ग़ैब की चाबियां पांच हैं
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अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "ग़ैब की चाबियां पांच हैं, {निःसंदेह, अल्लाह ही के पास है क़यामत का ज्ञान, वही उतारता है वर्षा और जानता है जो कुछ गर्भाशयों में है और नहीं जानता कोई प्राणी कि वह क्या कमायेगा कल और नहीं जानता कोई प्राणी कि किस धरती में मरेगा। वास्तव में, अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला, सबसे सूचित है।}"
Explanation
Benefits
सिन्धी कहते हैं : हदीस के शब्द 'ग़ैब की चाबियाँ पाँच हैं' में इन पाँच चीज़ों को 'ग़ैब की चाबियाँ' इसलिए कहा गया है, क्योंकि जिसके पास यह पाँच चीज़ें हैं, उसके पास संपूर्ण ग़ैब है। अतः, यह मानो ऐसी चीज़ें हो गईं, जिनसे ग़ैब के खज़ाने खोले जाते हैं।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : इब्न-ए-अबू जमरा कहते हैं : सुनने वाले को बात समझाने के लिए 'कुंजियों' शब्द का प्रयोग किया है; क्योंकि हर वह चीज़, जिसके और आपके बीच कोई पर्दा हो, वह आपसे छुपी हुई होती है। और सामान्यतः उस तक पहुँचने का ज़रिया दरवाज़ा होता है। फिर जब दरवाज़ा बंद हो, तो कुंजी की आवश्यकता पड़ती है। तो जब उस कुंजी का ही पता न हो, जो ग़ैब तक पहुँचने का ज़रिया है, तो फिर उस ग़ैब को कैसे जाना जा सकता है।
इब्न-ए-अबू जमरा ने कहा है : इन्हें पाँच रखने के पीछे का रहस्य इस बात की ओर इशारा करना है कि समस्त जगत (संसार) इसी में सिमटे हुए हैं।
अल्लाह अपनी किसी हिकमत के तहत रसूलों पर ग़ैब की कुछ बातें प्रकट कर देता है।
मुनज्जिमों (ज्योतिषियों) और काहिनों (भविष्यवक्ताओं) के ग़ैब का ज्ञान जानने के झूठे दावों का खंडन, तथा यह कि जिसने भी उन चीज़ों में से किसी के ज्ञान का दावा किया, जिनका ज्ञान अल्लाह ने अपने लिए ख़ास रखा है, उसने अल्लाह, उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और महान क़ुरआन को झुठलाया।
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