अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में सूर्य ग्रहण हुआ, तो आपने एक व्यक्ति को आवाज़ लगाने के लिए भेजा कि नमाज़ खड़ी होने वाली है। अतः लोग एकत्र हो गए। फिर आप आगे बढ़े, तकबीर कही और दो रकात में चार रुकू और चार सजदे किए।
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आइशा (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के ज़माने में सूर्य ग्रहण हुआ, तो आपने एक व्यक्ति को आवाज़ लगाने के लिए भेजा कि नमाज़ खड़ी होने वाली है। अतः लोग एकत्र हो गए। फिर आप आगे बढ़े, तकबीर कही और दो रकात में चार रुकू और चार सजदे किए।
Explanation
लोग आप -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की मस्जिद में एकत्र हुए, तो आप उस स्थान की ओर बढ़े जहाँ खड़े होकर नमाज़ पढ़ाया करते थे। फिर एक ऐसी नमाज़ पढ़ाई कि उस तरह की नमाज़ लोगों ने इससे पहले कभी नहीं देखी थी। नमाज़ बिना इक़ामत के पढ़ाई। तकबीर कही और दो रकात नमाज़ इस तरह पढ़ाई कि हर रकात में दो-दो रुकू और दो-दो सजदे थे।
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