी कोई परवाह नहीं कि इस्लाम लाने के बाद मैं कोई और काम न करूँ, सिवाय इसके कि मैं मस्जिद-ए-हराम को आबाद रखूँ। एक तीसरे व्यक्ति ने कहा : अल्लाह के रास्ते में जिहाद करना तुम दोनों की कही हुई बातों से उत्तम है। अतः उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु ने उन्हें नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के मिंबर के पास आवाज़ बुलंद करने पर डाँटा। यह जुमा के दिन की सुबह थी। उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : लेकिन जब मैं जुमा की नमाज़ पढ़ लूँगा तो अंदर जाकर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उस बारे में पूछ लूँगा जिसमें तुम लोगों का इख़्तिलाफ़ है। चुनांचे इसी संदर्भ में सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने फ़रमाया :

{क्या तुम हाजियों को पानी पिलाने और सम्मानित मस्जिद (काबा) की सेवा को, उसके (ईमान के) बराबर समझते हो, जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान लाया तथा अल्लाह की राह में जिहाद किया? अल्लाह के समीप दोनों बराबर नहीं हैं तथा अल्लाह अत्याचारियों को सुपथ नहीं दिखाता।} [सूरा तौबा : 19]
03

Benefits

कार्यों के अज्र और सवाब में भिन्नता पाई जाती है।
कर्मों की श्रेष्ठता में भिन्नता शरीयत के बयान के अनुसार पाई जाती है, लोगों के व्यक्तिगत विचारों के अनुसार नहीं।
अल्लाह तथा आख़िरत के दिन पर ईमान की शर्त के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद की फ़ज़ीलत।
नववी कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि जुमा के दिन और दूसरे दिनों में मस्जिदों में आवाज़ बुलंद नहीं करनी चाहिए, और जब लोग नमाज़ के लिए एकत्र हों, तो ज्ञान या किसी और कारण से भी आवाज़ बुलंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे नमाज़ पढ़ने वालों और ज़िक्र करने वालों को परेशानी होती है।

Attribution

[इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है]

Categories

Share

Share hadeeth

Sharing options · 0 Total shares

Share

← Back to encyclopedia
Shopping Basket

Loading...