افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم. افتتاح البرنامج الدعوي السبت القادم، ٩ / ٣ / ١٤٤٨هـ بعد صلاة الفجر مباشرة مسجد محمد بن إبراهيم، الجامعة الإسلامية بالمدينة المنورة فضيلة الشيخ د. هيثم بن محمد سرحان دورة اليوم الواحد، وختم كتاب كل سبت بإذن الله حياكم الله ونفع بكم.
#5889[स़ह़ीह़]
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चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। गेहूँ, गेहूँ के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। जौ, जौ के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है। खजूर, खजूर के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है।

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01

Hadeeth text

मालिक बिन औस बिन हदसान से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं यह कहते हुए आया कि हमें दीनार से दिरहम बदलकर कौन देगा? चुनांचे तलहा बिन उबैदुल्लाह ने, जो उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- के पास मौजूद थे, कहा : मुझे अपना सोना दिखाओ और उसके बाद आओ, जब हमारा सेवक आ जाएगा, तो हम तुम्हें तुम्हारी चाँदी दे देंगे। यह सुनकर उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : अल्लाह की क़सम, ऐसा नहीं हो सकता, या तो तुम उसे उसकी चाँदी दे दो या फिर उसका सोना वापस कर दो। क्योंकि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "चाँदी सोने के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। गेहूँ, गेहूँ के बदले में अगर नक़द न हो तो सूद हो जाता है। जौ, जौ के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है। खजूर, खजूर के बदले में अगर नक़द न हो, तो सूद हो जाता है।"
02

Explanation

ताबेई मालिक बिन औस बता रहे हैं कि उनके पास कुछ सोने के दीनार थे, जिन्हें वह चाँदी के दिरहम से बदलना चाहते थे। अतः तलहा बिन उबैदुल्लाह ने उनसे कहा कि आप ज़रा मुझे अपने दीनार दें कि मैं उन्हें देख लूँ। फिर ख़रीदने का इरादा बन गया, तो फ़रमाया कि जब हमारे सेवक आए, तो आप आ जाएँ, हम आपको चाँदी के दिरहम दे देंगे। वहाँ उमर बिन ख़त्ताब -रज़ियल्लाहु अनहु- भी मौजूद थे। चुनांचे उन्होंने इस तरह के लेन-देन को ग़लत बताया और तलहा से अल्लाह की क़सम देकर कहा कि वह या तो चाँदी अभी दे दें या फिर लिया हुआ सोना वापस कर दें। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : सोने को चाँदी से या चाँदी को सोने से बेचना हो तो लेन-देन हाथों हाथ होना चाहिए, वरना लेन-देन सूद वाला हो जाएगा, जिसकी वजह से ख़रीद-फ़रोख़्त हराम हो जाएगी। सोने को चाँदी के बदले में या चाँदी को सोने के बदले में बेचना उसी समय ठीक होगा, जब लेनदेन हाथों-हाथ हो और दोनों ओर से क़ब्ज़ा हो जाए। इसी तरह गेहूँ को गेहूँ के बदले, जौ को जौ के बदले और खजूर को खजूर के बदले बेचना उसी समय दुरुस्त होगा, जब वज़न एवं माप बराबर हो और उसी समय दोनों अपने-अपने सामानों पर क़ब्ज़ा कर लें। इन चीज़ों में न तो एक तरफ़ नक़द और एक तरफ़ उधार को जायज़ कहा जा सकता है और न क़ब्ज़े से पहले एक-दूसरे से अलग हो जाने की अनुमति दी जा सकती है।
03

Benefits

इस हदीस में पाँच प्रकार की चीज़ों का उल्लेख किया गया है : सोना, चाँदी, गेहूँ, जौ और खजूर। जब ख़रीद-बिक्री के समय दोनों ओर एक ही प्रकार की चीज़ हो, तो उसके सही होने के लिए दो शर्तों का पाया जाना ज़रूरी है। एक यह कि जहाँ मामला तय हो उसी जगह दोनों अपने-अपने सामान पर क़ब्ज़ा कर लें और दूसरी यह कि वज़न बराबर हो जैसे कि सोना के बदले सोना। अगर ऐसा नहीं होता, तो यह सूद होगा और इस प्रकार के सूद को रिबा अल-फ़ज़्ल कहा जाता है। लेकिन अगर दोनों चीज़ें अलग-अलग प्रकार की हों जैसे कि गेहूं के बदले चाँदी तो ख़रीद-बिक्री के सही होने के लिए एक ही शर्त होगी। वह शर्त है, ख़रीद-बिक्री के स्थान पर ही क़ीमत पर क़ब्ज़ा कर लेना। अगर यह शर्त पूरी नहीं होती, तो इसमें भी सूद आ जाएगा, इस प्रकार के सूद को रिबा अल-नसीया कहते हैं।
ख़रीद - बिक्री के स्थान से मुराद वह स्थान है जहाँ ख़रीद-बिक्री हुई हो। इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि दोनों बैठे हों, चल रहे हों या सवार हों। इसी तरह अलग होने से मुराद वही है, जिसे सामान्य प्रचलन में अलग होना माना जाए।
इस हदीस में आई हुई मनाही के दायरे में हर प्रकार का सोना आ जाता है, ढला हुआ हो कि बिना ढला हुआ। ऐसे ही हर तरह की चाँदी भी आ जाती है, ढली हुई हो कि बिना ढली हुई।
आधुनिक मुद्राओं का आदान-प्रदान करते समय, वही बात ध्यान में रखना ज़रूरी है जो सोने के बदले चाँदी का आदान-प्रदान करते समय ध्यान में रखना ज़रूरी है। यानी अगर पार्टियों की आपसी सहमति से कमी या बढ़ोतरी होती है, तो यह जायज़ है, लेकिन जहाँ बिक्री का मामला तय हो उसी जगह दोनों पक्षों का कब्ज़ा कर लेना ज़रूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो इसमें सूद आ जाएगा और बिक्री अमान्य होगी।
सूदी लेन-देन जायज़ नहीं है और ऐसा अनुबंध अवैध है, भले ही दोनों पक्षों की सहमति हो। क्योंकि इस्लाम मानवता और समाज के अधिकारों की रक्षा करता है, भले ही वे अपने अधिकारों को छोड़ना चाहें।
शक्ति होने पर ग़लत काम होता हुआ दिखने पर मना करना और रोकना ज़रूरी है।
ग़लत काम से मना करते समय प्रमाण भी प्रस्तुत करना चाहिए। जैसे कि उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने किया।

Attribution

[इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]

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