अल्लाह सोता नहीं है तथा सोना उसकी महानता के अनुरूप भी नहीं है
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अबू मूसा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : हमारे बीच अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम खड़े हुए और पाँच बातें फ़रमाईं : "अल्लाह सोता नहीं है तथा सोना उसकी महानता के अनुरूप भी नहीं है, वह तराज़ू को नीचे तथा ऊपर करता है, उसकी ओर रात के कर्म दिन के कर्मों से पहले और दिन के कर्म रात के कर्मों से पहले प्रस्तुत किए जाते हैं, उसका पर्दा नूर है -और एक रिवायत में है : आग है- यदि वह उसे खोल दे, तो उसके चेहरे की चमक उसकी सारी सृष्टियों को वहाँ तक जला डालेगी, जहाँ तक उसकी नज़र पहुँचेगी।"
Explanation
Benefits
अल्लाह जिसे चाहता है सम्मानित करता है और जिसे चाहता है अपमानित करता है तथा अपने बंदों में से जिसे चाहता है हिदायत देता है और जिसे चाहता है गुमराह करता है।
कर्म हर दिन और हर रात अल्लाह के यहाँ पेश किए जाते हैं। इसमें बंदों के लिए यह प्रेरणा है कि वे रात और दिन हर समय अल्लाह से डरते रहें।
यह हदीस अल्लाह के न्याय और सृष्टि के मामलों की उत्तम व्यवस्था की दलील है। इसमें कोई शक नहीं कि यह इससे अल्लाह की संपूर्णता प्रकट होती है।
अल्लाह के हिजाब (पर्दे) में होने का सबूत। उसका पर्दा नूर है, जो उसके और उसकी सृष्टि के बीच एक आड़ है। यदि वह न होता, तो सृष्टियाँ जलकर राख हो जातीं।
आजुर्री कहते हैं : "सत्यवादी उलेमा सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह के वही गुण बयान करते हैं, जो ख़ुद अल्लाह ने अपने लिए बयान किए हैं, उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसके लिए बयान किए हैं और सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हुम ने अल्लाह के लिए बयान किए हैं। यही सुन्नत का अनुसरण करने वाले एवं बिदअत से दामन बचाने वाले उलेमा का तरीक़ा है।" उनका कथन समाप्त हुआ। अह्ल-ए-सुन्नत सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह के उन्हीं गुणों को साबित करते हैं, जिन्हें ख़ुद अल्लाह ने अपने लिए साबित किया है। वे इन गुणों को बतलाने वाले शब्दों के साथ न तो छेड़छाड़ करते हैं, न उन्हें अर्थहीन बनाते हैं, न उन गुणों की मिसाल देते हैं और न उनकी कैफ़ियत बताते हैं। इसी तरह वे अल्लाह को उन गुणों से पाक मानते हैं, जिनसे उसने ख़ुद को पाक घोषित किया है। और जहाँ कुछ न हो, वहाँ ख़ामोश रहते हैं। उच्च एवं महान अल्लाह ने कहा है : {उसके जैसी कोई चीज़ नहीं है और वह सब कुछ सुनने वाला सब कुछ देखने वाला है।}
वह नूर जो पाक अल्लाह का गुण (सिफ़त) है, उस नूर से अलग है जिससे उसने पर्दा किया है। जिस नूर से उसने पर्दा किया है, वह एक मख़लूक़ (सृष्टि) नूर है। अतः, अल्लाह का नूर एक ऐसा नूर है जो उसकी शान और उसकी ज़ात (हस्ती) के योग्य है, उसके जैसा कुछ भी नहीं है। याद रहे कि जिसे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने देखा था, वह केवल वही पर्दा था, जो अल्लाह और उसके बंदों के बीच पड़ा हुआ है।
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